पश्चिम बंगाल और असम में अहम है दूसरे चरण का मतदान | भारत | DW | 31.03.2021
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भारत

पश्चिम बंगाल और असम में अहम है दूसरे चरण का मतदान

असम में दूसरे चरण में जिन 39 सीटों पर मतदान होना है उनमें बराक घाटी सबसे अहम है. बांग्लाभाषी हिंदुओं का गढ़ रहा यह क्षेत्र बीजेपी का मजबूत गढ़ रहा है. बीजेपी इस बार इस इलाके में सीएए की मदद से क्लीनस्वीप करना चाहती है.

पश्चिम बंगाल और पड़ोसी असम में गुरुवार को विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए वोट डाले जाएंगे. इन दोनों राज्यों में इस चरण की सीटों की काफी अहमियत है. पश्चिम बंगाल में जहां पहले चरण की तरह इस चरण में भी 30 सीटों पर मतदान होना है, जबकि असम की 39 सीटों पर. बंगाल में जहां पूर्व मेदिनीपुर की नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मैदान में होने की वजह से सबसे हाई प्रोफाइल सीट बनी है, वहां असम में बराक घाटी इलाका सबसे अहम है.

पश्चिम बंगाल में इस चरण में जिन 30 सीटों पर मतदान होना है उनमें पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और बांकुड़ा की 26 सीटों के साथ ही दक्षिण 24-परगना जिले की चार सीट भी शामिल है. इनमें पूर्व मेदिनीपुर की वह नंदीग्राम सीट भी शामिल है जहां से तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मैदान में हैं. यहां उनका मुकाबला कभी अपने सबसे करीबी रहे शुभेंदु अधिकारी के साथ है, जो बीजेपी के टिकट पर ममता के खिलाफ लड़ रहे हैं. संयुक्त मोर्चे की उम्मीदवार के रूप में सीपीएम की मीनाक्षी मुखर्जी चुनावी मैदान में हैं.

नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में बुधवार को ही सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है. एक अधिकारी ने बताया कि चुनाव आयोग ने एक हेलीकॉप्टर की मदद से इलाके में निगरानी भी शुरू कर दी है. साथ ही इलाके की संवेदनशीलता को देखते हुए जो लोग नंदीग्राम के मतदाता नहीं हैं, उनको इस इलाके में प्रवेश करने नहीं दिया जा रहा है. उस अधिकारी ने बताया, ‘‘नंदीग्राम बेहद संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्र है. यहां ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी जैसे हाई प्रोफाइल उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कानून एवं व्यवस्था की स्थिति नहीं बिगड़े और लोग बिना किसी डर के मतदान कर सकें.''

West Bengal Wahlen BJP Wahlkampf

बीजेपी नेता अमित शाह चुनाव प्रचार में

ममता का पुराने साथी से मुकाबला

वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी यहां से टीएमसी के टिकट पर लड़े थे और 67 प्रतिशत वोट हासिल करते हुए एकतरफा जीत हासिल की थी. तब लेफ्ट प्रत्याशी को 27 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि बीजेपी महज 5 प्रतिशत के आसपास सिमट गई थी. लेकिन तीन साल बाद ही जब 2019 में लोकसभा चुनाव का नंबर आया तो समीकरण एकदम बदल गए. बीजेपी को तमलुक लोकसभा सीट, जिसके तहत यह सीट है, पर 37 प्रतिशत वोट मिले थे. तमलुक लोकसभा सीट टीएमसी उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी के भाई दिव्येंदु ने जीती थी. उनको 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिला, जबकि लेफ्ट महज नौ प्रतिशत पर रह गया. पिछले विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण की इन 30 सीटों में से टीएमसी ने 21 पर जीत दर्ज की थी. बीजेपी को तब महज एक, लेफ्ट को 5 और कांग्रेस को तीन सीटों पर जीत मिली थी.

नंदीग्राम के अलावा भी कई सीटें ऐसी हैं जहां कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है. ऐसी सीटों में खड़गपुर सदर के अलावा बांकुड़ा, चंडीपुर, मोयना, देबरा और सबंग सीट शामिल हैं. खड़गपुर सीट वर्ष 2016 में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने जीती थी. लेकिन उनके लोकसभा में चुने जाने के बाद 2019 के उपचुनाव में टीएमसी ने इस पर कब्जा कर लिया था. बीजेपी ने यहां अभिनेता हीरेन चटर्जी को मैदान में उतारा है. प्रधानमंत्री मोदी से लेकर अमित शाह तक यहां रैलियां कर चुके हैं. चंडीपुर में टीएमसी ने अभिनेता सोहम चक्रवर्ती को मैदान में उतारा है जबकि बांकुड़ा सीट से अभिनेत्री सायंतिका टीएमसी के टिकट पर पहली बार चुनाव लड़ रही हैं. मोयना सीट पर पूर्व क्रिकेटर अशोक डिंडा बीजेपी उम्मीदवार हैं जबकि देबरा सीट पर दो पूर्व आईपीएस अधिकारी भारती घोष (बीजेपी) और हुमायूं कबीर (टीएमसी) आमने-सामने हैं. कांग्रेस के टिकट पर कई बार सबंग सीट जीतने वाले टीएमसी के राज्यसभा सदस्य मानस भुइयां अबकी पहली बार टीएमसी के टिकट पर मैदान में हैं. पिछले उपचुनाव में यह सीट उनकी पत्नी गीता रानी भुइयां ने जीती थी.

Indien Kalkutta | Wahlkampfmaterial

टीशर्ट और बैनर बनाने वालों की चांदी

असम में 39 सीटों पर चुनाव

असम में दूसरे चरण में जिन 39 सीटों पर मतदान होना है उनमें बराक घाटी सबसे अहम है. बांग्लाभाषी हिंदुओं का गढ़ रहा यह क्षेत्र बीजेपी का मजबूत गढ़ रहा है. वर्ष 1991 में जब बीजेपी पहली बार असम में 10 सीटों पर चुनाव जीती थी तब भी उनमें से 9 सीटें इसी क्षेत्र से आती थीं. बराक घाटी मुख्यतः तीन क्षेत्रों कछार, हैलाकांडी और करीमगंज को मिलाकर बना है. इन तीनों क्षेत्रों में 15 विधानसभा सीटें आती हैं. 2016 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी इन 15 विधानसभा सीटों में से 8 सीटों पर जीत हासिल कर पाई थी.

बीजेपी इस बार इस इलाके में सीएए की मदद से क्लीनस्वीप करना चाहती है. इलाके के जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने दूसरे चरण से पहले सीएए के मुद्दे को पूरी ताकत से उठाया है. पहले चरण के वोटिंग के दौरान बीजेपी सीएए पर नरम रुख अख्तियार किए हुए थी, लेकिन उसके बाद उसके सुर बदल गए हैं.

कांग्रेस इस बार असम में आठ दलों के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ रही है, इसके साथ उसने असम में सीएए विरोध को अपना मुख्य मुद्दा बनाया है. कांग्रेस पार्टी अपने घोषणापत्र से लेकर हर जनसभा में यह बात कहते आ रही है कि वह अगर असम की सत्ता में आती है तो सीएए को राज्य में लागू नहीं होने देगी. कांग्रेस को बराक घाटी में इसका नुकसान हो सकता है. इलाके के बंगाली हिंदू शुरू से ही सीएए लागू करने की मांग करते रहे हैं. लेकिन कांग्रेस जिस प्रकार से इस कानून का विरोध कर रही है उससे साफ है कि यहां के लोग कांग्रेस या उसके नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल किसी भी पार्टी को वोट नहीं देंगे.

 

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