बढ़ते तापमान की वजह से नौकरी के साथ-साथ जा रही लोगों की जान | भारत | DW | 26.11.2019
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भारत

बढ़ते तापमान की वजह से नौकरी के साथ-साथ जा रही लोगों की जान

जलवायु परिवर्तन की वजह से तापमान तेजी से बढ़ रहा है. इससे लोगों की नौकरी पर भी असर पड़ रहा है. केवल ओडिशा में हर साल इससे 42 हजार लोगों की जान जा सकती है.

पूर्वी भारत में रहने वाले एक पेंटर मुरली साहू कहते हैं, "इन दिनों जो अत्यधिक गर्मी पड़ रही है वह किसी शातिर चोर से कम नहीं है." तपते दिन के अंत में काम खत्म करने के बाद मुरली अपनी बाल्टी और ब्रश को धोते हैं और घर जाने की तैयारी करते हैं. 43 वर्षीय मुरली कहते हैं कि एक दशक पहले तक पूरे सप्ताह काम करने के बाद छह हजार रुपये तक की आय हो जाती थी. लेकिन अब यह घटकर केवल 2,500 रूपये रह गई है. दो बच्चों के पिता मुरली कहते हैं, "एक दिन में 350 रुपये कमा कर कोई घर कैसे चला सकता है? इतने कम पैसे में पूरे परिवार का गुजारा कैसे होगा."

वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनिया के कई हिस्सों में काफी ज्यादा गर्मी पड़ रही है. इसका असर खुले में काम करने वाले कामगारों पर पड़ रहा है. वैज्ञानिकों के एक गैर-लाभकारी संगठन क्लाइमेट इंपैक्ट लैब ने नवंबर में एक रिपोर्ट जारी कर बताया है कि यदि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की दर ऐसी ही बनी रही तो सन 2100 तक भारतीय राज्य ओडिशा में साल के 48 दिन बहुत ज्यादा गर्मी पड़ेगी. तुलना के लिए जानना जरूरी है कि वर्ष 2010 में अत्यधिक गर्मी वाले केवल 1.5 दिन थे. शोधकर्ताओं ने अत्यधिक गर्मी वाला दिन उस दिन को कहा है जब बाहर का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक पहुंच जाए.

भारत में गर्मी से होने वाली मौतों पर यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो में टाटा सेंटर फॉर डेवलपमेंट की सहायता से रिपोर्ट तैयार की गई. इसके तहत जलवायु परिवर्तन की वजह से भारत में मानवीय और आर्थिक प्रभाव तथा मौसम में बदलाव की जांच की गई. शिकागो के हैरिस स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के पर्यावरण अर्थशास्त्री आमिर जिना ने कहा, "मौसम और जलवायु भारत की अर्थव्यवस्था और समाज को आकार देते हैं." उन्होंने कहा, "तापमान और वर्षा मानव स्वास्थ्य, श्रम उत्पादकता, कृषि पैदावार, अपराध और संघर्ष को प्रभावित करते हैं."

अध्ययन में यह बात सामने आई कि ओडिशा में गर्मियों में औसत तापमान 2010 में 29 डिग्री सेल्सियस था जो 2100 तक 32 डिग्री से ऊपर जा सकता है. भारत में औसत तापमान 24 डिग्री सेल्सियस से बढ़कर 28 डिग्री सेल्सियस हो सकता है. ओडिशा के शहरों में कंक्रीट की इमारतों और सड़कों के लगातार निर्माण और इसके 480 किलोमीटर लंबे (290 मील) तटीय क्षेत्र की वजह से यह क्षेत्र विशेष रूप से गर्म और आर्द्र हो सकता है.

अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

तापमान के बढ़ने की वजह से ओडिशा की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी क्योंकि लोगों को काम करने में कठिनाई का सामना करना पड़ेगा. जिना बताते हैं कि अभी तक किसी ने इसकी गणना नहीं की है कि गर्मी बढ़ने से राज्य की उत्पादकता पर क्या प्रभाव पड़ेगा. क्लाइमेट इंपैक्ट लैब ने अपने अगले अध्ययन में इस बात पर शोध करने की योजना बनाई है. लेकिन संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने जुलाई महीने में अनुमान लगाया था कि गर्मी की वजह से भारत में 2030 तक काम करने के समय में 6 प्रतिशत की कमी हो सकती है. आईएलओ ने कहा कि यह तीन करोड़ 40 लाख लोगों के काम के बराबर हो सकता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अत्याधिक गर्मी की वजह से लोगों की मौत भी हो सकती है.

