बार लाउंज के लिए ठुमरी का नया रंग | मनोरंजन | DW | 23.04.2012
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मनोरंजन

बार लाउंज के लिए ठुमरी का नया रंग

मशहूर ठुमरी पिया बावरी को नए कलेवर में पेश करने वाले शास्त्रीय गायक अभिजीत पोहणकर ने शास्त्रीय संगीत को युवाओं तक पहुंचाने के लिए नई सौगात ले कर आए हैं.

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अफ्रीकी ड्रम के साथ ठुमरी

ठुमरी को बार और कैफे के लिए नया रंग दिया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट के तहत सात पारंपरिक मशहूर ठुमरियों को आधुनिक संगीत के साथ नए एल्बम ठुमरी फंक में डाला जा रहा है. अभिजीत और उनके पिता अजय पोहणकर इसे पेश कर रहे हैं. अभिजीत कहते हैं, "मेरी कोशिश यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत युवा श्रोताओं तक पहुंचे. यह मेरे लिए सामाजिक सरोकार का विषय भी है क्योंकि हम हमारी सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा करना चाहते हैं."

ठुमरी के पारंपरिक वाद्यों, तबला, हारमोनियम, सारंगी और ढोलक के अलावा ड्रम्स, वॉयलिन, कीबोर्ड और गिटार के साथ इन रिमिक्स में अफ्रीकी ड्रम जेम्बे, चीनी बांसुरी और ऑर्गेनिक कीबोर्ड पियानिका इस्तेमाल किया गया है.

अभिजीत ने बताया, "ठुमरी पारंपरिक तौर पर बहुत धीमे अंदाज में पेश की जाती हैं लेकिन मैंने जेम्बे के साथ इन्हें जोशीला और सुखद बनाने की कोशिश की है." हालांकि तबले की लग्गी के साथ जब ठुमरी द्रुत में शुरू होती है और फिर इसके बोलों को स्वर के भाव पहनाए जाते हैं तो उस आनंद और ध्वनि का दुनिया का कोई ड्रम मुकाबला नहीं कर सकता.

लेकिन ऐसा भी नहीं कि इससे इसके शास्त्रीय रंग ढंग पर असर पड़ा हो. शास्त्रीय और पारंपरिक दशकों पुरानी ठुमरी को आज के संगीत के साथ मिला कर नई आवाज बनाई है. यह पूछने पर कि साजों का चुनाव उन्होंने किस आधार पर किया, उन्होंने कहा कि लाइव कार्यक्रमों में श्रोताओं की प्रतिक्रिया के आधार पर उन्होंने इन्हें चुना.

"इन धुनों को मैंने कई कार्यक्रमों में पेश किया और फिर श्रोताओं की प्रतिक्रिया के आधार पर मैंने तय किया कि किस मौके पर कौन सा वाद्य इस्तेमाल किया जाए." उन्होंने आगे कहा कि वह हर तरह का संगीत सुन कर बड़े हुए हैं. जिसमें रॉक भी था और पश्चिमी शास्त्रीय संगीत भी. इसने उनके काम पर प्रभाव डाला है.

पिया बावरी सहित उनके कई एल्बम यूरोपीय देशों, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी के बार, कैफे, लाउंज में बजाये जाता है. "यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मैं भारतीय शास्त्रीय संगीत को नए कलेवर में पेश कर पाया हूं जो कई देशों के युवा पसंद करते हैं. पहले के दौर में यह बड़ा खतरा था, लेकिन अब लोग इसे पसंद करते हैं."

अभिजीत पोहणकर याद करते हैं कि उनके पिता को पसंद नहीं था कि शास्त्रीय संगीत में कुछ पश्चिमी मिलाया जाए. "मैं अपने पिता से बहस करता था लेकिन वह इस तरह के प्रोजेक्ट को पसंद नहीं करते थे. कुछ कलाकारों ने कहा कि अगर मैं ड्रम्स इस्तेमाल करूंगा तो वह कार्यक्रम नहीं करेंगे. लेकिन अब सभी लोग इस तरह के संगीत को पसंद कर रहे हैं." अभिजीत की गजल फंक और बंदिश फंक एल्बम बनाने की योजना है. "मैंने शास्त्रीय और अर्धशास्त्रीय संगीत को युवाओं के लिए कूल बनाने की कोशिश की है और शास्त्रीय सुनने वाले पारंपरिक श्रोताओं को नई आवाज दी है."

पारंपरिक रूप से ठुमरी 19वीं सदी में वाजिद अली शाह के साथ प्रचलन में आई. संगीत के दीवाने वाजिद अली शाह ने ठुमरी के विकास और ठुमरी पर भाव (कथक) की नींव रखी. गौहर जान, बेगम अख्तर, गिरिजा देवी, शोभा गुर्टू ठुमरी में मशहूर नाम हैं. वहीं बड़े गुलाम अली खान जैसे ख्याल गायकों ने इसे बंदिश की तरह विस्तार से पेश किया.

बहरहाल रिमिक्स की दुनिया में पारंपरिक ठुमरियों को नए कलेवर में पेश करते समय एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा होता है, कंपोजर कौन, जिसने रिमिक्स किया या जिसने इसे सबसे पहली बार किसी राग में बांधा.

रिपोर्टः आभा मोंढे (पीटीआई)

संपादनः एन रंजन

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