बच्चों की भूख बढ़ाते टीवी विज्ञापन | दुनिया | DW | 28.06.2011
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दुनिया

बच्चों की भूख बढ़ाते टीवी विज्ञापन

टीवी पर जंक फूड के विज्ञापन देख कर बच्चों का केवल मन ही नहीं ललचाता, बल्कि उन्हें भूख भी अधिक लगती है. एक शोध में पता चला है कि बहुत अधिक टीवी देखने वाले बच्चों में मोटापे का खतरा ज्यादा होता है.

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इस शोध के दौरान कई उम्र के बच्चों को डीवीडी पर विज्ञापन दिखाए गए. शोध में पाया गया कि विज्ञापन देखने के बाद बच्चों की भूख बढ़ गई और वे मीठा और तला हुआ खाना खाना चाहते थे. यह शोध ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ लीवर पूल में किया गया. शोध करने वाली एमा बॉयलैंड ने अपने रिसर्च पेपर में लिखा, "टीवी पर खाने के विज्ञापन देखने के कारण लोग खास तौर से उसी ब्रैंड की ओर तो आकर्षित होते ही हैं, साथ ही कम टीवी देखने वालों की तुलना में उनकी भूख भी बढ़ जाती है."

एमा बॉयलैंड ने यह भी पाया कि जब बच्चों को खिलौनों के विज्ञापन दिखाए गए तब उन्हें उतनी भूख नहीं लगी जितनी जंक फूड के विज्ञापन देखने के बाद लगी. यानी आम

Dickes Kind

जिंदगी में जो बच्चे बहुत ज्यादा टीवी देखते हैं, वे उतना ही ज्यादा जंक फूड खाते भी हैं. शोध में 'बहुत ज्यादा' की परिभाषा एक हफ्ते में 21 घंटे बताई गई है. कुल मिलकर यह कहा गया है कि बच्चों को एक दिन में करीब दो घंटे से अधिक टीवी देखने की इजाजत नहीं देनी चाहिए. बच्चे विज्ञापन केवल टीवी पर ही नहीं, बल्कि कंप्यूटर और मोबाइल फोन पर भी देखते हैं, इसे भी इसी समय में जोड़ा गया है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स को लिखे एक ईमेल में बॉयलैंड ने कहा, "एक प्रयोग में यह कभी साबित नहीं हो पाएगा कि बच्चों के मोटापे का कारण खाने के विज्ञापन हैं. इसमें और भी बहुत सारी बातों का ध्यान रखना होगा." बॉयलैंड ने कहा कि यह सच है कि बच्चे विज्ञापन देखने के बाद फ्रेंच फ्राइज और चोकलेट मांगते है, लेकिन उन्हें ये चीजें देनी हैं या नहीं, यह मां बाप के हाथों में है.

अमेरिकन अकेडमी ऑफ पडिएट्रिक्स ने इसी हफ्ते जंक फूड पर बयान जारी करते हुए इनके विज्ञापन को बंद करने की मांग की है.

रिपोर्ट: रॉयटर्स/ ईशा भाटिया

संपादन: ए कुमार

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