′प्लास्टिक खाने वाले पशुओं की पीड़ा समझें′ | दुनिया | DW | 23.11.2014
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दुनिया

'प्लास्टिक खाने वाले पशुओं की पीड़ा समझें'

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों से कहा है कि वह जानवरों के प्रति सहानुभूति रखते हुए प्लास्टिक की थैलियों पर प्रतिबंध लगाएं. आवारा जानवर प्लास्टिक की थैलियां निगल लेते हैं जिसके बाद उन्हें काफी परेशानी होती है.

चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अगुआई वाली बेंच ने प्लास्टिक की थैलियों के इस्तेमाल और उत्पादन पर प्रतिबंध लगाने में असफल रहने पर राज्य सरकारों की खिंचाई की है. कोर्ट ने कहा है कि सरकारों को ऐसे पशुओं के दर्द और पीड़ा को समझना चाहिए जो सड़क पर प्लास्टिक की थैलियां खा लेते हैं. कोर्ट ने कर्नाटक सरकार के शहरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव को समन जारी किया है. कोर्ट ने कहा, "पशुओं की पीड़ा और दर्द को समझना चाहिए. आप एसी रूम में बैठते हैं और कहते हैं कि नियम तय कर दिए गए हैं. क्या नियम और कायदे को लागू करने के लिए राज्य सरकार की तरफ से कोई गंभीरता है? राज्यों को हमें बताना होगा कि वह कानून लागू करने में कितना कामयाब रहा है. पशुओं के प्रति राज्यों को कुछ सहानुभूति रखनी चाहिए."

स्थिति को गंभीर बताते हुए कोर्ट ने तीन वकीलों की एक कमेटी बनाई है जो राजस्थान के अलग अलग शहरों का दौरा कर यह पता लगाएगी कि सरकार ने राज्य में प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध का कितना पालन किया है. अदालत ने कहा है कि वह इस मामले में दूसरे राज्यों के प्रदर्शन की भी छानबीन करेगी और साथ ही वह अन्य राज्यों में असली स्थिति का पता लगाने के लिए टीम भेजेगी. अदालत एक एनजीओ की अर्जी पर सुनवाई कर रही है. एनजीओ ने अपने पीआईएल में कहा कि सुप्रीम कोर्ट, केंद्र और राज्यों को देश भर में प्लास्टिक की थैलियों पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दें. साथ ही उसने मांग कि है कि इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक बैग के निपटारे के लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए.

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