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित है. यहां काम करने वाले विशेषज्ञ अंबरिश दत्ता कहते हैं कि जब तापमान 36.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है तो इसे जानलेवा कहा जा सकता है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2017 तक पिछले एक दशक में ओडिशा में गर्मी की वजह से 630 लोगों की मौत हुई. राज्य में एक तिहाई कामगार अनौपचारिक क्षेत्र में काम करते हैं. इनमें से ज्यादातर खुले में काम करते हैं. सीआईएल ने अपने अध्ययन में अनुमान लगाया है कि इस सदी के अंत तक गर्मी की वजह से ओडिशा में हर साल 42 हजार लोगों की जान जा सकती है.

पर्यावरण अर्थशास्त्री जिना का कहना है कि आय में असमानता भी राज्य में गर्मी बढ़ने की एक वजह है. टाटा सेंटर फॉर डेवलपमेंट की पिछले महीने की एक रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में घर को ठंड़ा रखने के लिए एयर कंडीशनर लगाने में औसतन वही व्यक्ति निवेश करता है जिसकी सालाना आय कम से कम नौ लाख 83 हजार रुपये हो. सरकारी आंकड़े दिखाते हैं कि ओडिशा में सलाना औसत आय 75,800 रुपये है. यह आय काफी कम है और इस वजह से ज्यादातर लोग अपने घरों में एयर कंडिशनर नहीं लगा पाते हैं. जिना कहते हैं, "लोग किन सुविधाओं का उपभोग करेंगे, यह उनकी आय पर निर्भर करता है. ज्यादा पैसा कमाने वाले ही एयर कंडीशनर लगा सकते हैं. अपने घर को ज्यादा सुरक्षित बना सकते हैं."

चुकानी पड़ रही है गर्मी की कीमत

पर्यावरण और विकास विशेषज्ञ कहते हैं कि अभी भी वक्त है कि ओडिशा में बढ़ती गर्मी और लोगों की मौत को रोका जा सकता है. दत्ता कहते हैं कि सरकार को नियमों में और ज्यादा सख्ती बरतने की जरूरत है ताकि अत्याधिक गर्मी वाले दिनों में कामगारों को खुले में काम नहीं करना पड़े. नियम में यह भी है खुले में काम करने वाले श्रमिकों को छाया, पानी और गर्मी से बचाने के लिए साधन उपलब्ध करवाया जाए.

ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुख्य प्रबंधक प्रदीप कुमार नायक कहते हैं कि राज्य को इस बात की गंभीरता से जांच करने की आवश्यकता है कि अत्यधिक गर्मी की वजह से असंगठित क्षेत्र के कामगारों की आजीविका और आर्थिक उत्पादकता तथा राज्य की जीडीपी पर क्या प्रभाव पड़ता है. उन्होंने बताया कि बहुत ज्यादा गर्मी की वजह से कामगारों की आय पर सबसे अधिक फर्क पड़ता है.

इस स्थिति के कारण साहू जैसे लोगों का नुकसान बढ़ रहा है. वर्ष 2017 में साहू को आंत के कैंसर का पता चला, जिसका उन्होंने इलाज करवाया. ऐसा वर्षों तक लगातार गर्म मौसम में काम करने की वजह से हुआ था. साहू ने बताया कि वे अकसर अपनी शरीर की क्षमता से अधिक काम करते थे, काम में देरी न हो जाए इसलिए पानी पीने तक के लिए भी आराम नहीं करते थे. नतीजा ये हुआ कि शरीर में पानी की काफी कमी हो गई. इलाज के दौरान उनकी पत्नी भी उन्हें छोड़ कर चली गई क्योंकि उसे लगा कि साहू कभी ठीक नहीं हो पाएंगे. हालांकि साहू अब ठीक हो चुके हैं लेकिन कमजोरी की वजह से महीने में 15 दिन से ज्यादा काम नहीं कर पाते हैं. वे अब अधिक गर्मी भी बर्दाश्त नहीं पाते हैं इसलिए घर के अंदर ही पेंटिंग करने का काम करते हैं.

आरआर/आरपी (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन)

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