फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों को | दुनिया | DW | 02.10.2018
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दुनिया

फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों को

भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में इस साल का नोबेल पुरस्कार अमेरिका के आर्थर एश्किन, फ्रांस के जेरा मुरू और कनाडा की डोना स्ट्रिकलैंड के बीच बांटा गया है. उनके आविष्कार से आंखों की सर्जरी में मदद मिली है.

फिजिक्स का 2018 का नोबेल पुरस्कार अमेरिका के आर्थर एश्किन, फ्रांस के जेरा मुरू और कनाडा की डोना स्ट्रिकलैंड को दिया जाएगा. इन वैज्ञानिकों ने लेजर फिजिक्स के क्षेत्र में आविष्कार किए हैं, जिसकी मदद से आंखों की सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले यंत्र की एडवांस तकनीक के रास्ते खुले हैं. करीब 10 लाख अमेरिकी डॉलर के इस पुरस्कार में आधा हिस्सा आर्थर एश्किन को मिलेगा जबकि बाकी आधे हिस्से को जेरा मुरू और डोना स्ट्रिकलैंड के बीच बांटा जाएगा. फिजिक्स का नोबल पुरस्कार जीतने वाली स्ट्रिकलैंड दुनिया की तीसरी महिला हैं.   

96 वर्षीय एश्किन भौतिकी का पुरस्कार पाने वाले अब तक के सबसे उम्रदराज वैज्ञानिक हैं. उन्हें 'ऑप्टिकल टीजर' का आविष्कार करने के लिए सम्मानित किया गया है. 'ऑप्टिकल टीजर' के जरिए कण, अणु, वायरस व अन्य जीवित कोशिकाओं को लेजर बीम फिंगर्स के जरिए पकड़ा जा सकता है. रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेस के मुताबिक, ''इस आविष्कार के जरिए अश्किन भौतिक वस्तुओं को हिलाने में रोशनी के रेडिएशन दबाव को इस्तेमाल कर पा रहे थे."

74 वर्षीय जेरा मुरू और महिला वैज्ञानिक डोना स्ट्रिक्लैंड ने साथ मिलकर अल्ट्रा-शॉर्ट ऑप्टिकल पल्सेज बनाने तरीका विकसित किया और नोबेल पुरस्कार के हकदार बने. जूरी का कहना है, ''यह इंसानों द्वारा बनाई गई सबसे छोटी और तीव्र लेजर पल्स है."  इस तकनीक का इस्तेमाल आंखों की सर्जरी के लिए किया जा रहा है.

वीसी/एमजे (एएफपी)

 

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