फफूंद की बीमारी से उभयचरों की 90 प्रजातियां नष्ट | विज्ञान | DW | 29.03.2019
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

विज्ञान

फफूंद की बीमारी से उभयचरों की 90 प्रजातियां नष्ट

फफूंद की एक बीमारी की वजह से 500 से ज्यादा उभयचरी प्रजातियों की आबादी में भारी नुकसान हुआ है. पिछले 50 सालों में 90 प्रजातियां तो खत्म ही हो गईं.

ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में हुई एक स्टडी के अनुसार इस घातक बीमारी का नाम साइट्रिडियोमिकोसिस है. यह उभयचरी प्रजातियों की त्वचा को खा जाता है. उभयचर जीव जल और थल दोनों पर रह सकते हैं. इनमें मेढ़क, टोड और सालामैंडर शामिल हैं.

विज्ञान पत्रिका साइंस में प्रकाशित इस स्टडी ने पाया है कि इस बीमारी की वजह से जानवरों की कुछ प्रजातियां तो पूरी तरह खत्म हो गईं जबकि कुछ में यहां वहां मौतें हुईं. यह बीमारी करीब 60 देशों में पाई गई है. सबसे खराब हालत ऑस्ट्रेलिया के अलावा मध्य और दक्षिण अमेरिका की है. रिसर्चरों का कहना है, "यह बीमारी साइट्रिड फंगस के कारण होती है जिसकी शुरुआत संभवतः एशिया में हुई जहां स्थानीय उभयचर जानवरों में इस बीमारी के लिए प्रतिरोधक क्षमता है."

रिसर्च करने वाली टीम के प्रमुख वैज्ञानिक बेन शील ने एक बयान में कहा कि उनकी टीम ने पाया कि यह बीमारी जैव विविधता में बड़े पैमाने पर क्षति के लिए जिम्मेदार है और दुनिया भर में प्रजातियों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वालों में शामिल है.

बेन शील ने कहा, "वन्य जीवों में होने वाली अत्यंत खतरनाक बीमारियां, जिनमें साइट्रिडियोमिकोसिस भी शामिल है, पृथ्वी के छठे सामूहिक विनाश में योगदान दे रहा है. जिस बीमारी का हमने अध्ययन किया है वह दुनिया भर में उभयचरों के आम विनाश का कारण है." इस बीमारी के कारण ऑस्ट्रेलिया में पिछले 30 सालों में मेढ़कों की 7 प्रजातियां खत्म हो गई हैं जबकि 40 प्रजातियों की आबादी कम हुई है. शील का कहना है कि वैश्वीकरण और वन्यजीवों का कारोबार बीमारी के प्रसार के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है.

एमजे/आईबी (डीपीए)

DW.COM

विज्ञापन