बॉलीवुड फिल्मों में दिखने लगा देश बुल्गारिया | दुनिया | DW | 15.05.2019
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दुनिया

बॉलीवुड फिल्मों में दिखने लगा देश बुल्गारिया

बुल्गारिया यूरोपीय संघ का वह नया सदस्य देश है जो काफी समय तक सोवियत संघ और रूस से परिभाषित होता रहा. आंकड़ों के हिसाब से वह यूरोप का सबसे गरीब देश है.

शीत युद्ध की समाप्ति के बाद जब यूरोप में राजनीतिक उथल पुथल हो रही थी तो बुल्गारिया को स्लाविक मूल के कारण रूस का स्वाभाविक सहयोगी माना जा रहा था. दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान सोवियत सेना ने बुल्गारिया पर कब्जा कर लिया और वहां कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता में आई. दूसरे पूर्वी यूरोपीय देशों के विपरीत कम्युनिस्ट पार्टी के शासन के दौरान बुल्गारिया में कोई महत्वपूर्ण विद्रोह नहीं हुआ था.

1990 में साम्यवादी वर्चस्व की समाप्ति के बाद स्वतंत्र चुनाव कराए गए. आने वाले सालों में राजनीतिक और आर्थिक सुधारों पर जोर रहा. 1990 में स्थापित लोकतांत्रिक विपक्ष एसडीएस बुल्गारिया में कम्युनिस्ट शासन की समाप्ति का माध्यम बना. लेकिन 1997 तक गठबंधनों के जरिए कम्युनिस्ट सत्ता में बने रहे. इवान कोस्तोव के नेतृत्व वाली एसडीएस सरकार के तहत बुल्गारिया की यूरोपीय संघ की सदस्यता को आगे बढ़ाया गया. पेटर स्तोयानोव के कार्यकाल में नाटो और यूरोपीय संघ की सदस्यता की शर्तें बनीं.

राजनीतिक व्यवस्था

बुल्गारिया की संसद एक सदन वाली संसद है. इसके 240 सदस्य हैं. चुनाव समानुपातिक पद्धति से होता है और पार्टियों को संसद में जाने के लिए कम से कम 4 प्रतिशत मत पाना जरूरी होगा. संसद में बहुमत का नेता प्रधानमंत्री बनता है. संसद का चुनाव हर चार साल पर होता है. बुल्गारिया में राष्ट्रपति का चुनाव भी जनता सीधे करती है. राष्ट्रपति पांच साल के लिए चुना जाता है. इस समय रुमेन रादेव बुल्गारिया के राष्ट्रपति हैं.

बुल्गारिया यूरोपीय संघ का सबसे गरीब देश है. तन्वाहें इतनी कम हैं कि लाखों लोग अपना भविष्य यूरोप के किसी और देश में ढूंढ रहे हैं. इसलिए बुल्गारिया को यूरोपीय संघ से बहुत उम्मीदें हैं. इस समय यूरोपीय संसद में उसके 17 सदस्य हैं जो मुख्य रूप से क्रिश्चियन डेमोक्रैटों, सोशल डेमोक्रैटों और लिबरल में बंटे हैं.

Bulgarien - Journalistenaktion vor dem bulgarischen Parlament für Presse- und Meiningsfreiheit (BGNES )

बुल्गारिया में भी प्रेस स्वतंत्रता का संघर्ष

राजनीतिक दल

बुल्गारिया के 1878 के संविधान के तहत राजनीतिक दलों को संवैधानिक दर्जा दिया गया था. उस समय बुल्गारिया की राजनीति में दो धाराएं दिखती थीं जो सामाजिक विवादों पर बंटी थीं. ये बंटवारा देश की राजनीति में इस समय भी दिखता है. एक ओर से वामपंथियों और कंजरवेटिवों के रूप में, दूसरे रूस समर्थक और पश्चिम समर्थक राजनीतिज्ञों के रूप में.

पहले विश्वयुद्ध के बाद ये विवाद पूंजी बनाम मजदूरों के रूप में दिखा. ये भी आज तक जारी है. एक विवाद से बुल्गारिया बचा हुआ है वह है चर्च और राज्य के बीच विवाद. बुल्गारिया के ऑर्थोडॉक्स चर्च ने मौजूदा बुल्गारिया के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और समाज में उसकी बहुत ही मान्यता है.

भारत के साथ संबंध

भारत के साथ बुल्गारिया के संबंध अच्छे हैं. 1926 में रवीन्द्र नाथ टैगोर की बुल्गारिया यात्रा के बाद से ही भारतीय संस्कृति से बुल्गारिया के लोगों का गहरा लगाव रहा है. दोनों देश शीतयुद्ध के काल से ही निकटता का परिचय देते रहे हैं. समय समय पर दोनों देश के नेता एक दूसरे के यहां जाते हैं और इन संबंधों को ताजा कर जाते हैं. भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पिछले साल बुल्गारिया का दौरा किया था. उस समय दोनों देशों के बीच कई समझौते हुए जिनमें सोफिया विश्वविद्यालय में हिंदी चेयर की स्थापना भी शामिल है.

हालांकि दोनों देशों के बीच सालाना पारस्परिक कारोबार करीब 27 करोड़ डॉलर ही है, लेकिन दोनों देश इसे बढ़ाने की बड़ी संभावना देखते हैं. पिछले सालों में भारतीय फिल्म उद्योग के लिए बुल्गारिया का महत्व बढ़ा है और कई फिल्मों की शूटिंग बुल्गारिया में हुई है. इनमें बाहुबली, शिवाय और ब्रह्मास्त्र भी शामिल हैं. इन फिल्मों की वजह से दोनों देशों के बीच पर्यटन में अपार संभावनाएं हैं.

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