पाकिस्तान के गम में भारत भी शरीक | दुनिया | DW | 17.12.2014
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दुनिया

पाकिस्तान के गम में भारत भी शरीक

पाकिस्तान ही नहीं भारत में भी पेशावर के स्कूल में आतंकी हमले में मारे गए बच्चों की याद में मातम पसरा है. भारतीय संसद ने इस बर्बर कार्रवाई की निंदा की है तो वहीं स्कूलों में बच्चों ने दो मिनट का मौन रखा.

समाज के हर वर्ग और धर्म के लोगों ने बच्चों पर हुए कायराना हमले की भर्त्सना की है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद देश भर के सरकारी और निजी स्कूलों में बच्चों ने दो मिनट का मौन रखा और मासूमों की शहादत को याद किया. प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा कि पाकिस्तान के इस संकट की घड़ी में भारत साथ खड़ा है.



स्कूल में हुए आतंकी हमले में मारे गए बच्चों को श्रद्धांजलि देने के लिए भारतीय संसद में भी मौन रखा गया और यहां हमले की निंदा का प्रस्ताव पास किया गया. लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा, "यह सभा इस घटना पर गहन दुख और आक्रोश व्यक्त करते हुए इस घृणित, जघन्य, भयावह और कायराना आतंकवादी कृत्य की घोर भर्त्सना करती है." निंदा प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत पाकिस्तान के साथ खड़ा है. वहीं राज्यसभा में सभापति हामिद अंसारी ने आतंकी हमले को क्रूर और कायरतापूर्ण करार दिया.



मंगलवार से ही हैशटैग #IndiawithPakistan ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है. इस हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए भारतीय नागरिकों ने पाकिस्तानी अभिभावकों के दुख को साझा किया. लोगों ने इस हैशटैग का इस्तेमाल मारे गए बच्चों को श्रद्धांजलि देने और पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ मजबूत लड़ाई लड़ने के लिए किया.



ट्विटर के अलावा फेसबुक पर भी लोगों ने अपने गम का इजहार किया. किसी ने इस हमले की निंदा की तो किसी ने भावनात्क कविताएं पोस्ट कीं.



बुधवार को कई भारतीय शहरों में इस हमले के विरोध में और बच्चों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए शांति मार्च का आयोजन किया जा रहा है. भारत में हर धर्म के गुरुओं ने इस बर्बर कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की है.


जयपुर में पोद्दार वर्ल्ड स्कूल की अद्या गुप्ता कहती हैं, "ज्यादातर बच्चों को इसके बारे में पता है और वे सदमे में हैं. हमने मोमबत्तियां जलाईं और प्रार्थना की" भारतीय मुस्लिम उलेमाओं का कहना है कि हमला इस्लाम के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है. दिल्ली जामा मस्जिद के इमाम सैयद अहमद बुखारी ने कहा, "यह हमला मानवता के खिलाफ है. इस्लाम के खिलाफ है. वे हिंसा के बीज बो रहे हैं. तालिबान ने इस्लाम को बदनाम कर दिया."

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