निर्देशन से तौबा किया ड्रीम गर्ल ने | मनोरंजन | DW | 30.09.2013
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

मनोरंजन

निर्देशन से तौबा किया ड्रीम गर्ल ने

हेमा मालिनी का नाम ही दर्शकों को सिनेमाहॉल तक खींच लाता था. ड्रीम गर्ल का जादू जीवन के छह दशक पूरे करने के बावजूद कायम है. आखिर क्या है इसका राज. कोलकाता के दौरे पर आईं ड्रीम गर्ल ने इस बारे में बात की डायचे वेले से.

डीडब्ल्यूः आप छोटे परदे से डांस के स्टेज और संसद तक हर जगह कामयाब रही हैं. इससे कैसा महसूस होता है ?

हेमा मालिनीः अपनी प्रशंसा तो सबको अच्छी लगती है. इससे लगता है कि मेहनत कामयाब रही है, लेकिन मैंने जीवन में सफल होने के लिए कड़ी मेहनत की है. जीवन के हर दौर में सबको कड़ी प्रतियोगिता का सामना करना पड़ता है. आपकी कामयाबी इस बात पर निर्भर होती है कि आप उससे कैसे निपटते हैं.

आपकी कामयाबी की वजह क्या है?

मैं खुद को कामयाब नहीं मानती. मैं खुद को एक ऐसी आम औरत मानती हूं जो जीवन के प्रति एक सकारात्मक नजरिया रखती है. मेरे जीवन में नकारात्मक ऊर्जा के लिए कोई जगह नहीं है. मैंने जीवन के उतार-चढ़ावों से जूझना सीख लिया है. अगर आप ईमानदार और मेहनती हैं तो कोई भी लड़ाई जीत सकते हैं. मेरा दर्शन यह है कि हालात चाहे जैसे भी हों, जीवन का आनंद उठाना चाहिए. चाहें तो इन बातों को ही मेरी कामयाबी, अगर कोई है तो, का राज कह सकते हैं.

आज भी आपके प्रति आम लोगों में वही आकर्षण है जो चार दशक पहले था. आपकी सुंदरता का राज क्या है?

मैं बेहद अनुशासित जीवन बिताती हूं. मेरा खान-पान भी काफी साधारण हैं, रोजाना लगभग तीन लीटर पानी पीने के अलावा कसरत और योगाभ्यास करती हूं. कोई 45 मिनट तक प्राणायाम करती हूं. मैं विशुद्ध शाकाहारी हूं और घर का बना खाना ही पसंद करती हूं. मैं सुंदर साड़ियां पहनती हूं ताकि दिखने में अच्छी लगूं.

पहले के मुकाबले अब महिलाओं की भूमिका में क्या बदलाव आया है?

अब महिलाएं घरों से बाहर निकल कर परिवार और समाज में अहम रचनात्मक योगदान दे रही हैं. आज की महिलाएं जानती हैं कि चीजों को व्यवस्थित रखते हुए उनके बीच संतुलन कैसे बनाए रखना है. वह एक साथ कई मोर्चों पर जूझ रही हैं. आज की महिला चाहे तो वह आसमान पर भी अपनी विजय पताका फहरा सकती है.

मौजूदा दौर की हीरोइनों के बारे में आप क्या सोचती हैं?

अब हिंदी फिल्मोद्योग में ऐसी युवतियां आ रही हैं जो बेहद पेशेवर, स्मार्ट और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं. वह अपने बूते इस उद्योग की चुनौतियों से निपटने में सक्षम हैं. आज की हीरोइनें अपनी भावनाओं को सरेआम व्यक्त करने में जरा भी नहीं हिचकतीं. इस समय भी कई अभिनेत्रियां हिंदी फिल्मों में बेहतर काम कर रही हैं. लेकिन मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहती.

आप निर्देशन में भी हाथ आजमा चुकी हैं. क्या आगे भी ऐसा कोई इरादा है?

मैं आगे निर्देशन नहीं करना चाहती. एक फिल्म बना कर उसको बॉक्स आफिस पर कामयाब बनाने के लिए काफी समर्थन चाहिए. फिल्म चाहे कैसी भी बनी हो, उसकी कामयाबी के लिए बड़े स्तर पर प्रमोशन और प्रचार बेहद जरूरी है.

आगे क्या योजना है?

मैं छोटे परदे के लिए बढ़िया विषयों पर कुछ कामेडी शोज बनाना चाहती हूं. उनके साथ मेरा जुड़ाव सिर्फ निर्माता के तौर पर रहेगा. मैं काफी अभिनय कर चुकी हूं. इसलिए अब कम से कम इस मोर्चे पर एक ब्रेक जरूरी है. कुछ चैनलों के साथ बातचीत भी हुई है. लेकिन अभी कुछ भी पक्का नहीं है.

इंटरव्यूः प्रभाकर, कोलकाता

संपादनः एन रंजन

DW.COM