पुलिस में भर्ती के लिए कौमार्य परीक्षण | दुनिया | DW | 30.11.2014
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दुनिया

पुलिस में भर्ती के लिए कौमार्य परीक्षण

इंडोनेशिया में महिला पुलिसकर्मियों की भर्ती से पहले उनका कौमार्य परीक्षण किया जाता है. जिसका हाल में कुछ अधिकारियों ने विरोध किया. ह्यूमन राइट्स वॉच ने "वर्जिनिटी टेस्ट" की कड़ी निंदा की है.

ह्यूमन राइट्स वॉच ने हाल में छपी रिपोर्ट में कहा कि इंडोनेशियाई सरकार महिलाओं के साथ ऐसा करके राष्ट्रीय पुलिस विभाग में उनकी भर्ती में लैंगिक भेदभाव का रवैया अपना रही है. इस टेस्ट से गुजर चुकी छह शहरों की महिला पुलिसकर्मियों से बात करने के बाद रिपोर्ट में इस प्रक्रिया को दर्दनाक और धक्का पहुंचाने वाला करार दिया गया है.

भर्ती की प्रक्रिया के शुरुआती चरणों में शारीरिक परीक्षण के नाम पर वर्जिनिटी टेस्ट टेस्ट किया जाता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस टेस्ट में यह जानने के लिए कि आवेदक का कौमार्य बरकरार है या नहीं, टू फिंगर टेस्ट का तरीका भी अपनाया जाता है.

ह्यूमन राइट्स वॉच के लिए काम करने वाले इंडोनेशियाई रिसर्चर आंद्रियास हारसोनो ने डॉयचे वेले को बताया कि पुलिस विभाग के कुछ डॉक्टरों के मुताबिक यह टेस्ट आवेदक की नैतिकता परखने के लिए किया जाता है. हारसोनो के साथ इंटरव्यू के कुछ अंश...

Andreas Harsono Human Rights Watch

इंडोनेशियाई रिसर्चर आंद्रियास हारसोनो

डीडब्ल्यू: इंडोनेशियाई पुलिस अभी तक कौमार्य परीक्षण किस लिए कर रही है?

आंड्रियास हारसोनो: कौमार्य परीक्षण पिछले काफी समय से किया जाता रहा है. हमने एक सेवानिवृत्त महिला पुलिस अधिकारी से बात की जिन्होंने बताया कि 1965 में जब उनकी भर्ती हुई तो उनका भी कौमार्य परीक्षण किया गया था. उन्होंने यह भी बताया कि इसके खिलाफ 1980 और 1990 के दशक में भी महिला पुलिसकर्मियों ने आवाज उठाई थी.

2009 में राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख ने एक नया रास्ता निकाला. पुलिसकर्मियों के लिए स्वास्थ्य जांच के दिशानिर्देश जारी किए गए. इसके मुताबिक महिला पुलिस अकादमी की आवेदकों के लिए प्रसूति जांच का प्रावधान रखा गया. लेकिन इसमें वर्जिनिटी टेस्ट करने की बात कहीं नहीं कही गई.

लेकिन पुरानी आदतें बड़ी मुश्किल से बदलती हैं. पुलिस विभाग और स्वास्थ्य सेंटर के डॉक्टर ही यह टेस्ट कर देते हैं. कई पुलिस अधिकारी तो यह भी कहते हैं कि उन्हें अपने यहां यौनकर्मी नहीं चाहिए. इसीलिए उन्होंने टू फिंगर टेस्ट को बनाए रखा है ताकि महिला के कौमार्य का ठीक पता चल सके.

डीडब्ल्यू: इस टेस्ट का महिलाओं की भर्ती पर क्या असर पड़ता है?

आंड्रियास हारसोनो: जरूरी नहीं है कि जो इस टेस्ट में फेल हो जाएं उन्हें निकाल ही दिया जाए. लेकिन सभी महिलाएं इस टेस्ट को दर्दनाक और सदमे जैसा मानती हैं. महिला अधिकारियों के लिए काम करने वाली संस्था नूरानी पेरेम्पुआं के मुताबिक पश्चिम सुमात्रा के पडांग शहर की कुछ महिला पुलिसकर्मियों ने बताया कि उन्हें यह टेस्ट कराने के बाद बेहद अफसोस हुआ. उन्हें धक्का लगा कि इस बात पर विश्वास नहीं किया जाता कि वे "अच्छी महिलाएं" हैं जो अपना काम कुशलता पूर्वक कर सकती हैं.

लेकिन हम ऐसे पुलिसकर्मियों से भी मिले जो इस टेस्ट को अपनी जगह सही मानती हैं. उन्हें कौमार्य बरकरार रहने पर गर्व है. वे अपनी उन साथियों से नाराज भी होती हैं जो इस टेस्ट के खिलाफ आवाज उठा रही हैं.

डीडब्ल्यू: अगर कोई इस टेस्ट को कराने से इनकार कर दे तो क्या होता है?

आंड्रियास हारसोनो: हम ऐसे किसी से नहीं मिले जिसने यह टेस्ट करवाने से मना किया हो. हालांकि ज्यादातर आवेदक हैरान जरूर हुए जब उन्हें पता चला कि भर्ती के लिए उनके शरीर के गुप्तांगों तक के परीक्षण किए जाते हैं. एक सदस्य ने बताया कि अगर उसने टेस्ट करवाने से इनकार कर दिया होता तो उसे सीधे तौर पर भर्ती की प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया होता.

डीडब्ल्यू: जो महिलाएं कौमार्य टेस्ट में फेल हो जाती हैं उनका क्या होता है?

आंड्रियास हारसोनो: उन्हें बताया नहीं जाता है. राष्ट्रीय पुलिस विभाग खून की जांच, एक्स रे से लेकर बाकी सभी टेस्टों में मिले अंकों के आधार पर नतीजे घोषित करता है. देखा जाता है कि सभी टेस्टों में मिलाकर उनके कुल अंक कितने हैं. अगर कुल अंक कम होते हैं तो उन्हें स्वीकार नहीं किया जाता.

इंडोनेशियाई पुलिस के कानूनी विभाग के महानिरीक्षक जनरल मुखगियार्तो के मुताबिक वे भर्ती हो रही पुलिसकर्मियों के वर्जिनिटी टेस्ट के जरिए उनका नैतिक मूल्यांकन करना चाहते हैं. उन्होंने कहा, "अगर वह एक यौनकर्मी निकली तो हम उसे इस नौकरी के लिए कैसे स्वीकार सकते हैं?" उनका ये बातें स्वीकार करना इस बात का प्रमाण है कि आज भी वर्जिनिटी टेस्ट इंडोनेशिया में पुलिस विभाग में भर्ती का अहम हिस्सा है.

डीडब्ल्यू: क्या इस टेस्ट को खत्म करने की कोई योजना है?

आंड्रियास हारसोनो: राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख जनरल सुतरमान का दावा है कि अब कौमार्य परीक्षण नहीं किए जा रहे हैं. लेकिन मेरे ख्याल में उन्हें अपने इस बयान को लिखित रूप में देना चाहिए.

आंद्रियास हारसोनो 2008 से ह्यूमन राइट्स वॉच के लिए काम कर रहे हैं.

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