न्यू यॉर्क में मोदी के जोरदार स्वागत की तैयारी | दुनिया | DW | 24.09.2014
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दुनिया

न्यू यॉर्क में मोदी के जोरदार स्वागत की तैयारी

एक रॉक गायक का सपना होता है कि उसके कार्यक्रम में गार्डन पूरा भर जाए लेकिन किसी नेता के भाषण के दौरान स्टेडियम फुल पैक हो ऐसा कम ही होता है. न्यूयॉर्क में मोदी के भाषण के दौरान ऐसा ही कुछ ऐसा ही माहौल बनने जा रहा है.

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पहली यात्रा पर अमेरिका जा रहे हैं. माना जा रहा है कि अमेरिका में किसी विदेशी नेता का भाषण सुनने पहली बार हजारों लोग जमा होंगे. न्यूयॉर्क के मेडिसन स्क्वायर गार्डन में रविवार को मोदी भाषण देने वाले हैं और इसमें 18,000 से ज्यादा लोगों के जमा होने की संभावना व्यक्त की गई है. हजारों लोग न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर पर लगे स्क्रीन पर इसे देखने के लिए जमा होंगे. 2014 की मिस अमेरिका रही नीना दावुलुरी और टीवी पत्रकार हरी श्रीनिवासन कार्यक्रम की मेजबानी करेंगे. 50 साल पहले अमेरिका जाने वाले डॉक्टर दिनेश पटेल ने कहा, "भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के लोग दुनिया भर में हैं और उन्हें मोदी सरकार से उम्मीद है कि वह लाल फीताशाही को कम करेंगे और लोगों पर फोकस करेंगे." पटेल बॉस्टन के मैसेचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल में मुख्य आर्थोस्कोपिक सर्जरी विभाग के प्रमुख हैं. उन्होंने बताया, "लोग नए नेता को देखने के लिए उत्सुक हैं. एक और नरेन्द्र इस देश में आ रहे हैं और अमेरिका को बताएंगे कि भारत क्या है."

स्वामी विवेकानंद के नाम से मशहूर हुए नरेंद्र नाथ ने 1893 में शिकागो में भाषण दिया था. मोदी ने 11 सितंबर को ट्वीट किया था, "स्वामी विवेकानंद के शब्दों को याद करते हुए हम एकता, भाईचारा और विश्व शांति के लिए प्रतिबद्ध हों."

मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार और जासूसी के मामले पर तनाव बना हुआ है.

मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर 2005 में वीजा देने से इनकार कर दिया गया था. इसका कारण 2002 के गुजरात दंगे थे. इसके बाद भारत में अमेरिकी राजदूत ने मोदी से इस साल फरवरी में मुलाकात की जब ऐसा लगने लगा कि लोकसभा चुनावों में मोदी जीत जाएंगे.

मेहनती विदेशी

अमेरिका में रहने वाले या जाने वाले भारतीय मूल के लोग बहुत पढ़े लिखे हैं. वहां रहने वाले करीब 32 लाख भारतीय मूल के लोग अमेरिकी जनसंख्या का एक फीसदी हिस्सा हैं. एक समुदाय के तौर पर उसी उम्र के अमेरिकियों की तुलना में वह इंटरनेट से ज्यादा जुड़े हैं, उनके पास कॉलेज की कम से कम एक डिग्री है. और वह औसतन बेहतर जीवन स्तर जीने वाले लोग हैं.

न्यूयॉर्क के रिलायंस कम्यूनिकेशन्स लॉन्ग आयलैंड की संस्थापक माइक नरुला 17 साल पहले अमेरिका आई थीं. कपड़ा कंपनी में काम करने के बाद उन्होंने अपनी कंपनी खोली जिसमें 200 लोग काम करते हैं. वह भी मोदी के कार्यक्रम की आयोजन समिति में हैं. उन्होंने बताया, "हमने भारत में भी बिजनेस करने की कोशिश की. मुझे उम्मीद है कि मोदी वैट और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मुद्दे को देखेंगे और कोशिश करेंगे कि अमेरिकी बिजनेस को 19 स्तर की लाल फीताशाही से न गुजरना पड़े."

एएम/एमजे (रॉयटर्स)

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