प्रशिक्षण के मौके से वंचित हैं जर्मनी के बहुत से युवा | दुनिया | DW | 15.04.2021
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दुनिया

प्रशिक्षण के मौके से वंचित हैं जर्मनी के बहुत से युवा

जर्मनी अपनी दोहरी शिक्षा प्रणाली के लिए जाना जाता है. इसके तहत स्कूली शिक्षा के बाद किशोरों को व्यावसायिक प्रशिक्षण मिलता है. कोरोना महामारी के दौरान बहुत से किशोर प्रशिक्षण से वंचित हैं.

कोरोना महामारी का असर यूं तो दुनिया भर में हुआ है, लेकिन जर्मनी में अर्थव्यवस्था के कुछ इलाके इसके खास चपेट में आए हैं. इसका असर पर्यटन, संस्कृति और रेस्तरां जैसे इलाकों में कारोबार और नौकरी पर हुआ है. इसका प्रभाव बहुत से नौजवानों के भविष्य पर भी पड़ा है, जिन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण की जगह नहीं मिल रही है. आने वाले महीनों में जर्मनी में स्कूली साल खत्म हो रहा है और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए नया साल शुरू हो रहा है. इस मौके पर पर जो आंकड़े सामने आए हैं उसके अनुसार 2019 के मुकाबले 2020 में व्यावसायिक प्रशिक्षण के कॉन्ट्रैक्ट में करीब 10 फीसदी की कमी देखी गई.

सांख्यिकी कार्यालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार यह कमी अभूतपूर्व है. सांख्यिकी कार्यालय का कहना है कि हालांकि पिछले सालों में व्यावसायिक प्रशिक्षण की सीटों में कमी होती रही है, लेकिन पिछले साल जितनी कमी हुई है उतनी कभी नहीं हुई. पिछले साल 4,65,000 किशोरों ने व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए कॉन्ट्रैक्ट किया. सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार उनमें दो तिहाई संख्या पुरुषों की थी. पिछले साल व्यावसायिक प्रशिक्षण की सीटें पाने में महिलाएं पुरुषों से और पीछे रही हैं. उनकी संख्या में 10.2 प्रतिशत की कमी आई.

जर्मनी के विभिन्न प्रांतों में व्यावसायिक प्रशिक्षण में कमी से पता चलता है कि किस प्रांत में अर्थव्यवस्था की क्या हालत है. हैम्बर्ग और जारलैंड में कमी साढ़े 12 प्रतिशत से ज्यादा रही है, जबकि राजधानी बर्लिन से सटे ब्रांडेनबुर्ग में सिर्फ 2.8 प्रतिशत. यह इसलिए भी है कि कृषि क्षेत्र में हालत उतनी खराब नहीं रही. उसमें एक साल पहले के मुकाबले 500 ज्यादा किशोरों को प्रशिक्षण का मौका मिला. उद्योग और व्यापार में 12 प्रतिशत की कमी और कारीगरी में 6.6 प्रतिशत की. कोरोना महामारी का असर खासकर उद्योग और व्यापार पर पड़ा है.

व्यावसायिक प्रशिक्षण का मकसद किशोरों को सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ काम के लिए तैयार करना है. दो से तीन साल के व्यावसायिक प्रशिक्षण के दौरान ट्रेनी को तनख्वाह भी मिलती है. 2018 में ट्रेनी की औसत मासिक आय 908 यूरो थी. सबसे अच्छी तनख्वाह वाले व्यवसायों में शिप मैकेनिक, नर्स, राजमिस्त्री और बीमा क्लर्क आते हैं जिन्हें पहले साल करीब 1100 और तीसरे साल में 1500 यूरो से ज्यादा मिलता है. इन नौकरियों में सालाना तनख्वाह 35 से 40 हजार यूरो होती है.

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जर्मनी की दोहरी शिक्षा प्रणाली अपने आप में अनूठी है जिसे देश में कम बेरोजगारी दर के लिए जिम्मेदार माना जाता है. तीन साल व्यावसायिक ट्रेनिंग के कारण देश में हमेशा प्रशिक्षित कुशल कर्मी उपलब्ध रहते हैं. जर्मनी के मिटेलश्टांड के नाम से विख्यात छोटे और मझौले उद्यम इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं क्योंकि देश के 10 में 8 ट्रेनी इन्हीं उद्यमों में ट्रेनिंग पाते हैं. इस सिस्टम की वजह से जर्मनी में 2019 में 15 से 24 साल के युवाओं में बेरोजगारी दर सिर्फ 5.8 प्रतिशत थी, जबकि यूरोप में यह दर 15 प्रतिशत थी. ग्रीस और स्पेन जैसे देशों में यह 30 प्रतिशत से ज्यादा है.

व्यावसायिक प्रशिक्षण एक तरह से नौकरी पाने की गारंटी है. 2018 में 71 प्रतिशत ट्रेनी को उन्हीं कंपनियों में नौकरी मिल गई जहां वे ट्रेनिंग पा रहे थे. श्रम बाजार शोध संस्थान के अनुसार 94 प्रतिशत ट्रेनी को तीन महीने के अंदर नौकरी मिल जाती है. जर्मनी में करीब 30 लाख छोटे और मझौले उद्यम हैं. देश के करीब 15 लाख ट्रेनीशिप में 80 प्रतिशत ट्रेनिंग इन्हीं उद्यमों में दी जाती है. प्रशिक्षण का बड़ा खर्च 70 प्रतिशत तक भी वही उठाते हैं. लेकिन उन्हें प्रशिक्षित कर्मचारियों की भर्ती पर कोई खर्च नहीं करना पड़ता क्योंकि 10 में सात ट्रेनी उन्ही कंपनियों में नौकरी कर लेते हैं.

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