बिना अल्कोहल वाली बीयर का क्रेज | मनोरंजन | DW | 06.06.2014
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मनोरंजन

बिना अल्कोहल वाली बीयर का क्रेज

जर्मनी में बीयर के शौकीन उस तरह के नहीं रहे जैसे पहले हुआ करते थे. जर्मन अब अल्कोहल बीयर से मुंह चुरा रहे हैं और नॉन अल्कोहॉलिक बीयर की तरफ बढ़ रहे हैं.

जर्मनों को अब शराब युक्त बीयर ज्यादा पसंद नहीं आ रही है. ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि अल्कोहल वाली बीयर का स्वाद जर्मनवासियों को अपनी तरफ खींच नहीं पा रहा है. आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल जर्मनी में 48 लाख हेक्टोलीटर नॉन अल्कोहॉलिक बीयर की बिक्री हुई जो कि उससे पहले साल के मुकाबले 12 फीसदी अधिक है. एक हेक्टोलीटर में 100 लीटर होते हैं.

बीयर बनाने वाले संघ, जर्मन ब्रूअर्स फेडरेशन के मुताबिक देश के कुल बीयर उत्पादन का 5 फीसदी हिस्सा नॉन अल्कोहॉलिक बीयर का है. संघ के प्रमुख होल्गर आईषेले के मुताबिक, "लोगों में अल्कोहल मुक्त बीयर का स्वाद बढ़ रहा है. जो लोग गाड़ी चलाते हैं या फिर कसरत करते हैं बिना बीयर छोड़े भी इसका मजा ले सकते हैं."

विश्व धरोहर बीयर

जर्मनी दुनिया भर में बीयर की सबसे ज्यादा बिक्री वाले देशों में शुमार है. हालांकि लगातार सातवें साल इसकी बिक्री में गिरावट दर्ज की गई. साल 2013 में जर्मन शराब उत्पादन में दो फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी. यह 1989 में बर्लिन की दीवार गिरने के बाद से सबसे निचले स्तर पर चला गया था.

शराब मुक्त बीयर में आमतौर पर बहुत कम मात्रा में शराब के अवशेष होते हैं. इसके अलावा आजकल बीयर और नींबू पानी का मिक्स, बीयर और कोला या बीयर और फलों के रस के मिक्स काफी लोकप्रिय हो रहे हैं. बीयर बनाने वाली कंपनियां अब अगले साल से बोतल पर यह लिखने की योजना बना रही है कि बीयर में 0.50 फीसदी से कम अल्कोहल है.

जर्मनी में बीयर की परंपरा बहुत पुरानी है. यहां कुछ ही समय पहले बीयर बनाने के नियमों को सांस्कृतिक दर्जा दिए जाने की भी मांग की जा रही थी. जर्मन ब्रूअर्स फेडरेशन ने 16वीं शताब्दी के बीयर शुद्धता कानून को "अप्रत्यक्ष सांस्कृतिक धरोहर" का दर्जा देने की मांग की है. यह दर्जा देने का अधिकार यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र के पास ही है.

एए/आईबी (एएफपी)

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