ब्लू स्टार में ब्रितानी रोल की जांच | दुनिया | DW | 15.01.2014
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दुनिया

ब्लू स्टार में ब्रितानी रोल की जांच

ब्रिटेन इस बात की जांच करा रहा है कि क्या वाकई में 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार में उसने भारत को किसी तरह की मदद की. भारतीय सेना ने अमृतसर के पवित्र स्वर्ण मंदिर में छिपे आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई की थी.

प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा है कि इस बात के सबूत नहीं मिले हैं कि ऑपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटिश सरकार ने किसी तरह की भूमिका निभाई लेकिन जांच के आदेश दे दिए हैं. खुफिया दस्तावेज के मुताबिक उस वक्त की प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने विशेष वायु सेना के एक अधिकारी को योजना बनाने के लिए भारत भेजा था.

कहा जाता है कि इसी अधिकारी ने कार्रवाई की पूरी योजना बनाई थी. बताया जाता है कि योजना फरवरी में बनी. हालांकि ऑपरेशन ब्लू स्टार जून में हुआ था. सरकारी फाइलों में बंद दो गोपनीय पत्रों के सार्वजनिक होने पर इस बात का पता चला.

जांच रिपोर्ट सार्वजनिक

कैमरन ने इस मुद्दे पर ब्रिटेन की संसद में सफाई दी, "मैं जांच को किसी तरह प्रभावित नहीं करना चाहता हूं. लेकिन अब तक कोई ऐसा सबूत नहीं मिला है कि जिससे इस तथ्य को नकारा जाए कि इस कार्रवाई को सिर्फ और सिर्फ भारतीय सैनिकों ने ही अंजाम दिया था." उन्होंने कहा कि इसके साथ यह भी जरूरी है कि इसकी तह तक जाया जाए.

कैमरन का कहना है कि इस कार्रवाई के बाद उपजे घाव अब तक नहीं भरे हैं. स्वर्ण मंदिर में छिपे आतंकवादियों को निकालने के लिए भारतीय सेना की कार्रवाई में कम से कम 500 लोग मारे गए थे. इस कार्रवाई को ऑपरेशन ब्लू स्टार का नाम दिया गया. जून 1984 में हुई इस कार्रवाई के कुछ ही महीनों बाद भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या उनके दो सिख निजी सुरक्षा गार्डों ने कर दी थी.

David Cameron in Peking

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं.

भयंकर परिणाम

पुराने दस्तावेजों को लंबी अवधि के बाद सार्वजनिक किया जाता है. इसी क्रम में पता चला है कि भारत ने ब्रिटेन से इस मामले में गुजारिश की थी, जिसके बाद एक विशेष अधिकारी भारत गया था. जिन दो पत्रों को सार्वजनिक किया गया है, उनमें एक ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेफरी हाव के सचिव ने गृह मंत्री के सचिव को लिखा था. इसमें कहा गया था कि अगर कार्रवाई की जाती है, तो इसके भयंकर परिणाम हो सकते हैं.

पत्र में लिखा गया है, "भारतीय अधिकारियों ने हाल ही में ब्रिटेन से योजना मांगी है कि किस तरह अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से सिख आतंकवादियों को हटाया जाए." पत्र में लिखा गया है कि विदेश मंत्री ने भारतीय गुजारिश पर अमल किया और वायु सेना का एक विशेष अधिकारी भारत गया, जिसने वहां कार्रवाई की योजना तैयार की, जिसे "श्रीमती गांधी" ने पास किया. पत्र में कहा गया है कि इस कार्रवाई से ब्रिटेन में रह रहे भारतीय समुदाय में भी हड़कंप मच सकता है.

थैचर की हरी झंडी

इससे पहले का पत्र थैचर के प्रमुख निजी सचिव रॉबिन बटलर ने लिखा है. छह फरवरी, 1984 का यह पत्र विदेश मंत्रालय की किसी चिट्ठी का जवाब दिखता है, "तीन फरवरी के आपके पत्र के लिए शुक्रिया, जिसमें स्वर्ण मंदिर से सिखों को बाहर निकालने के भारतीय अनुरोध पर सलाह मांगी गई है. प्रधानमंत्री समझती हैं कि विदेश मंत्रालय इस पर काम कर सकता है."

भारतीय सेना की कार्रवाई के मुखिया रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल केएस ब्रार का कहना है कि उन्होंने पहली बार इस तरह की बात सुनी है. कैमरन ने भरोसा जताया है कि इस जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी.

एजेए/एमजे (एएफपी, रॉयटर्स)

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