पाकिस्तान में फर्जी पायलट लाइसेंस कांड, 262 पायलट बैठे घर | दुनिया | DW | 30.06.2020
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दुनिया

पाकिस्तान में फर्जी पायलट लाइसेंस कांड, 262 पायलट बैठे घर

पाकिस्तान ने कहा है कि वह अपने 262 पायलटों को विमान उड़ाने से रोकेगा, क्योंकि उनकी योग्यता सवालों के घेरे मे है. एक जांच में पता चला है कि इन पायलटों ने या तो परीक्षाओं में नकल की या किसी और से अपने पेपर दिलवाए.

पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस

खस्ताहाल है पाकिस्तान की सरकारी एयरलाइन

पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) फिर विवादों में है. उसके एक तिहाई पायलटों पर संदेह है कि या तो उनके पास फर्जी लाइसेंस है या फिर उन्होंने धोखाधड़ी से लाइसेंस हासिल किया है.

पाकिस्तान के उड्ड्यन मंत्री गुलाम सरवर खान ने बताया है कि जिन पायलटों को विमान उड़ाने से रोका गया है उनमें पीआईए के 141, एयर ब्लू के नौ, सेरेने एयरलाइन के 10 और शाहीन एयरलाइंस के 17 पायलट शामिल हैं. इनमें 109 कमर्शल विमान पायलट हैं जबकि 153 एयरलाइन ट्रांसपोर्ट पायलट.

इस जांच ने पकिस्तान में पायलट लाइसेंस हासिल किए जाने की प्रक्रिया में धांधली की कलई खोल दी है. और फिर इनमें से कुछ पायलट दुनिया भर की विमानन कंपनियों में भी काम करते हैं.

पिछले महीने कराची में हुए विमान हादसे के बाद फर्जी पायलट लाइसेंस का मामला गर्माया है. इस हादसे में कुल 97 लोग मारे गए थे. शुरुआती जांच में पता चला कि पायलटों ने मानक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया और अलार्म्स की अनदेखी की.

खान ने बताया कि 2018 से ही पायलटों और विमानन अधिकारियों की साठगांठ के परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों की जांच हो रही है. उन्होंने बताया कि जिन पायलटों पर आरोप है कि उन्होंने अपने एक या उससे ज्यादा पेपर किसी और से दिलवाए. किसी किसी पायलट ने तो लाइसेंस के लिए जरूरी सभी आठ पेपर ही किसी और से दिलवाए.

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पाकिस्तानी पायलटों की योग्यता से जुड़ी समीक्षा सार्वजनिक होने पर पता चला है कि पाकिस्तान के कुल 860 पायलटों में से 262 के पास फर्जी लाइसेंस हैं.  इसके बाद पीआईए ने कहा कि वह अपने सभी संदिग्ध पायलटों को विमान नहीं उड़ाने देगी. उड्डयन मंत्री ने कहा, "हम एयरलाइंस को फिर से व्यवस्थित करेंगे और साफ सफाई की यह प्रक्रिया इस साल के आखिर तक पूरी हो जाएगी."

वैश्विक शर्मिंदगी या सुधार?

पाकिस्तान में पायलटों की जांच 2018 में एक विमान हादसे के बाद शुरू हुई. पता चला कि उस विमान के पायलट के रिकॉर्ड में लाइसेंस के लिए परीक्षा का जो दिन दर्ज था, उस दिन तो सरकारी छुट्टी थी. इसका मतलब है कि टेस्टिंग हुई ही नहीं और लाइसेंस फर्जी था. इसी का नतीजा था कि 2019 में पीआईए के 16 पायलटों को विमान उड़ाने से रोक दिया गया.

उड्डयन विशेषज्ञ लाइसेंस कांड पर विभाजित हैं. खान का कहना है कि पायलटों को विमान उड़ाने से रोकना का मकसद पाकिस्तान एयरलाइंस उद्योग की साख बहाल करना है और इससे पीआईए को लेकर वैश्विक चिंताओं को दूर करने में मदद मिलेगी.

एक रिटायर्ड एयर फोर्स मार्शल शहजाद चौधरी कहते हैं, "पीआईए ना सिर्फ वित्तीय रूप से बल्कि नैतिक रूप से भी दिवालिया हो गया है. अब पाकिस्तान को तय करना है कि वह विमान दुर्घटनाओं वाली अपनी छवि को बरकरार रखना चाहता है या फिर उसे बदलना चाहता है. मुझे लगता है कि सुधार अच्छा विचार है, ताकि इस संस्थान को बेहतर किया जा सके."

चौधरी ने कहा, "संस्थागत सुधारों से पहले अस्थायी छवि के मुकाबले लोगों की जिंदगियों को खोना कहीं बदतर है. पीआईए में ट्रेनिंग, सोच और नजरिया, कुछ नहीं बचा है."

