पूर्व गृह राज्य मंत्री चिन्मयानंद गिरफ्तार, रेप केस में अदालत ने जेल भेजा | भारत | DW | 20.09.2019
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भारत

पूर्व गृह राज्य मंत्री चिन्मयानंद गिरफ्तार, रेप केस में अदालत ने जेल भेजा

शाहजहांपुर के एक लॉ कॉलेज की लड़की के साथ रेप के आरोपों से घिरे स्वामी चिन्मयानंद को शुक्रवार सुबह एसआईटी की टीम ने उनके आश्रम से गिरफ्तार किया. आरोप लगाने वाली छात्रा ने गिरफ्तारी नहीं होने पर आत्मदाह की धमकी दी थी.

भारतीय जनता पार्टी के तीन बार सांसद रह चुके स्वामी चिन्मयानंद को कई दिनों की ऊहापोह के बाद शुक्रवार को सुबह आठ बजे एसआईटी ने गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार करके उन्हें 14 दिन के लिए जेल भेजा गया है. चिन्मयानंद की गिरफ्तारी के बाद उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने बताया कि चिन्मयानंद के खिलाफ रेप का मामला दर्ज किया गया है. इससे पहले पीड़ित पक्ष बार-बार ये अपील करता रहा लेकिन अब तक रेप का केस दर्ज नहीं हुआ था. यहां तक कि पीड़ित लड़की ने दो दिन पहले इस संबंध में एसआईटी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए थे. मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद किया था.

इससे पहले शाहजहांपुर पुलिस ने छात्रा के अपहरण और धमकाने का मामला दर्ज किया था. एसआईटी पिछले कई दिनों से शाहजहांपुर के मुमुक्षु आश्रम में चिन्मयानंद से पूछताछ कर रही थी. इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भी ले जाया गया था. बताया जाता है कि डॉक्टरों ने उन्हें लखनऊ रेफर किया था लेकिन चिन्मयानंद ने आश्रम में ही रहकर इलाज कराने की इच्छा जताई थी.

दूसरी ओर छात्रा और उसके परिवार वाले लगातार ये आरोप लगाते रहे हैं कि उन्हें प्रशासन की तरफ से सहयोग नहीं मिल रहा है. परिवार वालों का कहना था कि शासन और प्रशासन के दबाव के चलते ही तमाम सबूत देने के बावजूद चिन्मयानंद के खिलाफ रेप का केस दर्ज नहीं किया गया. इसे लेकर राजनीतिक दलों ने भी सरकार को घेरा था. लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में आने के बाद से एसआईटी ही जांच कर रही थी.

इस बीच, इस मामले में कुछ ऐसे वीडियो फुटेज भी सामने आए थे जिनमें स्वामी चिन्मयानंद कथित तौर पर किसी लड़की से मसाज कराते और कुछ अश्लील बातें करते हुए दिख रहे थे. पीड़ित लड़की का दावा था कि वीडियो में दिख रही लड़की वही है और चिन्मयानंद पिछले एक साल से उसका यौन शोषण कर रहे हैं.

हालांकि इस मामले में एक दूसरा वीडियो भी वायरल हुआ जिसमें चिन्मयानंद से कथित तौर पर पांच करोड़ की फिरौती मांगने संबंधी बातचीत है. पुलिस ने फिरौती मामले में भी एक केस दर्ज कर रखा है जिसे चिन्मयानंद के प्रवक्ता और वकील ओम सिंह की शिकायत पर दर्ज किया गया था.

पिछले महीने लड़की के पिता की शिकायत पर शाहजहांपुर पुलिस ने स्वामी चिन्मयानंद और अन्य लोगों के खिलाफ अपहरण और धमकाने का मामला दर्ज किया था. हालांकि लड़की के पिता का कहना था कि उन्होंने उस वक्त भी लड़की के साथ रेप की शिकायत की थी लेकिन तब जिलाधिकारी और कुछ अन्य लोगों के दबाव में उसे दर्ज नहीं किया गया था. लेकिन कुछ वकीलों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का खुद संज्ञान लिया और उत्तर प्रदेश सरकार को जांच के लिए एसआईटी बनाने का निर्देश दिया.

बीजेपी के पूर्व सांसद स्वामी चिन्मयानंद अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में गृह राज्य मंत्री रह चुके हैं और राम मंदिर आंदोलन के बड़े नेताओं में शुमार रहे हैं. शाहजहांपुर में उनका आश्रम है और वो कई शिक्षण संस्थाओं के प्रबंधन से भी जुड़े हैं. एसएस लॉ कॉलेज भी इसी आश्रम के तहत संचालित होता है जिसमें पीड़ित लड़की एलएलएम के द्वितीय वर्ष में पढ़ती थी.

स्वामी चिन्मयानंद यूं तो उत्तर प्रदेश के गोंडा ज़िले के रहने वाले हैं और उनका असली नाम कृष्णपाल सिंह है. उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और बाद में हरिद्वार जाकर संन्यास ले लिया. बताया जाता है कि अस्सी के दशक में वो शाहजहांपुर आ गए और स्वामी शुकदेवानंद के शिष्य बन गए. स्वामी शुकदेवानंद ने ही शाहजहांपुर में मुमुक्षु आश्रम की स्थापना की थी. स्वामी शुकदेवानंद ने मुमुक्षु आश्रम के अलावा हरिद्वार और ऋषिकेश में परमार्थ निकेतन नाम से भी आश्रम बनाए थे जिनमें से हरिद्वार वाला आश्रम भी चिन्मयानंद के ही अधीन है.

मुमुक्षु आश्रम के अधिष्ठाता होने के नाते चिन्मयानंद की संत समाज से नज़दीकियां बढ़ीं और इसी क्रम में गोरखपुर के महंत अवेद्यनाथ के संपर्क में भी वो आ आए और उनके करीबी हो गए. नब्बे के दशक में राम मंदिर आंदोलन में महंत अवेद्यनाथ के साथ उन्होंने सक्रिय भागीदारी की और देखते ही देखते आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए. यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें लोकसभा का टिकट दिया बल्कि वो अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में देश के गृह राज्य मंत्री भी बने.

दिलचस्प बात ये है कि शाहजहांपुर से चिन्मयानंद कभी राजनीतिक सफलता हासिल नहीं कर पाए. साल 1991 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पहली बार उन्हें बदायूं सीट से टिकट दिया और वो चुनाव जीत गए. 1996 में उन्होंने बीजेपी के ही टिकट पर शाहजहांपुर से चुनाव लड़ा और हार गए लेकिन 1998 में में मछलीशहर और 1999 में जौनपुर से उन्होंने फिर जीत दर्ज की.

महंत अवेद्यनाथ से नजदीकी की वजह से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी उनके करीबी रिश्ते हैं. मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ शाहजहांपुर के मुमुक्षु आश्रम भी गए थे जबकि उस वक्त चिन्मयानंद एक महिला के साथ कथित रेप के मुकदमे का सामना कर रहे थे. उस वक्त एक ऐसा वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमें शहर के कई अधिकारी चिन्मयानंद की आरती उतार रहे थे.

आठ साल पहले शाहजहांपुर की ही एक अन्य महिला ने भी स्वामी चिन्मयानंद पर यौन शोषण और उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया था. आरोप लगाने वाली महिला स्वामी चिन्मयानंद के ही आश्रम में रहती थी. राज्य में बीजेपी की सरकार बनने के बाद सरकार ने इस मुकदमे को वापस ले लिया था लेकिन पीड़ित महिला ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी और कोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले पर स्टे लगा दिया.

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