बर्तन धोते हैं जापानी पीएम | दुनिया | DW | 08.09.2014
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दुनिया

बर्तन धोते हैं जापानी पीएम

ऐसा देखने में शायद ही कभी मिलता है कि किसी देश का प्रधानमंत्री घर के कामों में हाथ बंटाता हो. लेकिन जापानी प्रधानमंत्री की पत्नी का कहना है कि वह इतना व्यस्त रहती हैं कि आबे को कई बार बर्तन धोने और कूड़ा फेंकना पड़ता है.

अकी आबे कहती हैं कि वह खुले दिमाग वाले हैं जो जापान में महिलाओं और समाज की उन्नति के लिए जरूरी है. जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे कंपनियों और सरकार पर दबाव बना रहे हैं ताकि ज्यादा महिलाओं को मौका मिल सकें और उन्हें इन जगहों पर बढ़ावा मिले, जिससे जापान की अर्थव्यवस्था का विकास हो और ऐसा समाज बने जिसमें महिलाएं चमक सकें. पिछले दिनों आबे ने अपने 18 सदस्यीय मंत्रिमंडल में 5 महिलाओं को शामिल किया.

हालांकि 52 वर्षीय अकी आबे अपने आपको घर में विपक्षी पार्टी के सदस्य के तौर पर बताती हैं. वे कहती हैं कि कुछ मुद्दे पर उनके पति उनका पक्ष लेते हैं जैसे परमाणु ऊर्जा. अकी कहती हैं कि वह आबे की महिलाओं की "वुमेनॉक्सि" नीति की बड़ी समर्थक हैं.

जापान में कंपनियों, सरकार और यूनिवर्सिटी में महिलाओं का वरिष्ठ पदों पर बहुत कम प्रतिनिधित्व है. लंबे अर्से से जापानी कॉरपोरेट जगत में महिलाओं को कम वेतन और तरक्की के मामले में भेदभाव सहना पड़ता रहा है. कई बार उन्हें पति की तरफ से करियर बनाने में मदद भी नहीं मिलती है.

आबे जापान की नामी चॉकलेट बनाने वाली कंपनी के अध्यक्ष की बेटी हैं. आबे कहती हैं कि यह जरूरी है कि समाज ऐसी महिलाओं को दोबारा काम करने का मौका दें जिनके करियर में बच्चों की देखभाल और अन्य वजहों से ब्रेक आ जाता है.

उनके पति की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रैटिक पार्टी के लैंगिक समानता के बारे में विचार रूढ़िवादी हैं. लेकिन अकी जापान की प्रथम महिला कारोबारी हैं, शहर के मुख्य इलाके में उनका अपना बार है और वह स्थानीय कलाकारों और कारीगरों का समर्थन करती हैं. जैविक खेती में वह सक्रिय हैं और अपने पति के गृहनगर यामागुची में अपना चावल खुद उगाती हैं. साथ ही वह एड्स के खिलाफ काम भी करती हैं.

इस तरह की गतिविधियां और पति के कुछ विचारों से मतभेदों के कारण प्रथम महिला के तौर पर उन्होंने एकदम अलग छवि बनाई है. अकी ने एक इंटरव्यू में कहा, "मेरे पति के रूढ़िवादी समर्थक सोचते हैं कि प्रधानमंत्री की पत्नी को चुप रहना चाहिए और उनका समर्थन करना चाहिए. लेकिन जो दूसरे छोर पर खड़े हैं वे कहते हैं कि मुझे और बोलना चाहिए." अकी कहती हैं कि लोग अन्य लोगों को वर्गीकृत करते हैं जैसे वामपंथी और दक्षिणपंथी, पूर्व बनाम पश्चिम या फिर मर्दों को इस तरह से होना चाहिए और औरतों को इस तरह से. इसके कारण भेदभाव और दीवारें खड़ी होती हैं. मैं चाहती हूं कि मैं यह दीवार गिरा दूं. अक्सर आबे पूरे दिन बाहर रहते हैं, इस वजह से अकी को घर की सफाई करनी पड़ती है. अकी कहती हैं कि जब कभी जरूरत पड़ती हैं उनके पति उनका हाथ बंटाते हैं जैसे कपड़े धोने में.

एए/एएम (एएफपी)

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