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दूसरी तरफ कई लोग मानते हैं कि इस पूरी जांच से पाकिस्तान के उड्डयन उद्योग को एक वैश्विक शर्मिंदगी का सामना करना होगा और वे प्रस्तावित सुधारों पर भी संदेह जताते हैं. 2011 तक पीआईए के प्रबंध निदेशक रहे इजाज हारून कहते हैं, "सरकार की तरफ से इस तरह का बयान दिया जाना और विमान उड़ाने से रोके जाने वाले पायलटों की लिस्ट थमा देना संदेहपूर्ण लगता है. इसमें बहुत सारी गलतियां हैं और इससे एक बड़ा संकट पैदा होगा. लोग पीआईए के विमानों में बैठने की सोचेंगे भी नहीं. उन्हें लगेगा कि फर्जी लाइसेंस वाले पायलट विमान उड़ा रहे हैं."

वह कहते हैं, "बड़ी चुनौती पीआईए को फिर से खड़ा करने की है. अगर चालक दल में आत्मविश्वास का स्तर बहुत नीचा हो तो सब कुछ खत्म हो जाता है. यह कदम ताबूत में आखिरी कील साबित होगा."

पायलटों की लिस्ट पर संदेह

दूसरी तरफ पाकिस्तान एयर लाइन पायलट संघ ने सरकार की तरफ से तैयार लिस्ट को चुनौती दी है और इस मामले में न्यायिक जांच की मांग की है. उसे सरकार की जांच पर भरोसा नहीं है.

विमान उड़ाने से रोके जाने वाले एक पायलट ने नाम ना जाहिर करने की शर्त पर डीडब्ल्यू से कहा, "नागरिक उड्डयन प्राधिकरण को परीक्षा के बाद ही लाइसेंस जारी करने का अधिकार है, लेकिन सरकार ने जो लिस्ट बनाई है उसमें गलतियां ही गलतियां हैं. इसके नतीजे क्या होंगे, यह जाने बिना ही जल्दबाजी में लिस्ट बनाई गई है."

इस पायलट के पास 19 साल तक विमान उड़ाने का अनुभव है. वह अपना नाम इस लिस्ट में होने पर हक्का बक्का रह गया. उसका कहना है, "मुझे नहीं पता कि सरकार क्या करने जा रही है. मुझे उनके इरादों पर संदेह है. या तो वे सरकारी एयरलाइंस को निजी हाथों में देने जा रहे हैं या फिर विदेशों में होटल खरीदने के लिए इसे पूरी तरह बंद करने की योजना बना रहे हैं."

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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और एक उड्डयन विशेषज्ञ शाहिद खाकान अब्बासी ने डीडब्ल्यू से कहा, "सरकार की तरफ से इतनी जल्दी पायलटों की लिस्ट सार्वजनिक करना अच्छा कदम नहीं है. यह एक गंभीर मुद्दा है और इस बारे में पूरी जांच होनी चाहिए क्योंकि हमारे 40 प्रतिशत पायलट अब संदेह के घेरे में हैं. सरकार ने जांच से पहले ही लिस्ट जारी कर दी और जांच की घोषणा बाद में की."

अब्बासी ने कहा कि सरकार के कदम ने दुनिया भर में पाकिस्तान के पायलटों की छवि को धक्का पहुंचाया है. उन्होंने बताया कि टर्किश एयरलाइंस ने 16 पाकिस्तानी पायलटों को विमान उड़ाने से रोक दिया है क्योंकि उनके नाम भी इस लिस्ट में शामिल हैं. इसी तरह वियतनामी एयरलाइन में काम करने वाले सभी पाकिस्तानी पायलटों को भी विमान उड़ाने से रोक दिया गया है.

अंतरराष्ट्रीय विमानन संस्थाओं ने इतनी बड़ी संख्या में पायलटों के लाइसेंस फर्जी मिलने पर चिंता जताई है. इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के एक प्रवक्ता ने कहा, "हम पाकिस्तान में फर्जी पायलट लाइसेंस कांड से जुड़ी रिपोर्टों पर नजर बनाए हुए हैं, जो चिंताजनक हैं. यह मामला लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया और सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चूकों की तरफ इशारा करता है." इसके अलावा यूरोपियन यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी ने कहा है, "हम मामले की जांच कर रहे हैं. लेकिन अभी इस बारे में कुछ नहीं कह सकते हैं."

पाकिस्तान में पिछली कई सरकारों ने पीआईए को निजी हाथों में देने की कोशिश की लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण ऐसा संभव नहीं हो पाया. पीआईए के बेड़े में कुल 31 विमान है जबकि वहां कार्यरत पायलटों की संख्या 434 है. अकसर रद्द होने वाली उड़ानों और कुप्रबंधन के कारण पीआईए गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही है.

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