फेसबुक की पोल खोलने वाला शख्स | दुनिया | DW | 30.03.2018
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दुनिया

फेसबुक की पोल खोलने वाला शख्स

गुलाबी बाल और नाक में रिंग पहनने क्रिस्टोफर वाइली का दावा है कि उन्होंने डाटा एनालिसिस कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका को बनाने में मदद लेकिन अब वो व्हिसलब्लोअर बन गए हैं और फेसबुक को घेरे में लेने वाले विवाद का चेहरा भी.

गार्जियन से जुड़ी पत्रकार कैरोल काडवाल्डर ने एक खबर के सिलसिले में वाइली के साथ एक साल काम किया. वो उन्हें, "चतुर, मजाकिया, कटु आलोचक, पारंगत, बौद्धिक रूप से बेहद भूखे, दमदार, शानदार किस्सागो, राजनेता और आंकड़ों के विज्ञान में तेज दिमाग" बताती हैं.

चश्मा पहनने वाले 28 साल के वाइली खुद को कनाडाई वीगन बताते हैं जिसने किसी तरह स्टीव बेनॉन के मनोवैज्ञानिक युद्ध औजार का तोड़ बना लिया. स्टीव बेनान डॉनल्ड ट्रंप के पूर्व सलाहकार हैं और उनके बारे में ऐसी रिपोर्ट है कि उनके कैम्ब्रिज एनालिटिका से गहरे संबंध हैं.

वाइली की मदद से काडवाल्डर ने यह दिखाया कि कैसे अमेरिका में कैम्ब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक के लाखों यूजरों की जानकारी में घुसपैठ की. इसके बाद उन्होंने इस जानकारी की मदद से लोगों के राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक प्रोफाइल तैयार किए ताकि उनके जरिए वोटरों के लिए खास तौर से लक्षित संदेश बनाए जा सकें.

फेसबुक का कहना है कि उसे नहीं पता था कि उसकी साइट से लिए गए डाटा का इस्तेमाल किया जा रहा है. हालांकि इस बात के सामने आने से यह सवाल तुरंत ही पैदा हो गया कि कि आखिर 5 करोड़ यूजरों के डाटा कैम्ब्रिज एनालिटिका तक पहुंचे कैसे.

इस जानकरी के सामने आने के बाद फेसबुक के शेयरों में लगातार गिरावट आ रही है और पिछले 10 दिनों में करीब 70 अरब डॉलर का नुकसान हो चुका है.

वाइली ने पहले कानून पढ़ा फिर फैशन और उसके बाद वो ब्रिटेन की राजनीति में लिबरल डेमोक्रैट्स के लिए काम करने उतरे. 2014 में वह स्ट्रैटजिक कम्युनिकेशन लैबोरेट्रीज के रिसर्च डाइरेक्टर बने. यही कैम्ब्रिज एनालिटिका की मातृ कंपनी है. एक अखबार से इंटरव्यू में कैम्ब्रिज एनालिटिका के बारे में उन्होंने कहा, "मैंने कंपनी को बनाने में मदद की. मैं जो काम कर रहा था उसमें अपनी ही उत्सुकता के कारण फंस गया. यह कोई बहाना नहीं है लेकिन मैंने एक रिसर्च का काम देखा जो मैं करना चाहता था, इसका बजट कई लाख का था, यह बहुत लुभावना था." शुरुआत में उन्हें दुनिया भर की सैर करने, मंत्रियों से मिलने में खूब मजा आया. लेकिन जल्दी ही सब बदल गया जब उन्हें पता चला कि उनके पूर्ववर्ती की मौत केन्या के एक होटल में हुई. वो मानते है कि उस शख्स ने "एक सौदे के बिगड़ने" की कीमत चुकाई."

फेक न्यूज की जांच कर रही ब्रिटेन की संसदीय जांच एजेंसी को उन्होंने मंगलवार को बताया, "लोगों को जहर का शक है."

सांसदों के सामने टी शर्ट की बजाय सूट टाई में पेश हुए और कई घंटों तक उस कंपनी के बारे में गवाही दी जिसे उन्होंने 2014 में ही छोड दिया. वाइली ने कहा कि डॉनल्ड ट्रंप की चौंकाऊ चुनावी जीत के बाद आखिरकार उन्होंने बोलने का फैसला किया. वो मानते हैं कि ट्रंप ने लोगों की निजी जानकारियों का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया.

कैम्ब्रिज एनालिटिका ने अपने ऊपर लगे आरोपों का बड़ी प्रबलता से विरोध किया है. कंपनी का कहना है कि वाइली महज "एक पार्ट टाइम कर्मचारी थे जिन्होंने जुलाई 2014 में नौकरी छोड़ दी" और उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं कि उसके बाद से कंपनी कैसे काम कर रही है.

वाइली ने ब्रिटिश सांसदों से इस मामले की गहराई से छानबीन करने का अनुरोध किया है. उन्होंने जोर दे कर कहा है कि उनकी चिंता राजनीति क नहीं है बल्कि वो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को होने वाले नुकसान से चिंतित हैं, उनमें ब्रेक्जिट पर रायशुमारी के लिए चला अभियान भी शामिल है.

वाइली का मानना है कि कैम्ब्रिज एनालिटिका ने ब्रेक्जिट वोट को प्रभावित किया हो यह सोचना "बहुत वाजिब" है. वाइली ने इसके साथ ही यह भी कहा कि वे फेसबुक या सोशल मीडिया के विरोधी नहीं हैं. उन्होंने कहा, मैं ये नहीं कहता कि "फेसबुक डिलीट" करो बल्कि मैं "फेसबुक को रिपेयर" करो कहता हूं.

एनआर/ओएसजे (एएफपी)

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