पुलिस ने जिग्नेश, खालिद का सम्मेलन रोका | दुनिया | DW | 05.01.2018

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दुनिया

पुलिस ने जिग्नेश, खालिद का सम्मेलन रोका

महाराष्ट्र बंद के दौरान हिंसा के बाद गुजरात के दलित विधायक जिग्नेश मेवाणी और जेएनयू के छात्र नेता उमर खालिद की मौजूदगी में होने वाले सम्मेलन पर पुलिस ने रोक लगा दी है.

मुंबई पुलिस ने गुरुवार सुबह विले पार्ले स्थित भाईदास हॉल को अपने कब्जे में ले लिया, जहां वामपंथी रुझान वाले छात्र संगठन छात्र भारती का अखिल भारतीय सम्मेलन होना था. इस सम्मेलन को जिग्नेश और खालिद संबोधित करने वाले थे. गुजरात की राजनीति में दलित चेहरे के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले और राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के संयोजक मेवाणी पिछले महीने हुए गुजरात चुनाव में बतौर निर्दलीय उम्मीदवार निर्वाचित हुए हैं.

पुलिस ने निर्धारित सम्मेलन को मुंबई में धारा 144 लागू होने का हवाला देते हुए रद्द कर दिया. गौरतलब है कि बुधवार को राज्यव्यापी बंद के दौरान हुई हिंसा में नांदेड़ में 16 वर्षीय एक छात्र की मौत हो गई थी.

महाराष्ट्र में हिंसा, क्यों भड़का दलित समुदाय

पुलिस के कदम का विरोध कर रहे छात्र भारती के सदस्यों ने अक्रामक आंदोलन किया और सरकार विरोधी नारे लगाए. साथ ही उन्होंने आयोजन स्थल के बाहर बैठने का प्रयास किया. कई सदस्य बाहर के मुख्यमार्गों पर भागते हुए दिखाई दिए. पुलिस को ललकारते हुए कुछ सदस्यों ने हॉल में घुसने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें बाहर खदेड़ दिया. कुछ को हिरासत में लेकर पुलिस की गाड़ी में डाल दिया गया.

ली गयी थी अनुमति

महाराष्ट्र के एक विधायक कपिल पाटील ने कहा कि कई लड़कियों समेत 800 छात्रों और प्रतिनिधियों को पुलिस की गाड़ी में डाल दिया गया और उन्हें विभिन्न पुलिस थाने ले जाया गया, जहां उन्हें कई घंटों तक हिरासत में रखा गया. पाटील ने मीडिया को बताया, "पुलिस भाजपा-शिवसेना सरकार के इशारे पर काम कर रही है और छात्रों की आवाज को दबा रही है, क्योंकि ये छात्र जो सवाल उठा रहे हैं, उसका जवाब फासीवादी सरकार के पास नहीं है." हिरासत में लिए गए छात्रों को छोड़ने की मांग करते हुए कई छात्रों ने जुहू पुलिस थाने के बाहर बैठकर सरकार विरोधी नारे लगाए.

छात्र भारती के उपाध्यक्ष सागर भालेराव ने कहा कि दिनभर चलने वाले सम्मेलन की योजना बहुत दिनों पहले बनाई गई थी. प्रशासन से इसकी अनुमति ली गई थी, लेकिन शुरू होने से पहले अनुमति रद्द कर दी गयी. इस सम्मेलन में और भी प्रसिद्ध हस्तियों को आमंत्रित किया गया था.

मेवाणी और खालिद के खिलाफ एफआईआर

दूसरी तरफ पुणे पुलिस ने मेवाणी और खालिद के खिलाफ 31 दिसंबर को शनिवारवाड़ा में एक बैठक के दौरान कथित रूप से समुदायों के बीच भावनाएं भड़काने के आरोप में एफआईआर भी दर्ज की है. यह प्राथमिकी पुणे के 22 वर्षीय छात्र अक्षय बिक्कड़ की शिकायत पर दर्ज की गयी है. बिक्कड़ ने कहा कि 31 दिसंबर को आयोजित एक बैठक में मेवाणी और खालिद ने कथित रूप से भड़काऊ भाषण दिए, जो सुमदायों के बीच गलतफहमी बढ़ा सकते हैं. उसने अपनी शिकायत में भाषणों के आपत्तिजनक अंश भी दिए.

शिकायत में कहा गया है कि यह "भड़काऊ भाषण समुदायों के बीच दुश्मनी और खाई को बढ़ा सकते हैं" और "इसी उकसावे के कारण भीमा-कोरेगांवा स्थित विजय स्तंभ पर कुछ अज्ञात बदमाशों ने हमला कर दिया, नतीजन एक जनवरी को दंगे और आगजनी हुई." वहीं छात्र भारती का आरोप है कि हिंदू एकता महासभा के कार्यकर्ताओं ने हमला किया.

आईएएनएस/आईबी

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