पर्यटकों के लिए चेरनोबिल | दुनिया | DW | 06.12.2012
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दुनिया

पर्यटकों के लिए चेरनोबिल

दुनिया के सबसे बड़े परमाणु हादसे को हुए 25 साल से भी ज्यादा का समय हो गया. अब चेरनोबिल पावर प्लांट को पर्यटन स्थल में बदलने की योजना है. प्लांट के चारों ओर दीवारें बनाई जा रही हैं.

यूक्रेन में चेरनोबिल परमाणु बिजली घर के आसपास नई दीवारें खड़ी की जा रही हैं, जो इस बात को सुनिश्चित करेंगी कि परमाणु विकिरण ना हो सके. पिछले महीने ही इस प्रोजेक्ट का पहला चरण समाप्त हुआ है. 5000 टन की स्टील की छत तैयार की गयी है. अभी इसे प्लांट के ऊपर लगाना बाकी है. इसमें गलती की कोई गुंजाइश नहीं. क्योंकि अगर इतनी भारी छत ढह गयी तो प्लांट में मौजूद रेडियोधर्मी पदार्थ लीक होने लगेंगे और विकिरण पहले से भी ज्यादा नुकसान कर देगा.

26 अप्रैल1986 को जब चेरनोबिल में हादसा हुआ तब पूरे पश्चिमी यूरोप पर इसका असर दिखाई दिया. उस वक्त आनन फानन में रिएक्टर के चारों ओर दीवार खड़ी कर दी गयी ताकि विकिरण फैलने से रोके जा सकें. लेकिन अब यह दीवार खराब होती नजर आ रही है. इतने साल में कभी इसकी मरम्मत नहीं की गयी. प्लांट के चारों तरफ पेड़ उग गए हैं. इसीलिए कई देशों की मदद से एक ऐसा ढांचा तैयार किया जा रहा है जो कम से कम अगली एक सदी तक टिक सकेगा.

वक्त के साथ लड़ाई

स्टील के अलावा इसमें सीसे का भी इस्तेमाल किया जा रहा है क्योंकि सीसा रेडियोधर्मी किरणों को अपने अंदर समा लेता है. इस प्रोजेक्ट में पुनर्निर्माण और विकास के लिए बना यूरोपियन बैंक ईबीआरडी निवेश कर रहा है. ईबीआरडी के परमाणु सुरक्षा मामलों के अध्यक्ष विंस नोवाक का कहना है, "हम वक्त के साथ लड़ रहे हैं और हम कोई भी गलती नहीं कर सकते." इस प्रोजेक्ट में 40 देशों के 1.5 अरब यूरो लगे हैं. निर्माण के काम में भी 22 देशों से जानकारों को बुलाया गया है.

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खाली चेरनोबिल

यह प्लांट राजधानी कीव से केवल 110 किलोमीटर की दूरी पर है. ढांचा बन कर तैयार हो चुका है. अब 2015 तक इस से प्लांट को पूरी तरह ढंक देने की योजना है. यह ताबूतनुमा ढांचा 257 मीटर लंबा है और इसका कुल वजन 29,000 टन है. ऐसी भी योजना है कि प्लांट को पूरी तरह से ढक देने के बाद उसे अंदर ही अंदर नष्ट कर दिया जाएगा. हालांकि यह कैसे मुमकिन हो पाएगा इस पर अभी तक कोई जानकारी नहीं दी गयी है.

आइफल टॉवर जैसा

निर्माण का काम प्लांट से कुछ दूरी पर किया जा रहा है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस इलाके में उत्सर्जन कम हुआ था. इसलिए यह मजदूरों के लिए सुरक्षित जगह है. इस काम में 1500 मजदूर लगे हैं. परमाणु विकिरण से बचने के लिए खास तरह की पोशाक पहननी होती है जो काफी भारी होती है. मजदूरों को यह ना पहननी पड़े इसके लिए जमीन से आठ मीटर की गहराई तक मिट्टी हटाई गयी. इसके नीचे विकिरण का खतरा नहीं है. लेकिन हर कर्मचारी को रेडिएशन डिटेक्टर दिया गया है. इस से वे खुद को सुरक्षित रख सकते हैं.

चेरनोबिल परमाणु प्लांट के अध्यक्ष इगो ग्रामोतनिक इस प्रोजेक्ट में और संभावनाएं तलाश रहे हैं. उनका मानना है कि प्रोजेक्ट पूरा हो जाने के बाद चेरनोबिल का यह प्लांट आइफल टॉवर की तरह एक पर्यटन स्थल बन सकता है. ग्रामोतनिक का कहना है, "जब आइफल बना तब उसको इतने सालों तक वहां रखने की योजना नहीं थी, लेकिन लोग आज भी दुनिया भर से उसे देखने पहुंचते हैं." फिलहाल यूक्रेन में सैलानी सरकार से खास अनुमति ले कर प्लांट देखने जा सकते हैं. प्रोजेक्ट पूरा हो जाने के बाद सैलानियों के प्लांट के इर्द गिर्द होने में कोई खतरा नहीं बचेगा. यूक्रेन सरकार निवेशकों को लुभाने की कोशिश कर रही है, ताकि इसे पर्यटन के लिहाज से और बेहतर बनाया जा सके.

यूक्रेन ने हादसे के बाद भी परमाणु ऊर्जा से विदा नहीं ली. देश में कुल 15 परमाणु घर हैं और 2030 तक इनके तीन गुना हो जाने की उम्मीद है.

आईबी/एएम (डीपीए)

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