बजट डायरी से निकली शायरी... | वीडियो और तस्वीरें | DW | 31.01.2017
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दुनिया

बजट डायरी से निकली शायरी...

अपने आर्थिक तर्कों को व्यापक आधार देने के लिए वित्त मंत्रियों ने अनेक मौकों पर कवियों, संतों समाजशास्त्रियों, साहित्यकारों आदि की व्याख्याओं और रचनाओं का इस्तेमाल अपने बजट भाषणों में किया है.

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