पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी के साथ और चार महीने का वक्त मिला | दुनिया | DW | 18.10.2019
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दुनिया

पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी के साथ और चार महीने का वक्त मिला

मनी लाउंड्रिंग पर नजर रखने वाली संस्था ने पाकिस्तान को अपनी "काली सूची" में नहीं डालने का फैसला किया है. पाकिस्तान को आतंकवाद के लिए धन की व्यवस्था रोकने पर उठाए कदमों को साबित करने के लिए चार महीने का समय और मिला है.

पाकिस्तान के पास आतंकवादियों के धन जमा करने के खिलाफ उठाए कदमों को बेहतर करने के लिए अगले साल फरवरी तक का समय मिला है. पेरिस में मौजूद फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी एफएटीएफ ने इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहमति से एक योजना तैयार की है. एफएटीएफ को 1989 में दुनिया भर में आतंकवाद के लिए धन जमा करने की कोशिशों को रोकने और मनी लाउंड्रिंग पर नजर रखने के लिए बनाया गया था. यह कई देशों की सरकारों का संगठन है.

Frankreich l Financial Action Task Force (FATF) Medienkonferenz - Xiangmin Liu (Reuters/C. Platiau)

एफएटीएफ के प्रमुख जियंगामिन लुई

एफएटीएफ की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, "एफएटीएफ पाकिस्तान से आग्रह करती है कि वह पूरी कार्य योजना को फरवरी 2020 तक जल्दी से लागू कर दे. अगर अगली बैठक तक पूरी कार्ययोजना में महत्वपूर्ण और टिकाऊ प्रगति नहीं हुई तो एफएटीएफ कार्रवाई करेगा." जानकारों का कहना है कि एफएटीएफ पाकिस्तान के हर अंतरराष्ट्रीय लेनदेन पर कड़ी निगाह रखेगा और पाकिस्तान में व्यापार करना महंगा और कठिन सौदा होगा. एफएटीएफ की तरफ से पेरिस में जारी बयान में कहा गया है कि काली सूची में डाले जाने से बचने के लिए पाकिस्तान को कम से कम 27 उपाय करने थे लेकिन उसने केवल पांच कदम उठाए हैं. एफएटीएफ के प्रमुख जिंयांगमिन लुई ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा, "पाकिस्तान ने पर्याप्त काम नहीं किया है." उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को पैसे के भुगतान का पता लगाना होगा और आतंकवाद के लिए पैसे देने वालों की जांच और उनके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी.

पाकिस्तान की सरकार ने एफएटीएफ के फैसले का स्वागत किया है. यह फैसला प्रधानमंत्री इमरान खान के लिए बड़ी राहत ले कर आया. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई देशों से कर्ज का इंतजाम करने में जुटे हैं. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरेशी ने समाचार एजेंसी एपी से कहा, "अल्लाह का शुक्र है हम कामयाब हुए हैं."

इमरान की अपील दबाव का नतीजा

 इस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कश्मीरी प्रदर्शनकारियों से आग्रह किया था कि वे सीमा पार कर भारत के नियंत्रण वाले  कश्मीर में ना जाएं क्योंकि इससे भारत के इस बात को बल मिलेगा कि इस्लामाबाद कश्मीरी आतंकवादियों का समर्थन करता है. इमरान खान ने यह भी कहा था सीमा का कोई भी उल्लंघन कश्मीरियों का नुकसान करेगा, जो 5 अगस्त से ही बंद की स्थिति का सामना कर रहे हैं. इसी दिन भारत ने जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म कर दिया था. सामान्य परिस्थितियों में इमरान खान इस तरह की चेतावनी जारी नहीं करते. विश्लेषकों का कहना है कि उनकी यह चेतावनी पाकिस्तान पर एफएटीएफ की लगातार चल रही समीक्षा का ही नतीजा थी.

Milli Muslim League Pakistan (Getty Images/AFP/A. Ali)

हाफिज सईद

अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्था ने पाकिस्तान को "ग्रे लिस्ट" में जून 2018 से डाल रखा है और उसे घरेलू चरमपंथी इस्लामी गुटों के खिलाफ कार्रवाई करने और उनके धन के स्रोतों को खत्म करने के लिए अक्टूबर 2019 तक का वक्त दिया था. आशंका थी कि पाकिस्तान को "काली सूची" में डाल दिया जाएगा जिसमें फिलहाल उत्तर कोरिया और ईरान हैं. पाकिस्तान को 37 देशों के इस संगठन की काली सूची में डालने के नतीजे बेहद बुरे होते क्योंकि तब वह दूसरे देशों से कर्ज नहीं ले पाता जिसकी उसे अकसर जरूरत पड़ती है.

