ब्रेस्ट इम्प्लांट हटाने के लिए पैसे देगी फ्रांस सरकार | जर्मन चुनाव 2017 | DW | 23.12.2011
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

जर्मन चुनाव

ब्रेस्ट इम्प्लांट हटाने के लिए पैसे देगी फ्रांस सरकार

फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में ब्रेस्ट इम्प्लांट करवा चुकी महिलाओं को उन्हें हटवाने की हिदायत दी है. सस्ते सिलिकॉन जेल से बने इम्प्लान्ट्स के कारण महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी खतरे हो सकते हैं.

फ्रांस में करीब तीस हजार महिलाओं को एक बार फिर डॉक्टर की छूरी का सामना करना पड़ेगा. इन महिलाओं के ब्रेस्ट इम्प्लांट के लिए जिस सिलिकॉन जेल का इस्तेमाल किया गया, वह बेहद सस्ती किस्म का था. हालांकि इन महिलाओं को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी. महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए फ्रांस सरकार ने इसका पूरा खर्चा उठाने की बात कही है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि जिन मामलों में ब्रेस्ट इम्प्लांट 'कॉस्मेटिक सर्जरी' का हिस्सा न हो कर स्वास्थ्य कारणों से करवाया गया था, वहां नए इम्प्लांट का खर्चा भी सरकार उठाएगी.

दस गुना सस्ता सिलिकॉन

फ्रांस की जिस कंपनी ने यह इम्प्लान्ट् तैयार किए हैं, वह 2010 में ही दिवालिया हो जाने के कारण बंद हो गई थी. बंद होने से पहले तक पीआईपी नाम की इस कंपनी के करीब तीन लाख इम्प्लान्ट्स दुनिया भर में बेचे जा चुके थे. पिछले साल घटिया सिलिकॉन के इस्तेमाल की बात सामने आने के कारण इस कंपनी के उत्पादों पर रोक लगा दी गई. फ्रांस के अलावा यूरोप के कई अन्य देशों, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका में भी ये बेचे गए. इसलिए इन देशों में भी इस बात को लेकर चिंता बनी हुई है.

पीआईपी द्वारा बनाए गए इम्प्लान्ट्स की जांच में पता चला की कंपनी ने चिकित्सा संबंधी नहीं, बल्कि औद्योगिक सिलिकॉन का इस्तेमाल किया. इस तरह के सिलिकॉन का गद्दे, बर्तन और कंप्यूटर के पुर्जे बनाने में इस्तेमाल किया जाता है. सरकार द्वारा निर्धारित किए गए सिलिकोन मानकों से यह दस गुना सस्ता था. सस्ते सिलिकॉन के इस्तेमाल के कारण कई महिलाओं ने इसके टूट जाने की शिकायत की. सिलिकॉन से तैयार किए गए अन्य कृत्रिम स्तनों से जब इनकी तुलना की गई तो पता चला कि इनमें सुरक्षा पर बिलकुल भी ध्यान नहीं दिया गया. इनकी ऊपरी परत बेहद पतली थी और ये आसानी से शरीर के अंदर घुल कर टूट सकते हैं.

कैंसर का खतरा

शरीर में सिलिकॉन के मिलने से किस तरह के बुरे परिणाम हो सकते हैं, इस पर अब तक कोई जानकारी नहीं है. लेकिन फ्रांस की सरकार ने एहतियातन इन्हें हटाने की हिदायत दी है. ऐसा भी माना जा रहा है कि इनके कारण कैंसर का खतरा बढ़ सकता है, लेकिन इस बात की अब तक पुष्टि नहीं हो पाई है.

इन इम्प्लान्ट्स का इस्तेमाल कर चुकी आठ महिलाएं अब तक स्तन के कैंसर का शिकार हो चुकी है. डॉक्टरों का कहना है कि वे यह बात यकीन से नहीं कह सकते कि कैंसर की वजह ये इम्प्लांट ही थे. लेकिन इसने पूरी दुनिया में महिलाओं में दहशत फैला दी है. फ्रांस की स्वास्थ्य मंत्री जेवियर बेर्टरांड ने भी कहा है कि अब तक सस्ते सिलिकॉन और कैंसर के बीच किसी संबंध का पता नहीं चल सका है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है, "पीआईपी द्वारा बनाए गए इम्प्लांट इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में अन्य कंपनियों के इम्प्लांट इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की तुलना में कैंसर का खतरा अधिक नहीं है."

साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि इनके टूटने और खराब होने का खतरा काफी ज्यादा है, इसीलिए महिलाओं को इन्हें निकलवा लेना चाहिए. मंत्रालय ने यह कहा है कि इसमें जल्दबाजी की जरूरत नहीं है.

"कसाई की दुकान"

पैरिस के एक प्लास्टिक सर्जन पेट्रिक बराफ ने पीआईपी के मालिक के बारे में बात करते हुए कहा है कि वह केवल पैसा बनाना चाहता था और चिकित्सा के क्षेत्र से उसका कोई लेना देना नहीं था, "कोई नहीं जानता कि वह कहां है, वह कहीं गायब हो गया है. उसे चिकित्सा के क्षेत्र को कोई अनुभव नहीं था. वह कोई मेडिकल इंजीनियर नहीं था. वह एक कसाई था. यह काम शुरू करने से पहले वह दुकान में मीट और सॉसेज बेचा करता था."

बराफ ने बताया कि पीआईपी के इम्प्लांट कम कीमत होने के कारण काफी लोकप्रिय हो गए थे, "सबसे महंगे इम्प्लांट की कीमत 1200 यूरो तक जा सकती है और उसके यहां आप केवल 250 यूरो में इन्हें खरीद सकते थे. वह बहुत ही कम कीमत पर इन्हें बेच रहा था और अगर कीमत कम होगी तो क्वॉलिटी भी."

पीआईपी दुनिया की तीसरे नंबर की इम्पलांट बनाने वाली कंपनी हुआ करती थी. हर साल यह कंपनी एक लाख इम्प्लांट बनाया करती थी. इनमें 80 प्रतिशत को विदेशों में भेजा जाता था. पीआईपी के प्रोडक्ट्स करीब 65 देशों में बेचे जाते हैं.

रिपोर्ट: रॉयटर्स/ एएफपी/ ईशा भाटिया

संपादन: एम गोपलकृष्णन

DW.COM

विज्ञापन