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तस्वीर: picture-alliance/dpa

पीएम कार्यालय पर 'कोलगेट' की कालिख

४ सितम्बर २०१२

कोयला घोटाले की कालिख प्रधानमंत्री कार्यालय के पर जमती दिखाई दे रही है. देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई ने घोटाले के सिलसिले में पांच कंपनियों पर छापेमारी की है. सीबीआई ने इन कंपनियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की है.

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विपक्षी पार्टी बीजेपी ने कोयला घोटाले की तुलना बोफोर्स घोटाले से करते हुए इसके खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाने का ऐलान किया है. पहले ये भी कयास लगाया जा रहा था कि बीजेपी के सभी सदस्य ऊपरी सदन (राज्यसभा) से इस्तीफा दे सकते हैं ताकि सरकार को मध्यावधि चुनाव के लिए मजबूर किया जा सके.

सीबीआई ने 5 कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज करते हुए देश भर में 10 शहरों में छापे मारे. अधिकारियों के खिलाफ भी अनियमितता बरतने, साजिश रचने और धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए गए हैं. ये पहली बार है जब कोयला घोटाले विवाद के बीच जांच एजेंसी ने किसी तरह की कार्रवाई की है. जिन कंपनियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं उनमें विन्नी आयरन स्टील, जेएलडी यवतमाल एनर्जी, जस इंफ्रास्ट्र्क्चर और एमआर आयरन एंड स्टील प्रमुख हैं. सीबीआई ये जांच करने में जुटी है कि कहीं कुछ कंपनियों को सिर्फ कोयला आवंटन हासिल करने के लिए तो नहीं बनाया गया था. एक बार आवंटन हासिल हो जाने के बाद फिर उसे कई गुना लाभ पर बेंच दिया गया.

इससे पहले कैग (महालेखा परीक्षक) ने भी अपनी रिपोर्ट में कोयला खदानों के आवंटन में अनियमितता का आरोप लगाया था. कैग के मुताबिक नियमों का पालन न करने और अधिकारियों के भ्रष्टाचार की वजह से सरकारी खजाने को हजारों करोड़ का नुकसान हुआ है. हालांकि कैग ने अपनी रिपोर्ट में प्रधानमंत्री का नाम नहीं लिया था जबकि विपक्ष का आरोप है कि घोटाले में प्रधानमंत्री का कार्यालय भी शामिल है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह घोटाले में किसी तरह का हाथ होने से पहले ही इनकार कर चुके हैं. उनका कहना है कि 2004 और 2009 में एक सरकारी पैनल द्वारा जिन 142 कोयला खदानों का आवंटन किया गया उमसें किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है.

वीडी/एएम (एएफपी, रॉयटर्स)

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