बलात्कार से नहीं हारी ′ब्रेव मिस वर्ल्ड′ | दुनिया | DW | 22.03.2014
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दुनिया

बलात्कार से नहीं हारी 'ब्रेव मिस वर्ल्ड'

1998 में इस्राएल की लीनोर अबार्गील को विश्व सुंदरी का ताज पहनाया गया. तब कम ही लोग जानते थे कि 18 साल की लीनोर के साथ कुछ हफ्ते पहले बलात्कार हुआ था. आज उनकी कहानी 'ब्रेव मिस वर्ल्ड' बलात्कार पीड़ितों को हौसला दे रही है.

अबार्गील ने इस हादसे के बाद अपने सपनों से मुंह चुराने के बजाय हालात को चुनौती दी. इस बात को बिना किसी झिझक वह दुनिया के सामने लाईं और अदालत में आरोपी का डट कर मुकाबला किया. अबार्गील की जीत हुई और अपराधी को 16 साल की सजा मिली. इस घटना से इस्राएल की और महिलाओं को भी हिम्मत मिली और उन्होंने अपने साथ हो रहे यौन अपराधों के खिलाफ आवाज उठाना शुरू किया. बलात्कार जैसे मामलों में मुंह खोलने से पहले जहां पहले औरतें झिझकती थीं, वहीं अब वे इसे अपना अधिकार मान रही हैं.

सबसे बड़ा मरहम

34 साल की अबार्गील का यह अभियान आज अंतरराष्ट्रीय रूप ले चुका है. उनके जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंटरी फिल्म 'ब्रेव मिस वर्ल्ड' के जरिए और दुनिया भर में यात्रा कर वह बलात्कार पीड़ित महिलाओं की मदद करने की कोशिश कर रही हैं.

वह कहती हैं, "जब आप किसी बहुत मुश्किल समय से गुजरते हैं तो जो एकमात्र दवा है, वह है कि आप इसके बारे में किसी को बता सकें. क्योंकि अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो यह ट्यूमर की तरह अंदर ही अंदर बड़ा होता जाता है और आपको मार डालता है." वह अपने आपको खुशकिस्मत मानती हैं कि वह लोगों को अपनी बात सुनाने का मौका दे पा रही हैं.

अबार्गील पर आधारित निर्देशक सेसीलिया पेक की डॉक्यूमेंट्री 'ब्रेव मिस वर्ल्ड' में उनके जीवन को उकेरा गया है. पहले अबार्गील की किशोरावस्था, फिर बलात्कार पीड़ित के रूप में उनकी मानसिक स्थिति और फिर बेबाक सामाजिक कार्यकर्ता बनने का सफर फिल्म में दर्शाया गया है. डॉक्यूमेंट्री में उनके निजी जीवन को भी दिखाया गया है जिसमें वह एक पत्नी और मां की भूमिका निभा रही हैं. पेक ने बताया, "लिनोर के बारे में कुछ तो है जो बलात्कार पीड़ितों को उनपर विश्वास दिलाता है. उन्हें लगता है कि उनपर विश्वास किया जा सकता है और उनके सिर से शर्मिंदगी का भार कम होता है."

छह में से एक शिकार

अमेरिका में बलात्कार और घरेलू हिंसा के खिलाफ काम करने वाली संस्था 'रेप अब्यूज एंड इंसेंट नेशनल नेट्वर्क' के अनुसार, अमेरिका में हर छह में से एक महिला के साथ बलात्कार हुआ है या कोशिश की गई है. इनमें से 60 फीसदी मामलों की पुलिस में रिपोर्ट नहीं की जाती. इस्राएल के आंकड़े भी काफी कुछ मिलते जुलते हैं जबकि विकासशील देशों में यह और भी ज्यादा है. पेक ने बताया कि फिल्म की वेबसाइट यौन पीड़ितों के लिए खास अहमियत रखती है. तीन लाख से ज्यादा लोग वेबसाइट पर आ चुके हैं. वह बताती हैं कि हर रोज उन्हें इससे संबंधित सैकड़ों ईमेल मिलते हैं.

अबार्गील का कहना है कि उन्होंने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि वह इंसाफ सिर्फ अकेले खुद के लिए नहीं चाहती थीं. उन्होंने इसे अपनी सामाजिक जिम्मेदारी की तरह महसूस किया. वह चाहती हैं कि लोग इस तरह की वर्जनाओं को तोड़ें और पीड़ितों को इस बारे में खुलकर बात करने की हिम्मत मिले, "यह मेरे लिए बेहद मुश्किल काम है. कई बार तो लोगों की इन कहानियां सुनने के बाद मैं निःशब्द हो जाती हूं."

एसएफ/आईबी (एपी)

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