फेसबुक के खिलाफ मुकदमा | दुनिया | DW | 28.10.2015
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दुनिया

फेसबुक के खिलाफ मुकदमा

इस्राएल के एक एनजीओ ने फेसबुक के खिलाफ याचिका दायर की है. कंपनी पर यहूदियों पर हो रहे हमलों को बढ़ावा देने वाले फेसबुक पेजों को न हटाने का आरोप लगाया गया है.

शुरत हादिन संस्था की निदेशक नित्साना डर्शन-लाइटरन ने फेसबुक के खिलाफ न्यूयॉर्क में याचिका दायर की है. उन्होंने फेसबुक पर हिंसा को भड़काने वाली पोस्ट को जगह देने का आरोप लगाया है. याचिका में फेसबुक से घृणा फैलाने वाले 1,000 पेज हटाने को कहा गया है. साथ ही दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट से निगरानी बेहतर करने की मांग भी की गई है. याचिकाकर्ता ने फेसबुक से कोई आर्थिक हर्जाना नहीं मांगा है.

डर्शन-लाइटरन का कहना है, "जिस तरह वे बता सकते हैं कि आपने सुबह कौन सी कॉफी पी है और विज्ञापन दे सकते हैं या फिर ऐसे दोस्तों से जोड़ सकते हैं जिनके शौक मेरे जैसे हैं, उसी तरह वे इन धमकियों को भी देख सकते हैं और आतंकी हमलों का महिमामंडन करने वाली पोस्ट्स को हटा सकते हैं."

इस ऑनलाइन याचिका का समर्थन 20,000 इस्राएलियों ने किया है. याचिकाकर्ता का कहना है कि इसका कोई राजनैतिक या आर्थिक मकसद नहीं है, वे सिर्फ यहूदी अधिकारों की रक्षा करना चाहती हैं.

सूची में अमेरिकी-इस्राएली नागरिक रिचर्ड लाकिन का नाम भी लिखा गया है. 13 अक्टूबर को पूर्वी येरुशलम के एक बस स्टॉप पर 76 साल के लाकिन पर चाकुओं से हमला हुआ और फिर उन्हें गोली मार दी गई. एक अक्टूबर से अब तक किसी इस्राएली पर हुआ यह नौंवा हमला है. इस्राएल का आरोप है कि फलीस्तीनी कट्टरपंथी अब आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं. लाकिन के बेटे मिकाह एवनी लाकिन के मुताबिक, "जो दुखद, खौफनाक घटना मेरे पिता के साथ हुई, वह हमें यह सोचने का मौका दे रही है कि हमें सोशल मीडिया को कैसे देखना चाहिए."

फलीस्तीनी कट्टरपंथी गुटों ने इंटरनेट पर ऐसे कई वीडियो डाले हैं जिनमें हत्या करना सिखाया गया है. एवनी लाकिन इसका उदाहरण भी देते हैं, "फेसबुक और ट्विटर पर इस बात के खास निर्देश डाले जा सकते हैं कि कैसे किसी के सीने को चीरें और आंतों को काटें. मेरे पिता के साथ ऐसा ही हुआ. यह पूरी तरह अस्वीकार्य है." लाकिन ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून के सामने भी यह चिंता जताई.

याचिका का जवाब देने के लिए फेसबुक को 30 दिन का समय दिया गया है. इस बीच अमेरिकी कंपनी फेसबुक ने एक बयान जारी कर कहा है, "यह याचिका बिना आधार वाली है और हम पूरा जोर लगाकर अपनी रक्षा करेंगे. हम चाहते हैं कि लोग फेसबुक इस्तेमाल करते वक्त सुरक्षित महसूस करें. हिंसा को बढ़ावा देने वाली सामग्री, सीधी धमकी, आतंकवाद या घृणा भरे भाषण के लिए फेसबुक में कोई जगह नहीं है."

इस्राएल ने यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में भी उठाया है. उसने यूएन के सामने एक वीडियो पेश किया जिसमें बताया जा रहा है कि शरीर पर चाकू मारने के लिए सबसे मुफीद जगह कौन सी होती है. सोशल मीडिया पर अरबी में लिखा गया हैशटैग #Jerusalemintifada भी चल रहा है, जिसमें हमले का वीडियो पोस्ट किया जाता है. इस्राएली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने इस चलन को "बिन लादेन की मार्क जकरबर्ग से मुलाकात" करार दिया है.

ओएसजे/आईबी (एएफपी)

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