पड़ोसी बांग्लादेश की पहली यात्रा पर मोदी | दुनिया | DW | 05.06.2015
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दुनिया

पड़ोसी बांग्लादेश की पहली यात्रा पर मोदी

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से मिल रहे हैं. अपने पूर्वी पड़ोसी देश की पहली आधिकारिक यात्रा पर मोदी ने काफी "जोश और हर्ष" जताया है.

द्विपक्षीय संपर्क बढ़ाने, जल विवाद और तमाम अन्य मुद्दों पर दोनों पक्षों की मुलाकात से भारी उम्मीदें हैं. यात्रा से पहले जारी अपने संदेश में मोदी ने कहा, "मैं बेहद उत्साह और हर्ष के साथ एक ऐसे देश की यात्रा पर जा रहा हूं जिसके साथ भारत का बेहद घनिष्ट संबंध रहा है." मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों को और "मजबूत बनाने" में प्रधानमंत्री हसीना की "महत्वपूर्ण भूमिका" निभाने के लिए प्रशंसा की है.

हाल ही में भारतीय संसद द्वारा 1974 के भूमि सीमा समझौते पर संवैधानिक संशोधन को मंजूरी दिए जाने को मोदी ने दोनों पड़ोसियों के संबंधों के लिए एक "ऐतिहासिक क्षण" बताया. काफी समय से लंबित तीस्ता नदी के जल विवाद मामले पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पहले ही कह दिया है कि मोदी की इस यात्रा में उससे जुड़े किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं होने हैं.

तीस्ता समझौते पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सितंबर 2011 के बांग्लादेश दौरे पर हस्ताक्षर होने थे. लेकिन अंतिम क्षण में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री के दल के साथ बांग्लादेश जाने से इंकार कर दिया था. इस बार ममता बनर्जी प्रधानमंत्री मोदी के साथ जा रही हैं. मोदी ममता बनर्जी और शेख हसीना के साथ ढाका से होकर जाने वाली कोलकाता और अगरतला के बीच बस सेवा का उद्घाटन करेंगे.

मोदी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को बांग्लादेश की ओर से दिया गया मुक्ति संग्राम सम्मान भी स्वीकार करेंगे. पाकिस्तान के खिलाफ 1971 के स्वतंत्रता युद्ध में बांग्लादेश की मदद के लिए उन्हें यह पुरस्कार दिया गया है. तब वाजपेयी लोकसभा सदस्य थे. यह सम्मान पहली बार स्वर्गीय इंदिरा गांधी को और बाद में उनकी बहू और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी मिल चुका है.

आरआर/एमजे (पीटीआई)

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