पेड़ पर टेबल लगाए बैठे डोमिनिक | मंथन | DW | 26.07.2013
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मंथन

पेड़ पर टेबल लगाए बैठे डोमिनिक

डोमिनिक विलकॉक्स बहुत रचनात्मक डिजाइनर हैं. वे चार दीवारी में सोच नहीं पाते इसलिए अक्सर अपनी पसंदीदा जगह पर चले जाते हैं. बाहर. जहां वे अपने आयडिया डिजाइन करते हों.

उनकी पसंद की ये जगह पेड़ है. डोमिनिक को ये जगह इतनी पसंद है कि कम्फर्ट के लिए उन्होंने एक टेबल भी बना ली है.

लंदन के सेंट जॉन म्यूजियम में डोमिनिक की नवीनतम खोजें देखी जा सकती हैं. एक स्टीरियो सिस्टम जिसे लैंपशेड के ऊपर लगा कर चलाया जा सकता है.

इस आयडिया पर डोमिनिक विलकॉक्स लंबे रास्ते से पहुंचे, एक प्रदर्शनी प्रोजेक्ट के जरिए. चार कलाकारों को एक एक ऑबजेक्ट बनाना था जो एक दूसरे से जुड़ा हो. पहले को स्टेथेस्कोप मिला जिससे यह लैंप बना. उसे बाद डोमिनिक की बारी आई. "मुझे ये लाइट दिया गया. मुझे नहीं पता कि इसे किसने डिजाइन किया था. मैंने बॉक्स खोला और इसमें लाइट थी. मुझे इससे प्रेरणा लेकर कुछ नया बनाना था. तो मैंने छत के लाइट के बारे में सोचा, कि हम सॉकेट में बल्ब ही क्यों लगाते हैं. आप टीवी, माइक्रोवेव, टोस्टर ले सकते हैं और इसमें जोड़ सकते हैं. लेकिन मैं ड्राइंग रूम में म्यूजिक लाना चाहता था और लाइट सॉकेट में भी."

वैसे आयडिया तो बहुत अच्छा है. लैंप की बजाए सॉकेट में लगा हुआ रेडियो. सेलिंग प्वाइंट. लेकिन डिजाइन एक्सक्वीज के क्यूरेटर फ्लोरियान डुसोप्ट का कुछ और कहना है, "इसे बाजार के लिए नहीं बनाया जाएगा. लेकिन यह दूसरे डिजाइनरों को बहुत प्रभावित करेगी जो कुछ बनाते हैं. वे कहेंगे. ओह, यह तो बहुत अजीब है. लेकिन आखिरकार यह उतना अजीब भी नहीं. अगर मैं किसी होटल के बार का डिजाइनर होता. अगर इसमें आप कुछ मजा लाना चाहते हैं तो आप आसानी से कुछ रोचक चीजें यहां लगा सकते हैं.. इससे आपके चेहरे पर मुस्कान आ जाएगी."

Dominic Wilcox

लैंप पर बल्ब नहीं रेडियो

डोमिनिक विलकॉक्स की डिजाइनों को देख कर कोई भी खुश हो जाता है. वह प्रेरणा सड़कों पर, कैफे में ढूंढते हैं. कुछ भी जो दुनिया की नजरों में उपयोगी होता है उन्हें पसंद नहीं आता. वे कहते हैं, "मैं आयडिया पर, कंसेप्ट पर ध्यान देता हूं, कल्पना पर. अगर वह किसी के दिमाग के है तो मेरे लिए काफी है. मैं ऐसा कुछ बनाता हूं जो कहानी कहे. और अगर वह कहानी कही जाए तो वह लंबे समय के लिए दिमागों में बस जाती है. मेरे लिए ये काफी है."

डोमिनिक विलकॉक्स पुरानी रोजमर्रा की चीजों को नए तरीके से देखते हैं और उन्हें नया आयाम देते हैं. उनकी बनाई चीजें क्या हैं, कला, डिजाइन या फिर खोज. "यह कला, डिजाइन, शिल्प और खोज के बीच की दुनिया है. खोजकर्ता होने के कारण मैं अपने काम में लगा रहता हूं. मैं रचनात्मकता, खोज और अचंभे की तलाश में रहता हूं."

और इन्हीं सब का मेल इन जूतों में है. सोल के नीचे ये जूते खास हैं. इतने कि ये पहनने वाले को घर का सही रास्ता भी बता देते हैं. "पहला ख्याल मुझे द विजार्ड ऑफ ओज की डोरोथी का आया. कि उसने लाल रंग की स्लिपर पहनी होती है. जब वह दोनों स्लीपरों की हील मिलाती है तो तुरंत अपने घर कैंसस पहुंच जाती हैं. जादुई जूते. मैंने सोचा क्या इन्हें आधुनिक तकनीक के साथ नहीं बनाया जा सकता." तो उन्होंने जूते में जीपीएस सिस्टम लगा दिया.

लक्ष्य प्रोग्राम करने के बाद जूते के चमकने वाले डायोड जूता पहनने वाले को सही रास्ता बता देते हैं. भले ही वह झुमरी तलैया ही क्यों न हो.

Dominic Wilcox

जीपीएस वाले जूते

डोमिनिक विलकॉक्स जोर देते हैं कि चाहे जैसा आयडिया आए भले ही बेतुका हो. उसे बना लेना चाहिए क्योंकि "यही बेतुका आयडिया, जो आज ऐसा लग रहा है किसी और दिशा में ले जाएगा. जिसके बारे में आपने पहले सोचा भी नहीं होगा. इससे नए और नए आयडिया निकलेंगे. आखिर में आप ऐसी जगह पहुंच जाएंगे जो आपके शुरुआती आयडिया से बिलकुल अलग होगा. जो और रोचक होगा."

भले ही पता नहीं हो कि अजीब से आयडिया का अंत क्या होगा. लेकिन डोमिनिक विलकॉक्स के आयडिया हैं एक से एक शानदार...

रिपोर्टः निखिल रंजन

संपादनः आभा मोंढे

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