ब्रिटेन में बन रही है मध्यावधि चुनाव की संभावना | दुनिया | DW | 03.09.2019
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दुनिया

ब्रिटेन में बन रही है मध्यावधि चुनाव की संभावना

प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन देश में समय से पहले आम चुनाव करवाने पर विचार कर रहे हैं. ऐसा तब होगा जब सांसद बिना डील के ईयू से बाहर निकालने में उनको समर्थन नहीं देते.

ब्रिटेन की कंजर्वेटिव टोरी पार्टी के विद्रोही सांसद लेबर पार्टी के साथ मिलकर एक प्रस्ताव पेश करने वाले हैं जिसके माध्यम से 31 अक्टूबर को ब्रिटेन को बिना किसी समझौते के यूरोपीय संघ से बाहर नहीं निकाला जा सकेगा. ब्रिटिश सरकार के सूत्रों से समाचार एजेंसी डीपीए को पता चला है कि अगर वे इसमें सफल रहते हैं तो ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन 14 अक्टूबर को देश में मध्यावधि चुनाव कराने की घोषणा कर सकते हैं.

पूर्व ब्रिटिश चासंलर फिलिप हैमंड ने कहा है कि उनके अनुसार तो टोरी विद्रोही भी इस प्रस्ताव का समर्थन करेंगे. वहीं उदार वामपंथी लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन का कहना है कि वे चुनाव के लिए बिल्कुल तैयार हैं  लेकिन उनकी पार्टी में ही कुछ लोग ऐसा नहीं चाहते. प्रधानमंत्री जॉनसन का जोर है कि ब्रिटेन - डील या नो डील - किसी भी हाल में 31 अक्टूबर की तय समयसीमा को यूरोप से बाहर निकल जाए.

ब्रिटिश संसद के निचले सदन में अगर यह अंतरदलीय प्रस्ताव पास हो जाता है तो जॉनसन को मजबूर होकर ईयू से बाहर निकलने की तारीख को आगे बढ़ाकर 31 जनवरी करने की मांग करनी होगी. इसके अलावा भी दो विकल्प हो सकते हैं जिनमें या तो सांसद किसी नई डील को मंजूरी दे देंगे या फिर 19 अक्टूबर तक बिना डील के ब्रेक्जिट को समर्थन दे देंगे.

ईयू के साथ 31 अक्टूबर से पहले किसी समझौते पर पहुंचने को लेकर जॉनसन अभी भी आशान्वित हैं. उन्होंने कहा कि डील की दिशा में विकास हो रहा है और वे किसी भी हाल में ब्रसेल्स से अंतिम समयसीमा को आगे बढ़ाने के लिए नहीं कहने वाले हैं.

यूरोपीय परिषद की प्रवक्ता मीना आन्द्रीवा ने कहा है कि ईयू के अधिकारियों को लगता है कि अब ऐसा होने की "प्रबल संभावना" है कि ब्रिटेन बिना किसी डील के बाहर निकलेगा. आन्द्रीवा के कहा, "इस समय तक हमारे सामने ऐसा कोई पुख्ता प्रस्ताव नहीं रखा गया है." परिषद बुधवार को नो-डील ब्रेक्जिट की स्थिति में किए जाने वाले आकस्मिक उपायों की रूपरेखा पेश करने वाली है. इसके लिए ईयू एकजुटता निधि से धन मुहैया करवा कर ब्रेक्जिट के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की मदद करने की व्यवस्था शामिल होगी.

आरपी/ओएसजे (रॉयटर्स, डीपीए)

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