निर्भया की याद और इंसाफ की आस | ताना बाना | DW | 14.12.2013
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ताना बाना

निर्भया की याद और इंसाफ की आस

साल भले बीत गया हो लेकिन निर्भया की याद धुंधली नहीं हुई है. 365 दिन में ऐसा एक दिन भी नहीं बीता, जब घर में उसे याद न किया गया हो, जब आंसू न बहे हों. निर्भया के पिता ने डॉयचे वेले से दिल की बात की.

डॉयचे वेले: पिछले साल हुए हादसे ने आपकी जिंदगी को कितना बदला?

निर्भया के पिता: पिछले साल के हादसे के बाद जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आया है बल्कि जहां दुख कम होना चाहिए था वहां बढ़ता ही जा रहा है. जैसे जैसे समय बीत रहा है बेटी की याद बढ़ती जा रही है. हमेशा घर में रोना धोना होता रहता है. सब लोग मायूस रहते हैं, कुछ समझ में नहीं आता. हमारे लिए तो कुछ भी नहीं बदला है. जिंदगी में बहुत दुख है. बाहर से देखने से ऐसा लगता है कि सब कुछ ठीक हो गया होगा लेकिन ऐसा नहीं है. हमारे लिए बहुत कठिन समय है. हमारे लिए कहने को शब्द नहीं है. क्या कहें, कैसे कहें... जब भी बेटी के बारे में बात होती है या फिर उसके बारे में सोचते हैं तो आंखों में आंसू आ जाते हैं.

डॉयचे वेले: क्या आपको अदालत के फैसले से न्याय मिल गया

निर्भया के पिता: देखिए, अगर कहें तो न्याय मिल गया, लेकिन पूरा न्याय तभी होगा जब दोषियों को फांसी पर लटका दिया जाएगा. हम देख लेंगे कि सजा हो गई है, तभी हमें तसल्ली होगी. हम इस बात से संतुष्ट तो हैं कि घटना के बाद देश में कानून बदला लेकिन जब तक उन्हें सजा नहीं हो जाती, तब तक हम ये नहीं कह पाएंगे कि पूरा न्याय मिला.

डॉयचे वेले: क्या आपकी लड़ाई अभी जारी है.

निर्भया के पिता: आप समझिए कि लड़ाई की अभी शुरुआत हुई है. अभी हम लोगों ने नाबालिग आरोपी पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी है. इस याचिका पर छह जनवरी को सुनवाई होनी है. देखिए कोर्ट में क्या होता है. समाज में नाबालिगों द्वारा दुष्कर्म के मामले बढ़ते जा रहे हैं. आगे आने वाले समय में पूरे समाज को इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. इसलिए पहले रोकथाम हो जाए तो अच्छा रहेगा. इसी कारण हमने नाबालिग आरोपी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी है. क्योंकि उसके बाद तो कोई रास्ता नहीं है.

डॉयचे वेले: नाबालिग आरोपी के खिलाफ आप बालिग कानून के तहत मुकदमा चलाने की मांग कर रहे हैं. क्या आपको इस मुद्दे पर जरूरी समर्थन मिल रहा है.

निर्भया के पिता: जनता का रुझान है कि नाबालिग आरोपी को किसी भी तरह से सजा मिले. लेकिन हमें कोर्ट के मुताबिक ही चलना होगा. अदालत जैसा फैसला करेगी हमें मानना पड़ेगा. हमें विश्वास है कि कुछ न कुछ जरूर होगा लेकिन क्या होगा हमें नहीं पता.

डॉयचे वेले: पिछले साल की घटना के बाद जिस तरह लोग सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे थे उससे लग रहा है कि सोच में बदलाव आ रहा है.

