प्रतिबंधों के बावजूद सैकड़ों कंपनियां पहुंची उत्तर कोरिया | दुनिया | DW | 21.05.2019
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दुनिया

प्रतिबंधों के बावजूद सैकड़ों कंपनियां पहुंची उत्तर कोरिया

चीन की सैकड़ों कंपनियों के अलावा दुनिया भर की तमाम कंपनियों ने उत्तर कोरिया में निवेश की इच्छा जताई है जबकि देश प्रतिबंधों की जंजीर में जकड़ा हुआ है.

सोमवार को प्योंगयांग स्प्रिंग इंटरनेशनल ट्रेड फेयर शुरू हुआ तो देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े शीर्ष अधिकारी वहां मौजूद थे. उत्तर कोरियाई समाचार एजेंसी केसीएनए ने खबर दी है कि उत्तर कोरिया, चीन, रूस, पाकिस्तान, पोलैंड की 450 से ज्यादा कंपनियों ने इस व्यापार मेले में अपने सामान और सेवाओं की नुमाइश लगाई है. उत्तर कोरिया के इतिहास पर नजर डालें तो कंपनियों की संख्या के हिसाब से यह एक रिकॉर्ड है. उत्तर कोरिया से जुड़े मामलों पर नजर रखने वाली वेबसाइट, एन के न्यूज का कहना है कि 2007 से 2019 के बीच सरकारी मीडिया ने जो खबर दी है उसके मुताबिक तो यही लगता है.

मिसाल के लिए पिछले साल 260 कंपनियों ने कथित रूप से स्प्रिंग फेयर में हिस्सा लिया था. इस साल जो कंपनियां आई हैं उनमें 216 कंपनियां चीन की हैं. एनके न्यूज के मैनेजिंग एडिटर ऑलिवर होथम का कहना है, "हाल के वक्त में चीन ने जिस तरह से उत्तर कोरिया में अपने लिए कारोबारी मौके बनाने की दिशा में जो कदम उठाए हैं उसके हिसाब से यह संख्या बहुत कुछ कहती है, वो भी तब जबकि मौजूदा प्रतिबंधों के दौर में तकनीकी रूप से कोई आगे बढ़ नहीं सकता.

उत्तर कोरियाई अधिकारियों ने व्यापार मेले की शुरूआत करते हुए कहा कि हिस्सा लेने वाले देशों के लिए यह व्यापार, आर्थिक सहयोग के साथ ही विज्ञान और तकनीक को बढ़ाने का एक मौका है. हालांकि यह भी सच है कि देश में कारोबारी मौके तलाश रही कंपनियों को बहुत संभल संभल कर चलना होगा.

उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार और मिसाइल कार्यक्रम की वजह से लगे प्रतिबंध हर तरह के संयुक्त उपक्रमों और ज्यादातर कारोबार पर रोक लगाते हैं. विदेशी कंपनियां इससे पहले कह चुकी हैं कि वो सिर्फ उस वक्त के लिए जमीन तैयार कर रही हैं जब देश पर से प्रतिबंध उठा लिए जाएंगे.

केसीएनए का कहना है कि कंपनियों ने जिन चीजों की नुमाइश लगाई है उनमें, धातु, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, बिल्डिंग मटीरियल, परिवहन, जन स्वास्थ्य, प्रकाश उद्योग और खाने पीने की चीजों के साथ ही उपभोक्ता सामान मौजूद हैं. सरकारी मीडिया में आई इस कार्यक्रम की तस्वीरों के साथ ही सोशल मीडिया पर भी कुछ चीजें दिख रही है. इनमें हेल्थ सप्लीमेंट, फ्लैट स्क्रीन वाले टेलीविजन, हैंडबैग, एयर कंडीशनर, हीटर, कपड़े, रसोई के उपकरणों और उत्तर कोरियाई ब्रैंड के एसयूवी भी देखे जा सकते हैं. 

ब्रिटेन में उत्तर कोरिया के राजदूत कॉलिन क्रुक्स ने ट्वीटर पर लिखा है, "उत्तर कोरिया की घरेलू और कई आयातित चीजों की एक बड़ी श्रृंखला यहां मौजूद है. ज्यादातर विदेशी कंपनियां चीन की हैं." प्योंगयांग में रूस के दूतावास ने कुछ तस्वीरें फेसबुक पर डाली हैं जिनमें रूसी राजदूत रूस की दवाइयों के साथ नजर आ रहे हैं. पिछले साल उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने कूटनीतिक कोशिशें शुरू की थीं ताकि प्रतिबंधों को हटाने पर बातचीत हो सके और अर्थव्यवस्था में सुधार हो.

किम जोंग उन के शासन में उत्तर कोरिया में निजी बाजारों और उपभोक्तावाद का उभार दिख रहा है लेकिन उस पर कड़ा राजनीतिक और आर्थिक नियंत्रण है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के साथ उनकी दूसरी मुलाकात बीच में ही ख्तम हो गई. अमेरिका का कहना था कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने की दिशा में इतना आगे नहीं आ रहा कि उस पर से प्रतिबंधों का कसाव कम किया जाए. उसके बाद से उत्तर कोरिया ने जाहिर किया है कि बातचीत रुकने की वजह से उसकी निराशा बढ़ रही है और तनाव भी.

उत्तर कोरिया में सत्ताधारी पार्टी के अखबार में पहले पन्ने पर सोमवार को एक कमेंट्री भी छपी था जिसमें कहा गया कि प्रतिबंध आर्थिक मुश्किलें पैदा करने के लिए लगाए गए हैं. साथ ही यह चेतावनी भी दी गई कि उत्तर कोरियाई लोग प्रतिबंधों के हटने पर निर्भर ना करें.

सरकारी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों का कहना है कि देश में भयानक सूखा पड़ा है और पैदावार बहुत कम हुई है. ऐसे में उत्तर कोरिया के एक करोड़ से ज्यादा लोगों पर भोजन का संकट मंडरा रहा है.

एनआर/एए(रॉयटर्स)

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