बढ़ रहा है ऑनलाइन कारोबार | दुनिया | DW | 02.01.2014
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दुनिया

बढ़ रहा है ऑनलाइन कारोबार

भारत में ऑनलाइन खरीददारी का चलन बढ़ता जा रहा है. 2013 में देश में ऑनलाइन खरीददारी का बाजार 88 फीसदी की जबर्दस्त वृद्धि के साथ 16 अरब डालर तक पहुंच गया. 2023 तक ऑनलाइन खरीददारी बढ़कर 56 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान है.

आर्थिक सुस्ती और बढ़ती महंगाई ऑनलाइन खरीददारी के बढ़ते चलन को रोकने में असफल रही है. वाणिज्य एवं उद्योग मंडल एसोचैम की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश में इंटरनेट पर जाने वालों की बढ़ती तादाद और इंटरनेट के जरिये भुगतान के और ज्यादा विकल्प सामने आए हैं. एसोचैम महासचिव डीएस रावत का कहना है कि इसके अलावा इंटरनेट के प्रसार की वजह से भी ई कॉमर्स को बढ़ावा ही मिला है.

और तेजी से बढ़ेगा

भारत दुनिया के तीन सबसे तेज़ी से बढ़ रहे ऑनलाइन बाज़ारों में से एक है. एसोचैम की रिपोर्ट "2013 में ऑनलाइन शॉपिंग की समीक्षा और परिदृश्य" के मुताबिक, देश का ईकॉमर्स बाजार 2009 में 2.5 अरब डॉलर था जो 2013 में बढ़कर 16 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. ऑनलाइन खरीददारी का चलन सिर्फ बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं रह गया है बल्कि बिहार, पंजाब, झारखंड, उत्तरप्रदेश जैसे राज्यों के छोटे शहरों और कस्बों में रहने वाले उपभोक्ता भी अब ई कॉमर्स के साथ जुड़ रहे है. देश के ग्रामीण क्षेत्र भी पीछे नहीं है. ऑनलाइन कारोबार से जुड़े समीर सरैया कहते हैं कि ऑनलाइन खरीददारी के प्रति भरोसा पैदा होने के बाद इसका और तेज़ी से विस्तार होगा. एसोचैम रिपोर्ट में 2023 तक ऑनलाइन खरीददारी के बढ़कर 56 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान लगाया गया है. यह आंकड़ा कुल खुदरा बाजार का 6.5 फीसदी है.

एसोचैम ने अपने सर्वेक्षण के लिए मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरू, अहमदाबाद और कोलकाता के 3,500 से अधिक ऑनलाइन कारोबारियों और संगठित रिटेलरों से आंकड़े लिए. सर्वेक्षण के मुताबिक ऑनलाइन खरीददारी में मुंबई पहले स्थान पर रहा. इसके बाद दिल्ली और कोलकाता रहे. होम डिलीवरी और चौबीसों घंटे भुगतान की सुविधा होने के कारण बड़े शहरों में ऑनलाइन खरीददारी के विस्तार को और गति मिलने की सम्भावना है.

युवाओं की पसंद

भारत में ऑनलाइन खरीददारी का चलन बढ़ने में युवाओं का विशेष योगदान रहा है. इंटरनेट उपयोग करने वाले युवाओं की संख्या बड़ी तेज़ी से बढ़ रही है और ऐसे ही युवाओं के लिए खरीददारी का मतलब सिर्फ एक क्लिक होता है. एसोचैम की रिपोर्ट बताती है कि कुल ऑनलाइन खरीददारी में से 90 फीसदी खरीददारी 35 वर्ष से कम उम्र के लोग करते हैं. 35 फीसदी ऑनलाइन खरीददारी 18 से 25 वर्ष के युवा और 55 फीसदी 26 से 35 वर्ष के लोग करते हैं जबकि 36 से 45 वर्ष के आयुवर्ग में ऑनलाइन खरीददारी करने वालों का हिस्सा आठ फीसदी रहा है. 28 वर्षीय दिनेश पटेल ऑनलाइन खरीददारी को सहूलियत भरा मानते है. उनका कहना है, "इससे समय और पैसे दोनों बचते हैं, आसान तो ये है ही." दिनेश के अनुसार, दिन हो या रात और ऑफिस या घर, कहीं से भी खरीददारी कर पाना इसकी सबसे बड़ी खासियत है.

मोबाइल फोन, आई पैड, डिजिटल कैमरा, ज्वेलरी और फैशन से जुडी सामग्री की ऑनलाइन खरीददारी में भारतीयों ने काफी रूचि दिखाई है. ऑनलाइन खरीददारी को सुविधाजनक बताने वाली मंजू जोशी कहती हैं कि मुम्बई जैसे शहरों में शॉपिंग करना किसी सिरदर्द से कम नहीं है. वे अपने किचन से सम्बंधित चीजों के लिए ऑनलाइन शॉपिंग करती है और पसंद आने पर कपडे भी ऑनलाइन ही खरीद लेती हैं.

जबोंग और ग्रुप ऑन जैसी ऑनलाइन साईट से खरीददारी कर चुके केतन कहते हैं कि शुरुआती हिचक के बाद अब ऑनलाइन शॉपिंग सुविधाजनक लगने लगा है. इसके बावजूद अभी भी एक बड़ा वर्ग है जो ऑनलाइन खरीददारी में मिलने वाली छूट से आकर्षित तो होता है लेकिन भरोसा न होने के कारण खरीददारी नहीं कर पाता. केतन की तरह कई लोग खरीददारी के समय मांगे जाने वाले वित्तीय जानकारी को साझा करने में हिचकिचाते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुत से ऐसे लोग हैं जो उत्पाद की गुणवत्ता के बारे में ऑनलाइन साईट के दावे से संतुष्ट नहीं हो पाते.

रिपोर्ट: विश्वरत्न श्रीवास्तव

संपादनः मानसी गोपालकृष्णन

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