निराशा और उमंग का ऐतिहासिक दिन | दुनिया | DW | 09.11.2012
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दुनिया

निराशा और उमंग का ऐतिहासिक दिन

जर्मनी आज एक ऐसे ऐतिहासिक दिन को याद कर रहा है जो उसके इतिहास में ऊंचाईयां और गहराईयां लेकर आया है. इस दिन 1918 में गणतंत्र की घोषणा हुई है तो इसी दिन 1938 में यहूदियों का नरसंहार शुरू हुआ.

बर्लिन के राइषटाग के प्राचीर से 1918 में सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी के सांसद फिलिप शाइडेमन ने जर्मन गणतंत्र की घोषणा की थी. दो घंटे बाद कम्युनिस्ट पार्टी के कार्ल लीबक्नेष्ट ने बर्लिन के सिटी विला से मुक्त समाजवादी गणतंत्र की घोषणा की. उस समय राइष चांसलर प्रिंस मार्क फॉन बाडेन थे. उन्होंने अपनी ओर से ही सम्राट विल्हेल्म द्वितीय के गद्दी छोड़ने की घोषणा कर दी. इस घोषणा के बाद उन्होंने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया. सरकार की बागडोर सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी के अध्यक्ष और बाद में गणतंत्र के राष्ट्रपति बने फ्रीडरिष एबर्ट को सौंप दी गई. वाइमार गणतंत्र के नाम से प्रसिद्ध जर्मन गणतंत्र हिटलर के सत्ता में आने तक कायम रहा.

1923 में यह दिन ऐतिहासिक बन गया. इसी दिन आडोल्फ हिटलर और एरिष लूडेनडॉर्फ ने सत्ता पर कब्जा करने की कोशिश की थी.लेकिन म्यूनिख में एक दिन पहले शुरू हुए प्रदर्शन को फेल्डहैर्नहाले तक जाने से पुलिस ने रोक दिया. हिटलर की एनएसडीएपी पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया गया. हिटलर को पांच साल की कैद की सजा दी गई.

लेकिन 1933 में हिटलर सत्ता में आ गया और उसने सभी पार्टियों और ट्रेड यूनियनों पर रोक लगा दी और तानाशाही शासन कायम कर लिया. 1938 में 9 नवम्बर की रात को ही यहूदियों के खिलाफ नरसंहार का नंगा नाच शुरू किया गया. नाजियों के हमलों में इतिहासकारों के अनुसार 1300 लोग मारे गए और 30,000 यहूदियों को यातना शिविरों में ले जाया गया. यहूदियों की करीब 7,500 दुकानों में तोड़ फोड़ की गई. जर्मनी के 1200 सिनोगॉग में अधिकांश को जला दिया गया. उसके बाद यहूदियों का पूरे यूरोप में योजनाबद्ध नरसंहार शुरू हुआ जिसमें दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने तक लाखों यहूदी मारे गए.

नियति का खेल था कि 1989 में इसी दिन विभाजित जर्मनी के विभाजन का प्रतीक बर्लिन की दीवार को खोल दिया गया. यह भी किसी योजना के तहत नहीं हुआ था बल्कि जीडीआर में सत्तारूढ़ पार्टी के प्रवक्ता की नादानी से इसकी घोषणा हो गई थी. इसके साथ न सिर्फ विभाजित शहर की सीमा खुली बल्किन जर्मनी के विभाजन का भी अंत शुरू हुआ. हजारों लोग इस दिन बर्लिन के ब्रांडेनबुर्ग गेट पर दीवार के गिरने का जश्न मनाते हैं. जर्मनी और यूरोप के एकीकरण का श्रेय इसी दिन को जाता है.

बर्लिन दीवार गिरने की वर्षगांठ के मौके पर यूरोपीय संसद के अध्यक्ष जर्मनी के मार्टिन शुल्स बर्लिन में यूरोप नीति पर भाषण देंगेउनका जोर इस बात पर होगा कि 1989 में बर्लिन दीवार गिरने के कारण ही यूरोप का विभाजन को खत्म करना संभव हुआ. कोनराड आडेनावर फाउंडेशन, रॉबर्ट बॉश फाउंडेशन औऱ फ्यूचर फाउंडेशन नें 2010 में संयुक्त रूप से पहला यूरोप भाषण आयोजित किया था. इसमें यूरोपीय संघ के अध्यक्ष हरमन फॉन रॉमपॉय ने दिया था जबकि 2011 में यह जिम्मेदारी यूरोपीय आयोग के प्रमुख जोसे मनाएल बारोसो ने निभाई.

एमजे/एनआर(डीपीए)

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