निर्भया के पिता: जरूर बदलाव तो आया है, जिस तरह से विरोध प्रदर्शन हुए, लेकिन हर वक्त विरोध प्रदर्शन तो नहीं हो सकते. लोगों के मन में 16 दिसंबर के दुष्कर्म को लेकर अब भी रोष है. 16 दिसंबर की घटना को लेकर कई कार्यक्रम हो रहे हैं. लोगों के दिलों में मेरी बेटी और उस घटना की याद ताजा है. लोग भूले नहीं हैं लेकिन विरोध प्रदर्शन हमेशा नहीं होता रहेगा. लोगों की अपनी जिंदगी है. जहां तक इंसाफ की लड़ाई की बात है तो जनता लड़ रही है और हम भी इसमें शामिल हैं.

डॉयचे वेले: आपको निजी तौर पर भारी कुर्बानी देनी पड़ी लेकिन पिछले एक साल में समाज काफी बदला है. आपको क्या लगता है?

निर्भया के पिता: दुष्कर्म के मामले बिल्कुल खत्म हो जाएंगे ऐसा हम नहीं कह सकते. लेकिन हां उन लोगों ने जिस तरह से दरिंदगी की हद पार कर दी थी वह दोबारा नहीं होगा. बलात्कार के मामले कम हो रहे हैं और अब उस तरह की हैवानियत नहीं हो रही है. लेकिन कुछ न कुछ होता रहता है. पहले सिर्फ छोटे आरोपी पकड़े जाते थे. बड़े लोगों पर कार्रवाई नहीं हो पाती थी. अब कानून बदल गया है और बड़े बड़े लोग पकड़े जा रहे हैं. इन कार्रवाई को देखकर आम जनता भी सहम गई है. जनता डरने लगी है कि अब गलत करेंगे तो हमें सजा मिलेगी. लोगों की मानसिकता में बदलाव हुआ है और डर की वजह से लोगों की मानसिकता बदली है. लेकिन यह भी सच है कि कोई भी बुरी चीज जड़ से खत्म नहीं होती लेकिन कम जरूर हो सकती है.

डॉयचे वेले: पिछले साल लोगों के भारी गुस्से को देख सरकार ने महिला सुरक्षा को लेकर कई कदम उठाए. क्या वे कदम लड़कियों की सुरक्षा के लिए काफी है

निर्भया के पिता: नहीं काफी तो नहीं हैं. न्याय प्रणाली में भी बहुत बदलाव की जरूरत है. बहुत सारे ऐसे मामले हैं जो सालों साल से लटके पड़े हैं. उन मामलों में न्याय नहीं मिला है. बलात्कार और हत्या ये दो ऐसे अपराध हैं जिनका निपटारा जल्दी से जल्दी होना चाहिए. इन मामलों को तय समयसीमा के भीतर निपटाया जाना चाहिए. ऐसा करने से लोगों की मानसिकता पर फर्क पड़ेगा. छह या 10 साल केस चलने से लोग भूल जाते हैं. समाज में ऐसे बहुत सारे मामले हैं जिसके बारे में कोई नहीं जानता. अगर कानून की तरफ से न्याय जल्द मिल जाता है तो जाहिर तौर पर लोगों की मानसिकता में बदलाव आएगा.

डॉयचे वेले: एक पिता होने के नाते आप बाकी अभिभावकों के लिए क्या कहना चाहेंगे कि वे कैसे अपने बच्चों को सुरक्षित रखें.

निर्भया के पिता: मां बाप का फर्ज है कि बच्चों को समझाएं. घर से बाहर जा रहे बच्चों को समझाएं कि वे कोई ऐसा काम न करें जिससे हमारा सिर शर्म से झुक जाए. घर से बाहर निकलें तो लक्ष्य के साथ निकलें और अपने काम को निपटा कर घर लौट आएं. मां बाप को अपने बच्चों को समझाना चाहिए कि वे यारी दोस्ती में पड़कर कोई गलत काम न करें.

इंटरव्यू: आमिर अंसारी

संपादन: अनवर जे अशरफ

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