बदल गया कंप्यूटर गेम्स का चेहरा | मनोरंजन | DW | 06.03.2014
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मनोरंजन

बदल गया कंप्यूटर गेम्स का चेहरा

जब से कंप्यूटर अस्तित्व में हैं तभी से इंसान ऐसे तरीकों की तलाश में रहा है जिनसे कंप्यूटर के साथ खेला जा सके. मेज पर रखे कंप्यूटर से कंप्यूटर गेम्स आज जेब तक पहुंच चुके हैं. बदलते समय के साथ अब ये सिर्फ गेम्स नहीं रहे.

स्मार्टफोन और टैबलेट के दौर में कंप्यूटर गेम्स कारोबार का बहुत बड़ा जरिया हैं. दुनिया भर में इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल ऐप्स में इनकी बड़ी हिस्सेदारी है. 50 साल पहले मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोग्रामरों ने स्पेसवॉर नाम का गेम तैयार किया. तब से वीडियो गेम की दुनिया एक अरबों डॉलर के उद्योग के रूप में पनपी है. समय के साथ बदलती जीवनशैली में कंप्यूटर गेम्स भी अपनी जगह बनाते चले गए.

स्मार्ट समय के स्मार्ट गेम्स

स्मार्टफोन और टैबलेट की लोकप्रियता के साथ कंप्यूटर गेम्स की शक्ल भी बदली है. पिछले साल रिलीज हुए एक्स बॉक्स वन और प्ले स्टेशन 4 ने वीडियो गेम्स की दुनिया में नई जान फूंकी. हालांकि जापानी कंपनी निंटेनडो का वाइ यू ग्राहकों को उतना नहीं लुभा पाया.

वीडियो गेम्स के चाहने वालों के बीच मोबाइल गेम्स की लोकप्रियता सबसे ज्यादा है. स्मार्टफोन और टैबलेट के लिए गेम्स कंपनियों ने ऐसे ऐप तैयार किए जिनसे इन्हें खेलना आसान और रोचक बन गया. स्मार्टफोन की दुनिया में जितने गेम्स के ऐप मौजूद हैं उतने किसी और चीज के नहीं.

आप जहां गेम वहां

कुछ समय पहले यह संभव नहीं था कि वीडियो गेम्स के शौकीन रास्ते में, खाते हुए या कहीं और जहां वे अपना निजी कंप्यूटर साथ नहीं रख सकते, वहां भी गेम्स खेल सकें. मोबाइल गेम्स के आने से ही यह संभव हो सका है. लोग जब जहां चाहें अपने मोबाइल पर गेम्स खेल सकते हैं, यही कारण है कि इनकी मांग भी बढ़ी है.

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अमेरिकी आइटी रिसर्च कंपनी गार्टनर के रिसर्च निदेशक ब्रायन ब्लाव कहते हैं, "लोग कंप्यूटर गेम्स को बेहद पसंद करते हैं, असली दुनिया के खेल, कंप्यूटर और इंटरेक्टिविटी का साथ में होना बेहद ताकतवर है."

बढ़ता कारोबार

गार्टनर के मुताबिक ऐप जगत में सबसे ज्यादा कमाई भी इन्हीं से होती है. गेम्स के ऐप डाउनलोड करने के लिए लोग पैसे चुकाने के लिए भी तैयार हैं. इसी तरह कई ऐसे गेम्स हैं जिनमें खेलने वाले को लेवेल जल्दी पार करने के लिए पैसे चुकाने होते हैं, और इसी से कंपनियों की कमाई होती है.

गार्टनर कंपनी का अनुमान है कि वीडियो गेम कंपनियों के ऑनलाइन, कंसोल, निजी कंप्यूटर और मोबाइल से हाथ मिलाने की वजह से इस साल से अगले साल तक कारोबार 101 अरब डॉलर से बढ़ कर 111 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा और 2017 में 128 अरब डॉलर होगा. पिछले बीस साल में एक्स बॉक्स, प्ले स्टेशन और वाइ हार्डवेयर बेहद आम नाम हो गए हैं.

ब्रिटेन की किंग डिजिटल एंटरटेनमेंट कंपनी का गेम कैंडी क्रश सागा लोगों को खूब भा रहा है और अब स्टॉक मार्केट में प्रवेश करने जा रहा है. ऐसी ही अन्य मोबाइल गेम्स की कंपनियां रोवियो, वूगा और सुपर सेल हैं. इसके अलावा सोशल मीडिया पर खेला जाने वाले गेम्स जिंगा और फार्मविले इस बात के उदाहरण हैं कि किस तरह हर मंच पर इन गेम्स का कब्जा है. गार्टरन के मुताबिक अगले दो साल में मोबाइल गेम्स से कंपनियों को होने वाली कमाई दुगनी होकर 22 अरब डॉलर पहुंच जाएगी.

एसएफ/एएम (एएफपी)

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