′निर्भया के दोषियों को फांसी होती तो शायद तेलंगाना कांड होता ही नहीं′ | भारत | DW | 02.12.2019
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भारत

'निर्भया के दोषियों को फांसी होती तो शायद तेलंगाना कांड होता ही नहीं'

तेलंगाना में महिला डॉक्टर से रेप और हत्या के बाद देश में गुस्सा है. दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग उठ रही है. निर्भया की मां आशा देवी ने डॉयचे वेले से कहा कि 7 साल बीत जाने के बाद भी उन्हें इंसाफ का इंतजार है.

तेलंगाना में महिला डॉक्टर से बलात्कार और हत्या के मामले पर पूरे देश में आक्रोश है. 2012 के निर्भया कांड के 7 साल बाद भी ऐसी खौफनाक वारदात से पुलिस-प्रशासन और कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं. दिल्ली में 2012 में चलती बस में निर्भया के साथ दरिंदगी करने वालों को अब तक फांसी नहीं हो पाई है. निर्भया कही गई पीड़िता की मां आशा देवी ने डॉयचे वेले से बातचीत में कहा कि उन्हें अब भी इंसाफ का इंतजार है.

डीडब्ल्यूः तेलंगाना में महिला डॉक्टर से जघन्य अपराध हुआ है उस पर आपकी प्रतिक्रिया क्या है?

आशा देवीः महिला डॉक्टर के साथ जो हुआ वह बहुत ही जघन्य है. उस महिला के साथ जो भी हुआ वह बहुत दुख की बात है. इस तरह की जो भी घटनाएं हो रही हैं उसके लिए हमारी व्यवस्था जिम्मेदार है. बच्चियों के साथ इतनी बर्बरता हो रही है. 2012 में निर्भया के साथ भी खौफनाक वारदात हुई थी, अब 2019 में हैदराबाद में हुआ. वहां एक जिंदा बच्ची को जला दिया गया. इतने साल बाद भी हम इस मुद्दे पर चर्चा ही कर रहे हैं. आज भी यह घटना हमें दोबारा 2012 की उस घटना के पास ले जाती है.

निर्भया कांड के बाद कानून में बदलाव हुए, सख्ती ज्यादा लाई गई क्या आपको लगता इससे कोई प्रभाव पड़ा?

सात साल बाद भी निर्भया के मुजरिम जिंदा हैं, हम सात साल से संघर्ष कर रहे हैं. मुझे लगता है कि उसी का प्रभाव है कि समाज में इस तरह के लोग खुले आम घूम रहे हैं. समाज में बदमाश कानून से बेखौफ हैं और अपराध को अंजाम दे रहे हैं. महिला डॉक्टर के साथ दरिंदगी करने वालों को जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए, ऐसे अपराधियों को फांसी होनी चाहिए. जब तक हमारा कानून ऐसे अपराधियों पर सख्ती नहीं दिखाएगा समाज में ऐसे ही बदमाश खुले आम घूमते रहेंगे.

Indien Protest Mutter des Opfers Nirbhaya (Getty Images/AFP/C. Khanna)

निर्भया कांड के नाबालिग आरोपी के 18 साल का होने पर रिहा किए जाने के विरोध में रैली में शामिल हुई थीं पीड़िता की मां आशा देवी.

क्या आपको लगता है कि बलात्कार और बच्चों के साथ यौन शोषण के मामले में जो कानून बना है उसमें कोई कमी है?

देखिए, कानून में कोई कमी नहीं है. निर्भया कांड के बाद जस्टिस वर्मा की सिफारिशों के बाद जो कानून बने वह सख्त हैं. बच्चों के साथ यौन हिंसा को लेकर पॉक्सो एक्ट लाया गया. महिला की उम्र अगर 18 साल से कम है और उसकी सहमति भी है, तो भी वह रेप होगा. रेप मामले में 7 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया गया है. अब पीड़ित की मरने जैसी स्थिति पर फांसी तक की अधिकतम सजा का प्रावधान है.

महिलाओं और बच्चों से होने वाले यौन उत्पीड़न के मामले के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए. आपको लगता है कि इससे जल्दी न्याय मिलना संभव हो पाया है?

बलात्कार से जुड़े मामले की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए. अगर कोर्ट में जाकर देखेंगे तो दो-दो महीने तक जज नहीं बैठते हैं. ऐसे में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का क्या फायदा. अगर कानून का पालन ही नहीं हो पाएगा तो उसका क्या फायदा. जो भी कानून है उसका सही इस्तेमाल होना चाहिए. मेरा मानना है कि जो भी बलात्कार के दोषी हैं उन सबको फांसी हो.

क्या फांसी की सजा हो जाने से बलात्कार की घटनाएं रुक जाएंगी?

मैं विश्वास के साथ कह सकती हूं कि जिस दिन दोषियों को फांसी होने लगेगी उस दिन से ऐसे अपराधियों को सबक मिल जाएगी और इस तरह की वारदात को अंजाम नहीं देंगे. हम ऐसा दिन जल्द देखना चाहते हैं. हम सब लोगों को इस मुद्दे पर लंबी लड़ाई लड़नी है. निर्भया के दोषियों को अभी भी फांसी नहीं हुई है. मैं अब भी लड़ाई लड़ रही हूं. मुझे बोला गया कि जब तक दोषियों का अधिकार है, वे याचिका दायर करते रहेंगे. अगर निर्भया के दोषियों को फांसी हो गई होती तो तेलंगाना में जो हुआ वह शायद नहीं होता.

निर्भया को इंसाफ के लिए आपकी लड़ाई जारी है?

निर्भया को इंसाफ के लिए मेरी लड़ाई जारी है, बिलकुल जारी है. यह लड़ाई कब तक चलेगी हम नहीं बोल सकते हैं.

आपको लगता है कि समाज में लड़कियां और बच्चियां सुरक्षित हैं?

जब भी इस तरह की घटनाएं होती है तो हम बच्चियों को घर में बंद कर देते हैं, पढ़ाई छुड़ा देते हैं, उनका घर से बाहर जाना बंद करा देते हैं  लेकिन हमें इस सोच को बदलने की जरुरत है. पुलिस को भी महिलाओं के प्रति अपनी सोच बदलनी होगी. सबसे जरूरी है कि हमें कानून व्यवस्था पर काम करना होगा, उस पर ध्यान देना होगा. बलात्कार जैसे मामले के दोषियों को सजा देनी होगी और जल्द देनी होगी.

जब ऐसी वारदात होती है तो परिवार को बहुत तकलीफ होती है. हमसे हजारों लोग मिलने आते लेकिन वक्त के साथ लड़ाई सिर्फ एक परिवार तक सीमित हो जाती है. बाद में अकेले ही संघर्ष करना पड़ता है. मैं यही कहना चाहती हूं कि तेलंगाना में महिला डॉक्टर को इंसाफ मिले साथ ही साथ निर्भया को भी इंसाफ मिले.

दिसंबर 2012 में हुए निर्भया गैंगरेप और हत्या के मामले में कुल 6 आरोपी थे. जिसमें से एक आरोपी ने तिहाड़ जेल में फांसी लगा ली थी. एक आरोपी नाबालिग था, जिसे 18 साल का होने पर छोड़ दिया गया. फिलहाल चार दोषी तिहाड़ जेल में बंद हैं और एक आरोपी विनय ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी है, दिल्ली सरकार ने उसकी दया याचिका खारिज करने की सिफारिश की है. चारों दोषी पहले ही दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर चुके हैं जो कि वहां से खारिज हो चुकी हैं.

इंटरव्यूः आमिर अंसारी

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