प्रदर्शनकारियों का गुस्सा मंजूर है, लेकिन हिंसा नहीं: ईरानी राष्ट्रपति | दुनिया | DW | 01.01.2018
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दुनिया

प्रदर्शनकारियों का गुस्सा मंजूर है, लेकिन हिंसा नहीं: ईरानी राष्ट्रपति

ईरान के कई शहरों में चार दिन से जारी प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति हसन रोहानी ने माना है कि बढ़ती महंगाई को लेकर लोगों में हताशा है. सैकड़ों लोग गिरफ्तार किए गए हैं जबकि सोशल मीडिया और मैसेजिंग एप ब्लॉक कर दिए गए हैं.

ईरानी राष्ट्रपति रोहानी ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है. उन्होंने कहा कि ईरानी लोगों को प्रदर्शन करने का हक है लेकिन प्रदर्शन हिंसक नहीं होने चाहिए. ये सत्ता विरोधी प्रदर्शन कई जगह हिंसक हो गए हैं. सोशल मीडिया पर पोस्ट एक वीडियो में दिखा है कि पश्चिमी ईरान के दोरुद में गोली लगने से दो प्रदर्शनकारी घायल हो गए और कथित रूप से दोनों की मौत हो जाने की खबर है. देश में अन्य जगहों पर फिल्माए गए वीडियो में दिख रहा है कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों में आग लगा दी है और सरकारी इमारतों पर हमलों की भी खबरें हैं.

रोहानी ने कहा, "हम एक आजाद देश हैं इसलिए लोगों को अपनी बात कहने का हक है. " रविवार को कैबिनेट की बैठक के बाद उन्होंने कहा, सरकार को अपनी "वैध आलोचना और प्रदर्शनों के लिए जगह देनी चाहिए", लेकिन "आलोचना करने और हिंसा कर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में फर्क होता है".  

साल 2009 में सुधार समर्थक व्यापक रैलियों के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा प्रदर्शन है. प्रदर्शनकारियों ने 'अवैध रूप से एकत्रित नहीं होने की' ईरान के आतंरिक मंत्री की चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया. इस सिलसिले में अधिकांश जानकारियां सोशल मीडिया पर सामने आ रही हैं जिनकी पुष्टि करना मुश्किल हो रहा है.

उत्तरी ईरान के अबहार में प्रदर्शनकारियों ने ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीर वाले एक बड़े बैनर को आग के हवाले कर दिया. इस बीच, मध्य ईरान के अराक शहर में सरकार समर्थित बासिज मिलिशिया के स्थानीय कार्यालयों में भी कथित रूप से प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी.

खबरें हैं कि राजधानी तेहरान में आजादी चौक पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए. तेहरान में रिवोल्यूशनरी गॉर्ड्स के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि शहर में स्थिति नियंत्रण में है. समाचार एजेंसी आईएसएनए को ब्रिगेडियर जनरल इस्माइल कोवसारी ने बताया कि प्रदर्शनकारी अगर प्रदर्शन जारी रखते हैं तो उन्हें 'राष्ट्र के लौह हाथ' का सामना करना पड़ेगा.

एक वीडियो में दिखाया गया है कि उत्तर-पूर्व के मशहद में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से भिडंत के बाद उनकी मोटर साइकिलें जला दीं. लोगों के मोबाइल फोन पर इंटरनेट उपलब्ध नहीं होने की भी खबरें हैं. पश्चिमी ईरान के कर्मनशाह में माकन नाम के एक प्रदर्शनमकारी ने बीबीसी पर्शियन को बताया कि विरोध कर रहे लोगों को पीटा गया, ''लेकिन हम यह नहीं बता सकते कि यह पुलिस थी या बासिज मिलिशिया.''

उन्होंने कहा, "मैं राष्ट्रपति रोहानी के खिलाफ प्रदर्शन नहीं कर रहा हूं.. हां, उन्हें अर्थव्यवस्था में सुधार लाने की जरूरत है, लेकिन यह ऐसी व्यवस्था है जो सड़ चुकी है. इस्लामिक गणराज्य और इसकी संस्थाओं को सुधारने की जरूरत है." 

इससे पहले तेहरान यूनिवर्सिटी में हुए प्रदर्शन में अयातुल्ला खमेनेई को पद से हटाने की मांग की गई. प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प भी हुई. शनिवार को समूचे देश में सरकार के समर्थन में भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए. 2009 में हुए प्रदर्शनों को दबाए जाने के आठ साल पूरे होने के मौके पर पहले से ही इनके आयोजन की योजना बनाई गई थी.

शनिवार को सरकार के खिलाफ हुए प्रदर्शन, सरकार के समर्थन में हुए प्रदर्शनों से छोटे थे लेकिन इनका महत्व इसलिए अधिक माना गया कि ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन कोई रोजमर्रा की बात नहीं हैं. खास बात यह भी है कि प्रदर्शनों की वजह केवल खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ना या बेरोजगारी ही नहीं है, बल्कि प्रदर्शनकारी धर्मगुरुओं की सत्ता के खात्मे के लिए भी आवाज उठा रहे हैं. ईरानी अधिकारियों ने सत्ता विरोधी प्रदर्शनों के लिए 'क्रांतिकारी विरोधी और विदेशी शक्तियों के एजेंटों' को जिम्मेदार ठहराया है। 

--आईएएनएस

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