पेंटागन ले रहा है मोसुल में इराकी सेना की जीत का श्रेय | दुनिया | DW | 10.07.2017
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दुनिया

पेंटागन ले रहा है मोसुल में इराकी सेना की जीत का श्रेय

इराक के मोसुल में सरकारी सेना की आईएस पर जीत केवल उनके लिए ही नहीं बल्कि इराक में अमेरिका की रणनीतिक जीत का पल भी है. इसे पेंटागन अधिकारी बीते तीन सालों की अमेरिकी ट्रेनिंग का नतीजा बता रहे हैं.

इराक और सीरिया में इस्लामिक स्टेट से लड़ रही अमेरिकी नेतृत्व वाली सेनाओं के लिए एक जैसी ही रणनीति अपनायी गयी. वहां बड़ी संख्या में अमेरिकी सेना को उतारने के बजाए आईएस पर दोतरफा वार किया जा रहा है. एक तरफ, उन पर लगातार हवाई हमले किये गये और दूसरी तरफ, जमीनी लड़ाई लड़ रही सेनाओं को ट्रेनिंग और सलाह मुहैया करायी गयी. पेंटागन के अधिकारी इराक के मोसुल में इराकी सेना को मिली जीत को इसी दोतरफा रणनीति की सफलता बता रहे हैं.

इराकी सेना में आये बदलावों को समझने के लिए मई 2015 में पेंटागन के तत्कालीन प्रमुख ऐश्टन कार्टर के इस बयान को देखें, जब उन्होंने कहा था कि इराकी सेना में "युद्ध का जज्बा ही नहीं दिखता." सन 2008 से 2011 के बीच भी इराकी सेना को अमेरिकी ट्रेनिंग मिली थी, लेकिन वह ज्यादातर विद्रोहियों को संभालने पर केंद्रित थी ना कि किसी तेजी से फैलती जिहादी सेना को. मोसुल पर जीत के बाद पेंटागन अधिकारी ने टिप्पणी की, "हमें तब ऐसी सेना की जरूरत थी जो पारंपरिक युद्ध कर सके."

2014 में जब तथाकथित इस्लामिक स्टेट ने मोसुल पर हमला किया, तब इराक के प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी के नेतृत्व वाली सरकार में सेना काफी कमजोर हालत में थी. इराकी सेनाएं आईएस लड़ाकों को लड़ाई में टक्कर नहीं दे पायीं. अपने मोर्चे छोड़कर पीछे हटती गयी सेनाएं कई बार अमेरिका से मिले हथियारों और वाहनों को भी अपने पीछे छोड़ आयी थीं.

अब तीन साल बाद एक बार फिर इराकी सेना ने मोसुल पर कब्जा कर लिया है. यह आतंकी गुट आईएस के खिलाफ इराक की आज तक की सबसे बड़ी जीत है. इराक के प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी ने खुद मोसुल जाकर शहर को आईएस के चंगुल से छुड़ाने के अभियान के पूरे होने की आधिकारिक घोषणा की.

इराक में आईएस से लड़ने के लिए बड़ी संख्या में अमेरिकी सेना को ना उतारने का फैसला आंशिक रूप से 2003 के इराक युद्ध के अनुभव से प्रभावित था. इसमें अमेरिकी सेना के 4,400 लोग मारे गये थे. इससे चिंतित अमेरिकी जनता नहीं चाहती थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति एक बार फिर अमेरिकी सेना की बड़ी टुकड़ियां वहां तैनात करते. तब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने युद्धग्रस्त इलाकों में हवाई हमले करने के साथ साथ जमीनी युद्ध के लिए एक नई नीति विकसित की. इस नीति को पेंटागन में "बाइ, विद एंड थ्रू" नाम दिया गया, जिसका मकसद स्थानीय सेनाओं को प्रशिक्षित करना था.

इस रणनीति की मदद से 2015 के अंत तक इराकी सेनाओं ने पारंपरिक युद्ध कर रामादी शहर को आईएस से आजाद करा लिया और अब मोसुल को आईएस-मुक्त कर लिया है. अक्टूबर 2017 से ही मोसुल से आईएस का कब्जा हटाने के लिए युद्ध जारी था. इन संघर्षों में अब तक इराक के हजारों सैनिक मारे गये हैं. जबकि 2014 से इराक और सीरिया में शुरु हुए इस युद्ध में अब तक केवल 11 अमेरिकी सैनिकों की जान गयी है. अमेरिका सीरिया में भी आईएस के खिलाफ लड़ने से लिए कुर्द-अरब अलायंस को तैयार कर रहा है और अफगानिस्तान में भी तालिबान से निपटने के लिए वहां अफगान सुरक्षा बलों को ट्रेनिंग दे रहा है.

आरपी/एनआर (एएफपी)

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