नाटो का कश्मीर पर असर | दुनिया | DW | 02.07.2013
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दुनिया

नाटो का कश्मीर पर असर

अफगानिस्तान से 2014 में नाटो सेनाओं के हटने के बाद आतंकवाद से जूझ रहे कश्मीर के हालात बिगड़ सकते हैं. पिछले एक दशक में वहां कुछ शांति रही है लेकिन छह महीने से स्थिति खराब होती जा रही है.

भारतीय सेना के इंफैंट्री विभाग के पूर्व महानिदेशक जनरल शंकर प्रसाद का मानना है कि अमेरिकी नेतृत्व वाली नाटो सेना जैसे ही अफगानिस्तान से निकलेगी, इसका असर कश्मीर पर पड़ेगा, "तालिबान को पाकिस्तान का समर्थन हासिल है और अफगानिस्तान से सेना हटते ही वे फिर से पाकिस्तान के साथ मिल जाएंगे और उन्हें कश्मीर में गड़बड़ी करने के लिए उकसाया जाएगा. हमें इस बात को समझ लेना चाहिए कि घुसपैठ और कश्मीर में आतंकवाद बढ़ने के लिए हमें तैयार रहना चाहिए."

हाल में अमेरिका के एक थिंक टैंक की रिसर्च ने भी चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि किस तरह पाकिस्तान "घरेलू संकट से ध्यान अलग करने के लिए" लश्कर ए तैयबा के साथ मिल कर कश्मीर में हिंसा करा सकता है.

राजनीति शास्त्र के छात्र तौसीफ जमील का कहना है, "सारी बातें साफ साफ दिख रही हैं. जिन युवकों ने इतने सालों में सिर्फ मौतें और विध्वंस देखा है, उन्हें लगता है कि भारत उनकी आजादी मार रहा है. इस बात की संभावना है कि अगर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के इस्लामी कट्टरवादी कश्मीर का रुख करें, तो ये युवक उनके साथ हो जाएं."

बिगड़ रहे हालात

श्रीनगर के रहने वाले 25 साल के बिलाल बट्ट मानते हैं कि पिछले छह महीनों में हालात फिर बिगड़े हैं. उन्हें डर है कि आगे और भी मुश्किल दौर हो सकता है, "2001 के संसद हमले में दोषी करार दिए गए अफजल गुरु को इस साल फांसी दिए जाने के बाद स्थिति फिर से तनावग्रस्त हुई है. पिछले छह महीनों में सेना और अलगाववादियों के टकराव के ज्यादा मामले सामने आए हैं."

भारत हिस्से वाले कश्मीर में 1989 से जारी हिंसा में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें ज्यादातर आम शहरी हैं. अस्सी के दशक में सेना तैनात होने के बाद से हिंसा में इजाफा हुआ है और इसी दौरान भारतीय सेना पर लगातार मानवाधिकार के उल्लंघन के आरोप भी लगे हैं.

पिछले दिनों भी सेना पर दो निर्दोष युवकों की हत्या का आरोप लगा है, जिस पर भारतीय सेना ने अफसोस जताया है. इस मामले की जांच भी हो रही है लेकिन गुस्साए लोगों ने इसके खिलाफ प्रदर्शन किए हैं और सेना के चलाए जा रहे एक स्कूल में आग भी लगा दी.

सरकार को सोचना होगा

पिछले दिनों प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के कश्मीर दौरे के खिलाफ भी भारी प्रदर्शन हुआ. इस दौरान सेना और अलगाववादियों के बीच झड़प में आठ भारतीय सैनिकों की मौत हो गई और कई जख्मी हुए. जम्मू कश्मीर मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष मुहम्मद यासीन मलिक ने डॉयचे वेले से कहा कि अब तक नई दिल्ली के साथ बातचीत से कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं. भारत को अब कश्मीर के मामले में "नरमी बरतनी चाहिए और लोगों की महत्वाकांक्षाओं का सम्मान" करना चाहिए.

कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान में लगातार तनाव जारी है. 1947 में आजादी के बाद से दोनों देश इस पर कई बार संघर्ष कर चुके हैं. हालांकि 2003 में दोनों के बीच औपचारिक तौर पर युद्धविराम हो गया लेकिन कश्मीर मुद्दे के हल का कोई रास्ता नहीं निकल पाया. अब पाकिस्तान में एक बार फिर सत्ता परिवर्तन हुआ है आगे का रास्ता इस बात पर भी निर्भर करेगा कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पाकिस्तानी सेना और तालिबान से कैसे निबटते हैं.

रिपोर्टः मुरली कृष्णन/एसएफ

संपादनः ए जमाल

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