पक्षियों से इंसान को सीख | मंथन | DW | 17.02.2016
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मंथन

पक्षियों से इंसान को सीख

चमगादड़ अंधेरे में भी अपना शिकार खोज लेते हैं. ऐसा इसलिए नहीं कि उन्हें कुछ नजर आता है, बल्कि इसलिए कि उनके पास खास हुनर होता है जिसे एकोलोकेशन कहते हैं. एको यानि आवाज का गूंजना.

चमगादड़ सोनार साउंड पैदा करते हैं, जो आस पास की चीजों से टकरा कर उनके पास लौटती है और वो समझ जाते हैं कि शिकार कहां है. यही हुनर डॉलफिन के पास भी होता है. कितना अच्छा हो अगर इंसान भी इस तरकीब का फायदा उठा सकें. इसका लाभ खासकर दृष्टि की समस्या वाले लोगों को मिल सकेगा.

दुनिया में 28.5 करोड़ लोग दृष्टिहीनता के शिकार हैं. उनमें से करीब 4 करोड़ लोग पूरी तरह दृष्टिहीन हैं जबकि 24.5 करोड़ लोग कम देख पाते हैं. अंधेपन के शिकार 82 प्रतिशत से ज्यादा लोग 50 साल की उम्र से ज्यादा के हैं और करीब 90 प्रतिशत कमजोर वर्ग से आते हैं, लेकिन यह स्थिति कभी भी किसी के सामने आ सकती है.

टॉमी 18 साल का है और दृष्टिहीन है. लेकिन हमेशा ऐसा नहीं था. 2002 में जब वह पांच साल का था तो ग्राइफ्सवाल्ड में उसका ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन हुआ. वह बताता है, "ऑपरेशन के बाद एक दिन के अंदर मैं अंधा हो गया. चूंकि यह अचानक हुआ, मुझे मानसिक समस्याएं भी हो गईं. मुझे पैरानोया हो गया. यह बहुत ही बुरा था. मुझे मनोचिकित्सा करानी पड़ी."

उसके बाद जो हुआ वह किसी चमत्कार से कम नहीं था. टॉमी को पता चला कि वह जीभ चलाकर दुनिया को फिर से महसूस कर सकता है. वह दूर से ही बता देता है कि उसके सामने एक मीटर और 2 मीटर की दूरी पर क्या है. इस विधि से आस पास की चीजों को भांपने से टॉमी की जिंदगी कुछ आसान हो गई. "उसके कुछ समय बाद मैं बाहर भी जाने लगा, बिना कोई स्टिक लिए. मैंने जीभ चलाकर बहुत परीक्षण किए और जब मुझे पता चला कि मैं यह कर सकता हूं, तो यह सचमुच कूल था."

क्लिक सोनार के जरिये आसपास की थाह पाना और रास्ता खोजना पशु पक्षियों की दुनिया में जानी मानी बात है. चमगादड़ इसका इस्तेमाल अंधेरे में बिना टकराए सही रास्ते पर चलने के लिए करते हैं. टॉमी भी चमगादड़ों की नकल करता है. और वह उनके जैसा ही कामयाब है. वह जीभ से आवाज करता है और प्रतिध्वनि से उसे पता चलता है कि कहां से रास्ता खाली है.

टॉमी के लिए क्लिक सोनार नई जिंदगी जैसा था. उसके बाद वह बहुत सारा काम खुद कर सकता था. वह बताता है, "मैं ज्यादा आत्मनिर्भर हो गया, खासकर घर से बाहर. अब मैं अपने कुत्ते के साथ कहीं भी जा सकता था. मैं सुन पाता हूं कि दीवार कहां है. मैं अब उनसे टकराता नहीं और मेरे कपड़े भी नहीं फटते." हर आवाज प्रतिध्वनि पैदा करती है जो हर चीज से टकराती है. गूंज जितनी जल्दी वापस लौटती है, वस्तु उतनी ही करीब होती है.

एमजे/एसएफ

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