एफएटीएफ की "ग्रे लिस्ट" में फिलहाल पाकिस्तान के अलावा इथियोपिया, यमन, इराक, सीरिया, सर्बिया, श्रीलंका, त्रिनिदाद और टोबैगो, वनुआतु और ट्यूनिशिया हैं. पिछले साल बोस्निया हैर्जेगोविना को "सफेद सूची" में डाला गया.

पाकिस्तान ने आतंकवादियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की?

अगस्त में पाकस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्री हम्माद अजहर ने कहा, "पाकिस्तान इलाके में शांति को बढ़ावा देने के लिए हर कदम उठाएगा." इसके साथ ही अजहर ने कहा था कि पाकिस्तान को एफएटीएफ की "काली सूची" में डाले जाने की आशंका नहीं है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता को कम करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं. इनमें 2008 के मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को हिरासत में लेना भी शामिल है. इसके अलावा सईद के संगठन लश्कर ए तैयबा के चार शीर्ष अधिकारियों को भी आतंकवाद के लिए धन जुटाने के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय में दक्षिण और मध्य एशिया विभाग के प्रमुख एलिस वेल्स ने इन कदमों का स्वागत किया और कहा, "पाकिस्तान को अपने भविष्य के लिए अपनी जमीन से आतंकवादियों को काम करने से जरूर रोकना चाहिए." हालांकि भारत पाकिस्तान के आतंकवाद के विरुद्ध उठाए कदमों से संतुष्ट नहीं है. भारत का कहना है कि पाकिस्तान केवल आंखों में धूल झोंक रहा है और एफएटीएफ को उसे काली सूची में डाल देना चाहिए.

ब्रसेल्स में रहने वाले वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार खालिद हमीद फारुकी का कहना है, "इस्लामाबाद के पास आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई के अलावा और कोई विकल्प नहीं है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र से हालात को ठीक करने की मांग कर रहा है." फारुकी ने यह भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सरकार ने इस्लामी चरमपंथियों पर लगाम कसने के लिए कई कदम उठाए थे लेकिन देश की ताकतवर सेना अब भी कई छद्म जिहादी गुटों को समर्थन जारी रखे है.

एफएटीएफ की काली सूची से बचने में सईद को पकड़ना कितना अहम है यह जताने के लिए फारुकी ने बताया, "2017 में पाकिस्तानी सरकार ने कई राजनयिकों को वाशिंगटन, पेरिस और ब्रसेल्स भेजा ताकि वो कश्मीर में भारत के जुल्मों के बारे में बता सकें लेकिन इन पश्चिमी देशों की राजधानियों में अधिकारियों को साफ संदेश दिया गया कि वो पहले हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई करें."

हालांकि पाकिस्तान की सेना के एक रिटायर अधिकारी और रक्षा विश्लेषक अमजद शोएब का कहना है, "एफएटीएफ बड़े ताकतवर देशों की हाथ का एक खिलौना है." शोएब ने कहा, "भारत और अमेरिका पाकिस्तान के खिलाफ मिल गए हैं. हमें इन धमकियों में नहीं आना चाहिए. हाफिज सईद के खिलाफ कोई सबूत नहीं है फिर भी हमने उसे गिरफ्तार किया. यह सब दबाव बनाने की रणनीति है."

लंबे समय की रणनीति का अभाव

रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तानी अधिकारी केवल एफएटीएफ की "काली सूची" से बचने की कोशिश कर रहे हैं. लंबे समय के लिए इस मुद्दे पर उनके पास कोई योजना नहीं है. उनका कहना है कि भारत और अफगानिस्तान को लेकर उनकी दीर्घकालीन नीतियां अब भी वही हैं. बीते कुछ सालों में पाकिस्तान के भारत और अफगानिस्तान से संबंध खराब हुए हैं. अफगान और भारतीय अधिकारी पाकिस्तान पर आतंकवादी गुटों की मदद करने का आरोप लगाते हैं.

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव इस साल कश्मीर की वजह से कई गुना बढ़ गया है. दूसरी तरफ पाकिस्तान अमेरिका और अफगान तालिबान के बीच समझौता कराने की भी कोशिश में है हालांकि अब तक इसका कोई नतीजा नहीं निकला है.

रिपोर्ट: शामिल शम्स (एपी)

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