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तस्वीर: RIZWAN TABASSUM/AFP/Getty Images

पाकिस्तान में टूटते मंदिर

५ दिसम्बर २०१२

पाकिस्तान में मंदिर बुरी हालत में हैं. अल्पसंख्यक हिंदू आबादी मंदिरों पर हमलों से परेशान है. लेकिन सरकार ने इस पर चुप्पी साधी हुई है. हाल ही में एक मंदिर गिराया गया और हिंदू परिवारों के घर भी.

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जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान में सरकार मंदिरों पर कोई खास ध्यान नहीं दे रही है. कई पुराने मंदिर या तो नष्ट कर दिए गए हैं, या फिर उनकी हालत बहुत बुरी है. यही हाल अन्य अल्पसंख्यकों का भी है. रविवार को कराची में एक मंदिर और कुछ हिंदुओं के घर गिरा दिए गए. पाकिस्तान में अधिकारियों का कहना है कि अदालत ने कुछ अवैध इमारतों को गिराने के आदेश दिए थे, लेकिन मंदिर गिराने की बात से उन्होंने इनकार किया है.

वहीं पाकिस्तान हिंदू परिषद के रमेश कुमार वानकवानी ने मीडिया को बताया की जमीन के अधिग्रहण को ले कर लम्बे समय से एक बिल्डर और हिंदू निवासियों के बीच विवाद चल रहा था. उनका कहना है कि जमीन हिंदुओं की है और बिल्डर उस पर कब्जा करना चाहता है.

पाकिस्तान में मानवाधिकार संगठन के वरिष्ठ अधिकारी अब्दुल हाई ने डॉयचे वेले से बातचीत में कहा कि अदालत ने बिल्डर को इमारतें गिराने के आदेश नहीं दिए थे, "अब तक अदालत में यह मामला तय नहीं हुआ है."

Pakistan zerstörtes Hindu Tempel in Karatschi
तस्वीर: RIZWAN TABASSUM/AFP/Getty Images

कट्टरपंथ और भेदभाव

पाकिस्तान में कई गुरूद्वारे भी हैं. इनमें से अधिकतर पंजाब में हैं. भारत से भी कई बार लोग गुरूद्वारे में माथा टेकने के लिए पाकिस्तान जाते हैं. लेकिन देश में हिंदू और सिख अल्पसंख्यक हैं. पाकिस्तान की 17.4 करोड़ की आबादी में से हिंदू केवल 2.3 फीसदी ही हैं. इनमें से अधिकतर सिंध के इलाके में रहते हैं.

अल्पसंख्यकों के लिए काम करने वाली संस्थाओं का दावा है कि पाकिस्तान में यह मंदिर या चर्च गिराने का पहला मामला नहीं है. इस से पहले भी देश में व्यावसायिक कारणों से अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को गिराया जा चुका है.. जानकारों का मानना है कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव किया जाता है. मंदिरों पर हमले केवल कट्टरपंथी मुस्लिम ही नहीं करते बल्कि आम लोग भी करते हैं. पिछले कुछ सालों में ये हमले कई गुना बढ़ गए हैं.

पाकिस्तान में मानवाधिकार संगठन के उपाध्यक्ष अमरनाथ मोतुमल ने भी यह बात स्वीकार की है. डॉयचे वेले से बातचीत में उन्होंने कहा, "चरमपंथ हिंदुओं और मंदिरों पर हमले का मुख्य कारण रहा है." उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में हिंदू काफी डरे हुए हैं और उन्हें सरकार से किसी तरह की मदद नहीं मिल रही है, "ये लोग सोचते हैं कि हिंदुओं पर और मंदिरों पर हमला कर के इन्हें जन्नत नसीब होगी."

अब्दुल हाई भी मोतुमल की बात से सहमत दिखे. उनका कहना है, "कई बार इन हमलों के पीछे आर्थिक कारण भी होते हैं. लेकिन अधिकतर मंदिरों और गिरिजाघरों पर चरमपंथी ही हमला करते हैं." हाई के मुताबिक पाकिस्तान में चरमपंथ बढ़ता जा रहा है और वक्त के साथ साथ चरमपंथी और ताकतवर होते जा रहे हैं और "सरकार अल्पसंख्यकों को और उनके धार्मिक स्थलों को बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है."

Pakistanische Frauen der Hindu Minderheit
तस्वीर: AP

सांस्कृतिक धरोहर नष्ट

कराची के पत्रकार पीरजादा सलमान ने डॉयचे वेले को बताया कि पाकिस्तान में सबसे पहला मंदिर 90 के दशक में गिराया गया. उस वक्त पाकिस्तान के लोगों में अयोध्या बाबरी मस्जिद के मामले पर रोष था, "यह सब बाबरी मस्जिद को गिराने के बाद ही शुरू हुआ. उसके जवाब में लोगों ने ना केवल मंदिर, बल्कि चर्चों पर भी हमले करने शुरू कर दिए."

सलमान का कहना है कि लोग यह बात नहीं समझा पा रहे हैं कि इन हमलों के कारण वे देश की सांस्कृतिक धरोहर भी नष्ट कर रहे हैं, "कराची के मालीर इलाके में एक मंदिर हुआ करता था. आर्किटेक्चर के लिहाज से यह एक शानदार इमारत थी. मंदिर में हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियों पर बहुत ही बारीकी से काम किया गया था. जब मंदिर पर हमला हुआ तब लोगों ने ये मूर्तियां भी तबाह कर दी. ये केवल पूजा पाठ की जगह नहीं हैं, यह पाकिस्तान की सांस्कृतिक धरोहर है."

सलमान ने भी कोई कदम ना लिए जाने पर पाकिस्तान सरकार की आलोचना की है. पाकिस्तान में अब भी सैकड़ों मंदिर और चर्च हैं जो खंडहरों में तब्दील होते जा रहे हैं. सरकार इन पर कोई ध्यान नहीं दे रही है. जानकारों का मानना है कि या तो सरकार चरमपंथियों से डरी हुई है या अल्पसंख्यकों के लिए कुछ करना ही नहीं चाहती.

इसका नतीजा यह है कि पिछले कुछ सालों में हिंदुओं ने पाकिस्तान छोड़ भारत आना शुरू कर दिया है.

रिपोर्ट: शामिल शम्स/ईशा भाटिया

संपादन: आभा मोंढे

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