बोरिस जॉनसन होंगे ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री | दुनिया | DW | 23.07.2019
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दुनिया

बोरिस जॉनसन होंगे ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री

बोरिस जॉनसन का व्यक्तित्व कई लोगों को डॉनल्ड ट्रंप की याद दिलाता है. सुनहरे बाल, बड़बोले और अफेयर की सूची का तो अंत ही नहीं. लेकिन यही बोरिस जॉनसन अब ब्रिटेन का प्रधानमंत्री पद संभालने जा रहे हैं.

बोरिस जॉनसन ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री होंगे. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद और सत्ता में काबिज कंजरवेटिव पार्टी के नेता चुने जाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंगलवार को नतीजों का एलान हुआ. जॉनसन का मुकाबला विदेश मंत्री जेरेमी हंट से था. चुनाव में कंजरवेटिव पार्टी के तकरीबन 1.60 लाख कार्यकर्ताओं ने वोट दिया था. इसमें से जॉनसन को तकरीबन 92 हजार तो हंट को तकरीबन 46 हजार वोट मिले. 

यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर निकलने की प्रक्रिया को पूरा ना कर पाने में नाकाम रही टेरिजा मे ने बीते सात जून को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. जॉनसन ने अपनी जीत के बाद टेरिजा मे को धन्यवाद करते हुए कहा, "उनके कैबिनेट में काम करना मेरा सौभाग्य था." टेरिजा में ने भी जॉनसन को पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाते हुए कहा, "एक ऐसा ब्रेक्जिट तैयार करें जो पूरे ब्रिटेन के लिए काम करे." इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भी ट्वीट कर जॉनसन को बधाई दी. उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, "बोरिस जॉनसन को ब्रिटेन का नया  प्रधानमंत्री बनने की बधाई. "

कौन हैं बोरिस जॉनसन

बोरिस जॉनसन के पूर्वज तुर्की से थे. माता-पिता अंग्रेज और जन्म उनका न्यूयॉर्क में हुआ. उनके बचपन का बड़ा हिस्सा ब्रसेल्स में बीता. उनके पिता यूरोपियन यूनियन में सरकारी अधिकारी थे. बोरिस जॉनसन कंजरवेटिव पार्टी में ब्रेक्जिट के प्रमुख समर्थक माने जाते हैं. बोरिस जॉनसन का पूरा नाम एलेक्जेंडर बोरिस दे फेफेल जॉनसन है. वे अपने सुनहरे बालों के साथ-साथ बोलने में गलतियां करने के लिए जाने जाते हैं.

राजनीतिक विश्लेषकों के पास उनकी आलोचना करने के लिए लंबी सूची मौजूद है. वे अजीब सा बर्ताव करते हैं, कपड़े ढंग से नहीं पहनते हैं और समय पर तो कतई नहीं पहुंचते हैं. 2012 के लंदन ओलंपिक के दौरान वे जिपवायर पर लटके थे लेकिन वहां भी चूक ऐसी हुई कि तस्वीर वायरल हो गई. खूबसूरत लड़कियां बोरिस जॉनसन की कमजोरी मानी जाती हैं. उनके इतने एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर चर्चित हो चुके हैं कि लंदन की एक मैग्जीन ने उन्हें 'बॉन्किंग बोरिस' की संज्ञा दे दी.

लोग भले ही उन्हें जोकर मानें लेकिन टेरीजा मे जानती हैं कि बोरिस जॉनसन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

जॉनसन बेहद पढ़े लिखे भी हैं. उन्होंने कई ब्रिटिश प्रधानमंत्री देने वाले ईटन स्कूल से पढ़ाई की है और उच्च शिक्षा ऑक्सफोर्ड से ली है. अंग्रेजी के अलावा वे फ्रेंच और इतालवी भाषा भी बोल लेते हैं.

Großbritannien | Boris Johnson 2006 (Getty Images/AFP/A. Dennis)

बोरिस जॉनसन के पूर्वज तुर्की से थे

पहले समझा जाता था कि उनका जीवन बड़ा आरामदायक रहा है. लेकिन पिछले साल उनकी छोटी बहन रेचल जॉनसन ने बताया कि उनकी मां शार्लोट जॉनसन डिप्रेशन और ऑबेसिव कंपलसिव डिसऑर्डर की शिकार थीं. इसकी वजह से वे लंबे समय तक अस्पताल में भी भर्ती रहीं जिससे उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा. बोरिस और उनके तीन भाई-बहिनों को एक दाई ने पाला था. मां अवसाद का शिकार थीं, पिता के पास नौकरी के चलते समय नहीं था और जिस दाई ने बच्चों को पाला वह चेन स्मोकर थी.

रेचल जॉनसन आज ब्रिटेन में एक जानी मानी पत्रकार हैं. राजनीति में आने से पहले बोरिस भी पत्रकार थे. मीडिया में उनका करियर भी विवादों से भरा रहा. लंदन के "द टाइम्स" में उनकी पहली नौकरी एक विवाद के चलते ही चली गई थी. कुछ साल बाद वे "द डेली टेलीग्राफ" के ब्रसेल्स संवाददाता बने. इसी दौरान उन्होंने अपने लेखों में यूरोपीय संघ की आलोचना करनी शुरू की.

जब डेविड कैमरन ने की बेइज्जती

ब्रसेल्स में रहने के दौरान बोरिस ने दूसरी शादी भी की. तलाक के 12 दिन बाद ही उन्होंने मरीना व्हीलर से शादी कर ली जो उस समय उनके बच्चे की मां बनने वाली थीं. आज दोनों के चार बच्चे हैं.

लंदन लौटने के बाद वे "टेलिग्राफ" के मुख्य राजनीतिक लेखक बन गए. इसके साथ ही वे नियमित टीवी पर दिखने लगे. फिर वे "स्पेक्टेटर" के संपादक बन गए और के रूप में राजनीति में अपनी जगह भी बनाई. हालांकि एक साथी पत्रकार के साथ उनके अफेयर के चलते उन्हें शैडो कैबिनेट से हाथ धोना पड़ा और इसके कारण वे घर से भी निकाले गए.

2005 में जब डेविड कैमरन नेता विपक्ष बने तो उन्होंने बोरिस को अपनी शैडो कैबिनेट में शामिल नहीं किया. इसका कारण उनके सलाहकारों ने बोरिस के बारे में कैमरन को अच्छी राय नहीं दी थी. कैमरन द्वारा मौका ना दिए जाने के बाद जॉनसन ने लंदन के मेयर का चुनाव लड़ा. वे जीत गए और 2012 के लंदन ओलंपिक के दौरान भी वहां के मेयर रहे. दोबारा मेयर बनने के बाद उनकी निगाहें राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह बनाने पर लग गईं.

जब ब्रेक्जिट की बात आई तो बोरिस को लगा कि यह बेहद सही मौका है. एक साल तक वे बस ले कर देश भर में घूमते रहे और वोटरों को यूरोपीय संघ छोड़ने के फायदों के बारे में बताते रहे. ब्रेक्जिट के पक्ष में वोट पड़ते ही बोरिस की अहमियत बढ़ गई. कैमरन का इस्तीफा होने से बोरिस राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित हो गए. विदेश सचिव के रूप में उनके दो साल के कार्यकाल ने उन्हें बड़ा मुकाम दिला दिया था.

इतनी आलोचनाओं के बावजूद वे अपना वजूद बनाने में सफल रहे हैं और अपनी यूरोपीय संघ विरोध की राजनीति के लिए जाने जाते हैं.

रिपोर्ट: पाओलो टोटारो/आरएस

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