पाक पीएम को सुप्रीम कोर्ट ने दिया टाइम | दुनिया | DW | 27.08.2012

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दुनिया

पाक पीएम को सुप्रीम कोर्ट ने दिया टाइम

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने देश के नए प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ को राष्ट्रपति जरदारी के मामले में कार्रवाई के लिए और समय दिया है. वे सोमवार को सर्वोच्च अदालत में पेश हुए.

सु्प्रीम कोर्ट ने परवेज अशरफ को राष्ट्रपति जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच करने का आदेश देने का निर्देश दिया था. इस मामले के कारण सरकार और पाकिस्तान की अदालत के बीच काफी समय से तनाव जारी है. अदालत की अगली सुनवाई अब 18 सितंबर को होगी.

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अशरफ को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस दौरान स्विस अधिकारियों को पत्र लिख कर जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला फिर से शुरु करने के लिए कहा जाए. जस्टिस आसिफ खोसा ने कहा कि जरूरी नहीं कि प्रधानमंत्री खुद यह पत्र लिखें इसके लिए वह किसी को कह सकते हैं. अशरफ ने कहा, "मैं इस मुद्दे को हल करने का पूरी गंभीरता के साथ प्रयास करूंगा ताकि सर्वोच्च अदालत की गरिमा और सम्मान बना रहे."

अशरफ से पहले प्रधानमंत्री रहे यूसुफ रजा गिलानी को अदालत की अवमानना का दोषी करार दिया गया था और इसलिए वह प्रधानमंत्री पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिए गए थे. अगर अशरफ के साथ भी ऐसा होता है तो पाकिस्तान पीपल्स पार्टी को नया प्रधानमंत्री चुनना होगा. बहुमत होने के कारण उसके लिए ऐसा करना मुश्किल नहीं है. लेकिन लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक अस्थिरता विकास कार्यों और नीतियों के लिए बाधा साबित होगी और सरकार को लोगों में और अप्रिय बनाएगी.

2007 में पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ के बनाए क्षमादान कानून के तहत राजनीतिज्ञों और अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले खारिज कर दिए गए थे. इसी क्षमादान के कारण आसिफ अली जरदारी और बेनजीर भुट्टो का देश लौटना संभव हुआ था. दो साल बाद पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को अवैध घोषित कर दिया था.

तब तक आसिफ अली जरदारी राष्ट्रपति बन चुके थे और स्विस अधिकारियों ने उनके खिलाफ काले धन सं संबंधित जांच बंद कर दी. लेकिन अदालत ने जरदारी के खिलाफ उस मामले को फिर से शुरू करवाने के लिए स्विस अधिकारियों को पत्र लिखने के आदेश भी दिए.सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक स्विस अधिकारियों को पत्र नहीं लिखा और दलील दी कि राष्ट्रपति होने के कारण उन्हें मुकदमे से छूट का विशेषाधिकार है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस दलील को नहीं मान रही है.

एएम/एमजे (रॉयटर्स, एएफपी)