बंधन तोड़ता अंतरजातीय ब्याह | दुनिया | DW | 30.03.2013
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दुनिया

बंधन तोड़ता अंतरजातीय ब्याह

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार अब अंतरजातीय विवाह को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देना चाहती है. सरकार ने इसके लिए ऐसा विवाह करने वाले दंपतियों को पहली अप्रैल से एकमुश्त 50,000 रुपये की सहायता का फैसला किया है.

यह रकम वैसे नवविवाहित दंपतियों को मिलेगी जो अंतरजातीय विवाह के बाद कम से कम एक साल तक साथ रहेंगे. उसके बाद यह रकम सीधे उनके बैंक खातों में डाल दी जाएगी. सरकार का कहना है कि वह राज्य में जात-पात का भेदभाव खत्म करने का प्रयास कर रही है.

योजना पुरानी, पहल नई

वैसे, यह योजना पुरानी और केंद्र सरकार की है. लेकिन कम्युनिस्टों के शासनकाल में यह ठप हो गई थी. इसकी वजह यह थी कि इस मद में केंद्र सरकार ने 1995-96 में जो अनुदान दिया, उसे खर्च करने में ही सीपीएम की अगुवाई वाली सरकार को 12 साल लग गए. इस योजना के तहत आधा पैसा केंद्र सरकार देती है और आधा राज्य सरकार.

बाद में राज्य सरकार ने इसके लिए जब केंद्र से पैसा मांगा तो उसने यह कर इनकार कर दिया कि पहले दी गई रकम का इस्तेमाल प्रमाणपत्र उसे नहीं मिला है. न तो केंद्र से पैसा मिला और न ही किसी को इस मद में सहायता दी गई. 2008 में ही सरकार ने इस रकम को पांच से बढ़ा कर 30,000 करने का फैसला किया था. लेकिन तब से किसी को इस मद में कोई सहायता ही नहीं मिली.

ममता की पहल

अब पश्चिम बंगाल सरकार ने भारी वित्तीय तंगी के बावजूद नई पहल के तहत प्रेम विवाह के लिए मशहूर इस राज्य में अंतरजातीय विवाह को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करने के लिए यह रकम बढ़ा कर 50,000 रुपये कर दी है. यह रकम पहली अप्रैल से दी जाएगी. सरकार ने इस योजना के प्रचार-प्रसार के लिए विज्ञापन अभियान चलाने का फैसला किया है.

राज्य के पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री उपेन किस्कू कहते हैं, "सरकार राज्य में जातिगत भेदभाव को खत्म करना चाहती है. इसलिए हमने ऐसे दंपतियों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता दोबारा शुरू करने और इस रकम को बढ़ाने का फैसला किया है." वह कहते हैं कि सिर्फ वित्तीय सहायता देकर ही अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता, "हमें युवा वर्ग को इसके लिए प्रेरित करना होगा. इसके लिए अलग-अलग स्तर पर प्रचार अभियान चलाया जाएगा."

किसे मिलेगी सहायता

इस तरह की सहायता पाने की शर्त है कि वर-वधू में से कोई भी एक अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से होना चाहिए और दूसरा सामान्य वर्ग से. ऐसी शादी समुचित अधिकारी के सामने पंजीकृत होनी चाहिए. यह सहायता उसी सूरत में दी जाएगी, जब यह युवक और युवती दोनों की पहली शादी हो. वर्षों से ठप पड़ी इस योजना को नए सिरे से शुरू करने के बाद इसकी रकम भी बढ़ा दी गई है. इस महीने आयोजित एक सामूहिक विवाह समारोह में शामिल 52 जोड़ों को साल भर तक साथ रहने के बाद यह रकम मिलेगी.

दंपती खुश

सरकार की इस योजना से अंतरजातीय दंपतियों में काफी उत्साह है. इसी महीने ब्याह रचाने वाली रीना दास कहती हैं, "पचास हजार रुपये की सहायता से नई गृहस्थी का सफर शुरू हो सकता है." उनके पति अंजन भट्टाचार्य कहते हैं, "सरकारी प्रोत्साहन से बड़ी तादाद में लोग अंतरजातीय विवाह के लिए आगे आएंगे."

वरिष्ठ समाजविज्ञानी डॉक्टर समीर बनर्जी कहते हैं, "अंतरजातीय विवाह के ज्यादातर मामलों में नवविवाहित जोड़े को शुरुआत में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. खास कर जब पति या पत्नी अनुसूचित जाति की हो तो समस्या और बढ़ जाती है. दोनों परिवारों के बीच जाति और रीति रिवाजों की बेड़ियां होती हैं." वह कहते हैं कि 50,000 रुपये की सरकारी सहायता से ऐसे जोड़ों को नया जीवन शुरू करने में आसानी होगी.

मनोचिकित्सक सुधीर चौधरी का कहना है, "अगर लड़का और लड़की आत्मनिर्भर न हों तो अंतरजातीय विवाह उनके जीवन में कई मुश्किलें पैदा कर सकती हैं. ऐसे में सरकार की इस योजना से ऐसे कई जोड़े शादी के लिए आगे आएंगे." दिलचस्प बात यह है कि यह सहायता हर आय वर्ग के जोड़ों को मिलेगी.

रिपोर्टः प्रभाकर, कोलकाता

संपादनः ए जमाल

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