फोर्ड को मांगनी पड़ी माफी | मनोरंजन | DW | 27.03.2013
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मनोरंजन

फोर्ड को मांगनी पड़ी माफी

फोर्ड के विज्ञापन को भारत में कड़ा विरोध झेलना पड़ा और कंपनी को माफी मांगनी पड़ी. इसे महिलाओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला माना गया. देश महिलाओं के सम्मान के लिए जाग उठा है या पश्चिमी अंदाज के मजाक के लिए जगह नहीं?

इस ऑनलाइन इश्तेहार में तीन विज्ञापन सामने आए जिनमें से एक में इटली के पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बेर्लुस्कोनी को ड्राइविंग सीट पर दिखाया गया. गाड़ी की डिक्की में तीन महिलाओं को हाथ पैर बांध कर दिखाया गया था जैसे किसी सामान की तरह भर दिया गया हो. विज्ञापन सामने आते ही भारत में इसकी कड़ी आलोचना हुई.

फेसबुक और ट्विटर पर भी लोगों ने इसे शर्मनाक बताया. कंपनी का कहना है कि उनके अनुमोदन के बगैर ही विज्ञापन कंपनी ने इसे सार्वजनिक कर दिया. बाद में फोर्ड ने लोगों से माफी मांगी और विज्ञापन को हटा दिया गया.

दिल्ली में जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर और समाजशास्त्री इम्तियाज अहमद ने डॉयचे वेले से कहा, "भारत में आम तौर पर लोग विज्ञापनों से ज्यादा प्रभावित नहीं होते. लेकिन अगर किसी बात से इनकी धार्मिक या पारंपरिक मान्यताओं को ठेस पहुंचती है तो विवाद खड़ा हो जाता है. फोर्ड के इस विज्ञापन के साथ ऐसा ही हुआ." पिछले साल 16 दिसंबर को दिल्ली बलात्कार कांड और हत्याकांड के मामले के बाद से लोग इन बातों को लेकर और भी संवेदनशील हो गए हैं. इसके बाद देश भर में सामूहिक विरोध हुए और भारत में महिलाओं के लिए नए कानून बनाने के रास्ते साफ किए जा रहे हैं.

ताजा विज्ञापन में दिखाई गई महिलाओं की छवि का जनता ने जमकर विरोध किया. इसके बाद माफी मांगते हुए कंपनी ने बयान में कहा, "जो हुआ हमें उसका बहुत अफसोस है. हम और खुद विज्ञापन एजेंसी भी मानती है कि ऐसा नहीं होना चाहिए था."

दिल्ली बलात्कार मामले के खिलाफ देश भर में प्रदर्शन हुए.

दिल्ली बलात्कार मामले के खिलाफ देश भर में प्रदर्शन हुए.

संवेदनशील है भारत

यूरोप में भी इस तरह के कई विज्ञापन सामने आते हैं लेकिन उन पर ऐसी कड़ी प्रतिक्रिया नहीं होती. जर्मनी से प्रकाशित होने वाली पत्रिका टिटानिक इस तरह के खुले मजाक के लिए जानी जाती है फिर चाहे वह पोप की कोई हास्यास्पद तस्वीर हो या चांसलर अंगेला मैर्केल का मजाक उड़ाना. फ्रोफेसर अहमद मानते हैं, "भारत में लोग घर के अंदर औरतों के साथ कैसा भी बर्ताव करते हों लेकिन जब बात उनकी सामाजिक छवि की आती है तो वे बर्दाश्त नहीं करते. यह बात भी सही है कि हाल में बलात्कार कांड के मीडिया में उछलने से आम लोगों में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए जिम्मेदारी का अहसास बढ़ा है."

रस्सी कसनी होगी

अहमद मानते हैं कि कई बार विज्ञापन कंपनियां भूल जाती हैं कि उनके विज्ञापन से समाज पर किस तरह का प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने कहा, "इस पर अंकुश जरूरी है. अगर सेंसर बोर्ड की तरह विज्ञापनों पर नजर रखने वाली आधिकारिक समिति हो तो यह फायदेमंद साबित हो सकता है."

फोर्ड के लिए यह विज्ञापन भारतीय कंपनी जेडब्ल्यूटी ने बनाया था. इसकी अंतरराष्ट्रीय मालिक कंपनी डब्ल्यूपीपी ने कहा है कि ऐसा टीम के एक सदस्य की भूल से हुआ. एजेंसी का कहना है कि इस मामले को वह गंभीरता से ले रही है और भविष्य में वह ऐसी बातों से बचना चाहती है. अमेरिकी कार कंपनी फोर्ड ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है कि वे विज्ञापन कंपनी के खिलाफ कोई कदम उठाएंगे या नहीं.

सीरीज के दूसरे विज्ञापन में अमेरिकी अभिनेत्री पेरिस हिल्टन को ड्राइविंग सीट पर दिखाया गया है जबकि तीन युवतियां पीछे डिक्की में बंधी हुई दिख रही हैं, जहां लिखा है, "फीगो एक्सट्रा लार्ज बूट के साथ अपनी चिंताएं पीछे छोड़ दें." ये युवतियां अमेरिकी अभिनेत्री किम कार्डेशियन और इनकी बहनों जैसी दिखाई गई हैं. पूरे मामले के बाद विज्ञापनों की यह सीरीज एजेंसी ने इंटरनेट से हटा ली.

रिपोर्टः समरा फातिमा

संपादनः ए जमाल

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