″ब्रिक्स को जैश ए मोहम्मद की ज्यादा चिंता नहीं है″ | दुनिया | DW | 17.10.2016
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दुनिया

"ब्रिक्स को जैश ए मोहम्मद की ज्यादा चिंता नहीं है"

गोवा में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आंतकवाद से निपटने की बात तो हुई, लेकिन पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद का इसमें कोई जिक्र नहीं है.

भारतीय विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) अमर सिन्हा ने जैश ए मोहम्मद के मुद्दे पर कहा, "मेरा अनुमान है कि उन्हें (ब्रिक्स को) इसकी ज्यादा चिंता नहीं है. ये हमें प्रभावित करता है. क्योंकि पाकिस्तान से काम करने वाले संगठनों की गतिविधियों का निशाना भारत है." उन्होंने साझा घोषणापत्र में जैश ए मोहम्मद पर सहमति न होने की यही संभावित वजह बताई.

जिन संगठनों को संयुक्त राष्ट्र ने आतंकवादी गुट घोषित किया है, उनमें जैश ए मोहम्मद का नाम भी शामिल है, जिसे भारत पठानकोट हमले के लिए जिम्मेदार मानता है. सिन्हा ने बताया कि आतंकवाद के सिलसिले में घोषणापत्र में आईएस और उससे जुड़े कई अन्य संगठनों के नाम शामिल हैं.

दूसरी तरफ, पाकिस्तान का कहना है कि जम्मू कश्मीर में अपने ‘अत्याचारों को छिपाने के लिए भारत पाकिस्तान को बदनाम कर रहा है’. गोवा में ब्रिक्र देशों के सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को आतंकवाद की जड़ बताया था. इस पर टिप्पणी करते हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने कहा कि भारत ब्रिक्स और बिम्सटेक को गुमराह कर रहा है. उन्होंने जम्मू कश्मीर में भारतीय सेना पर अत्याचार करने का इल्जाम भी लगाया.

वहीं भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि गोवा घोषणापत्र को पिछले शिखर सम्मेलनों के दौरान होने वाले घोषणापत्रों की कड़ी के रूप में देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "पिछले शिखर सम्मेलन में जिस तरह की भाषा थी आप उसे देखिए. आतंकवाद को लेकर अब किस तरह की भाषा है, वो देखिए. आप पाएंगे कि आतंकवाद को लेकर भाषा सख्त हुई है."

जब सिन्हा से आतंकवाद के मुद्दे पर कुछ और सवाल पूछे गए तो उन्होंने कहा कि बहुपक्षीय शिखर सम्मेलन को सिर्फ आतंकवाद के मुद्दे तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए. इतना ही नहीं, जब उनसे किसी और विषय पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने पत्रकारों का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने कहा, "शुक्रिया कि आपने आतंकवाद के अलावा कुछ और भी पूछा. एक मिनट के लिए मुझे लगा कि ब्रिक्स ब्ट्रिक्स हो गया है."

उन्होंने गोवा घोषणापत्र में सीमापार आतंकवाद शब्द शामिल न होने का भी बचाव किया. उन्होंने कहा कि मुख्य ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि आतंकवाद को राजनीतिक तरीके से सही नहीं ठहराया जा सकता. उन्होंने कहा कि ये बहुत अहम है कि भारत सबको इन विचारों पर एक साथ लेकर आ पाया. गोवा में शनिवार और रविवार को हुए ब्रिक्स देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के नेताओं ने हिस्सा लिया.

एके/वीके (पीटीआई)

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