बाल विवाह के खिलाफ मुखिया ने उठाई जिम्मेदारी | दुनिया | DW | 10.10.2015
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दुनिया

बाल विवाह के खिलाफ मुखिया ने उठाई जिम्मेदारी

गांव की मुखिया म्वेंडा पूरे जज्बे के साथ कहती हैं कि उन्होंने ठान लिया है, इलाके से बाल विवाह का नामो निशान मिटा देंगी. मुहिम की शुरुआत में उन्होंने बाल विवाह के खिलाफ काम करने वाला पहला गुट संगठित किया है.

जांबिया में उत्तरी प्रांत लुआपुला के 111 गावों का ध्यान रख रही म्वेंडा ने बताया कि चार साल पहले डॉक्टरों से मिली जानकारी के बाद उनकी सोच बदली, "डॉक्टरों ने बताया कि जब कोई लड़की कम उम्र में मां बनती है तो कई मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं. वहीं से मैंने इस मुहिम को आगे बढ़ाने के बारे में सोचा." उन्होंने कहा कि किसी को भी स्कूल जाने की उम्र वाले बच्चे की शादी नहीं करनी चाहिए. जांबिया के इन गावों में कानून से ज्यादा मुखिया की बात को महत्व दिया जाता है. हालांकि जांबिया में 21 साल से कम उम्र में शादी करना कानूनी अपराध है लेकिन जांबिया दुनिया भर में बाल विवाह की सबसे बड़ी संख्या वाले देशों में से एक है. यूएनएफपीए के मुताबिक जांबिया में 40 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में कर दी जाती है.

2013 में जांबिया की सरकार ने बाल विवाह को जड़ से मिटाने के लिए एक मुहिम छेड़ी जिसमें पारंपरिक मुखिया का पद संभालने वाले 200 लोगों को साथ लाया गया. ये मुखिया करीब 70 स्थानीय कबीलों का प्रतिनिधित्व करते हैं.

जो भी लोग म्वेंडा के आदेश का पालन नहीं करते उन्हें जुर्माना देना पड़ता है. यह कोई मामूली रकम नहीं, उतनी ही है जितनी किसी लड़की से शादी करने के लिए उसके परिवार वालों को कोई लड़का या उसका परिवार देता है. म्वेंडा ने बताया, "बाल विवाह इस इलाके में बहुत आम है और इसे सख्त कानून से ही खत्म किया जा सकता है जिसमें कड़ी सजा मिले." उन्होंने बताया कि दूसरे मुखिया भी अब उनसे प्रेरणा लेकर इस रास्ते पर चल पड़े हैं.

गर्ल्स नॉट ब्राइड्स नाम के समूह के मुताबिक हर साल दुनिया भर में 1.5 करोड़ लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में कर दी जाती है. अमेरिका की गैर सरकारी संस्था पॉपुलेशन काउंसिल के मुताबिक उपसहारा अफ्रीकी देशों में 10 फीसदी लड़कियों की शादी 15 साल में और 40 फीसदी की शादी 18 साल की उम्र तक कर दी जाती है. कच्ची उम्र में शादी से लड़कियां ना सिर्फ शिक्षा पाने से वंचित रह जाती हैं, बल्कि कम उम्र में मां बनने में उनके जीवन को भी खतरा रहता है. इसके अलावा वे घरेलू हिंसा और उत्पीड़न का शिकार भी होती हैं.

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शादी के लिए लड़की कहां से लाएं

जून 2015 में संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार समिति ने कम उम्र में होने वाले और जबरदस्ती के विवाह के खिलाफ प्रस्ताव अंगीकृत किया. यह भी माना गया कि बाल विवाह मानव अधिकार उल्लंघन है. लेकिन सिर्फ कागजी काम ही काफी नहीं, जमीनी परिवर्तन लाने के लिए सरकारों को आगे बढ़ कर इस मामले में ठोस कदम उठाने होंगे.

एसएफ/आईबी (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन)

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