ब्रेक्जिट विवाद में आयरलैंड सबसे बड़ा मुद्दा | दुनिया | DW | 13.09.2019
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दुनिया

ब्रेक्जिट विवाद में आयरलैंड सबसे बड़ा मुद्दा

ब्रिटेन को यूरोपीय संघ छोड़कर बाहर निकलने की तारीख करीब आती रही है और उसके साथ ही व्यापारिक हल्कों में बेचैनी भी बढ़ती जा रही है.

बेचैनी इस बात की ब्रेक्जिट आपसी सहमति से संधि के आधार पर होगा या बिना किसी संधि के. यूरोपीय संघ ने ब्रिटेन को सदस्यता छोड़ने के लिए 31 अक्टूबर तक का समय दिया है. उस दिन को अब करीब सात महीने बचे हैं और यूरोपीय संघ के संग विवाद के सबसे बड़े मुद्दे आयरलैंड पर अभी तक कोई सहमति नहीं हुई है. आयरलैंड ब्रिटेन की ही तरह एक द्वीप है लेकिन उसका उत्तरी हिस्सा यानी उत्तरी आयरलैंड ब्रिटेन का हिस्सा है. आयरलैंड के लोगों को डर है कि ब्रिटेन के बाहर निकलने से आयरलैंड के दोनों हिस्सों में फिर से सीमा की दीवार बन जाएगी और उसका नतीजा फिर से हिंसा के रूप में सामने आ सकता है जिसका आयरलैंड सदियों तक गवाह रहा है.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन 31 अक्टूबर तक संधि के साथ या संधि के बिना यूरोपीय संघ छोड़ने को आमादा है लेकिन आयरलैंड के प्रधानमंत्री लियो वरादकर का कहना है कि दोनों पक्ष अभी भी समझौते से मीलों दूर हैं. बोरिस जॉनसन पिछली सरकार द्वारा तय समझौते से आयरलैंड के लिए तय बैकस्टॉप को बाहर कर देना चाहते हैं. लेकिन आयरलैंड और यूरोपीय संघ इसका विरोध कर रहे हैं. तथाकथित बैकस्टॉप का मकसद यूरोपीय संघ के सदस्य आयरलैंड और ब्रिटेन के प्रदेश आयरलैंड के बीच सख्त सीमा लागू किए जाने को रोकना है.

Grenze Irland - Nordirland (Getty Images/C. McQuillan)

बंद पड़े कस्टम ऑफिस का बोर्ड

समस्या यह है कि ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के बाद यदि आयरलैंड के दोनों हिस्सों के बीच सीमा नहीं रहती है तो ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने का कोई अर्थ ही नहीं रहेगा. खुली सीमा से लोगों और सामान का आना जाना होता रहेगा. और यदि वहां नियंत्रण वाली सीमा बना दी जाती है तो आयरलैंड उसके लिए तैयार नहीं है. आयरलैंड के प्रधानमंत्री लियो वरादकार का कहना है कि वह विकल्पों पर बात करने को तैयार हैं लेकिन ब्रिटेन ने अब तक ऐसा कोई प्रस्ताव वहीं दिया है जो पर्याप्त हो.

जॉनसन की सरकार को समर्थन दे रही उत्तरी आयरलैंड की पार्टी डीयूपी अगर अपना सख्त रवैया छोड़ देती है, तो 31 अक्टूबर तक समझौते की गुंजाइश निकल सकती है. लेकिन पार्टी के ब्रेक्जिट प्रवक्ता सैमी विल्सन का कहना है कि प्रांत ब्रेक्जिट के बाद यूरोपीय कानूनों को मानने का दबाव स्वीकार नहीं करेगा. डीयूपी पार्टी की मांग है कि उत्तरी आयरलैंड की विधानसभा को हक होना चाहिए कि वह यूरोपीय कानूनों की जांच कर सके कि वह प्रांत के हितों और ब्रिटेन के साथ संबंधों को नुकसान नहीं पहुंचा रहा है.

ब्रेक्जिट के आलोचकों का कहना है कि बिना समझौते के यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर निकलने का मतलब अव्यवस्था और आर्थिक नुकसान होगा. ब्रेक्जिट की अपनी योजना को संसद के हस्तक्षेप के बिना कार्यरूप देने के लिए जॉनसन ने संसद को अवकाश पर भेज दिया है, लेकिन सांसदों ने उससे पहले एक कानून पास कर संसद की सहमति के बिना ईयू छोड़ने पर रोक लगा दी है. अक्टूर में रिटायर हो रहे संसद के अध्यक्ष जॉन बेर्कोव भी बोरिस जॉनसन के रवैये का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा है कि यदि इस कानून को लागू करने के लिए संसद में रचनात्मकता की जरूरत होगी तो उनकी गिनती की जा सकती है.

एमजे/आईबी (रॉयटर्स)

 

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