नहीं हुआ है अभी भी प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं का अंत | भारत | DW | 04.05.2020
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भारत

नहीं हुआ है अभी भी प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं का अंत

देश के कोने कोने में फंसे प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह राज्य तक पहुंचाने के लिए अब विशेष ट्रेनें चल रही हैं, लेकिन यात्रा का शुल्क उन्हीं से वसूला जा रहा है. सवाल उठ रहे हैं कि श्रमिकों से ये शुल्क क्यों वसूला जा रहा है.

तालाबंदी की शुरुआत से गंभीर समस्या में फंसे प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं का अभी भी अंत नहीं हुआ है. बिना रोजगार और बिना कमाई के देश के कोने कोने में फंसे इन श्रमिकों को इनके गृह राज्य तक पहुंचाने के लिए अब विशेष ट्रेनें चल तो रही हैं लेकिन इन्हें वापस भेजने का खर्च कौन उठाएगा इस पर विवाद खड़ा हो गया है. केंद्र सरकार ना इन्हें निशुल्क यात्रा करने दे रही है और ना इनके रेल टिकटों का खर्च खुद उठा रही है.

राज्य सरकारें भी यह खर्च नहीं उठा रही हैं जिसके फलस्वरूप श्रमिकों को खुद ही टिकट की कीमत का बोझ उठाना पड़ रहा है. बताया जा रहा है कि भारतीय रेल इन श्रमिकों से यात्रा की लंबाई के हिसाब से बिना एसी स्लीपर सीट का किराया वसूल रही है. इसके अतिरिक्त 30 रुपये सुपरफास्ट शुल्क और 20 रुपये आरक्षण शुल्क भी ले रही है. रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वी के यादव ने एक अखबार से कहा कि जानबूझ कर इन ट्रेनों को निशुल्क नहीं चलाया जा रहा है ताकी सिर्फ वही लोग यात्रा कर सकें जो वाकई यात्रा करने का इरादा रखते हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा निशुल्क रखने पर कौन कौन स्टेशनों पर आ रहा है और कौन कौन यात्रा कर रहा है यह जानना और इस पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो जाता. हालांकि यह सब जानने के लिए सिर्फ टिकट लेना आवश्यक किया जा सकता था और खर्च सरकार उठा सकती थी. लेकिन ऐसा नहीं किया गया है. रेलवे ने राज्यों को टिकट सौंप दिए हैं और उन्हें उनका शुल्क इकठ्ठा करके रेलवे को सौंपने को कहा है. बताया जा रहा है कि खर्च कौन उठा रहा है इस संबंध में अभी एकरूपता भी नहीं आई है.

कहीं श्रमिकों के नियोक्ताओं ने उन्हें टिकट खरीदने के पैसे दे दिए हैं तो कहीं गैर सरकारी संगठन श्रमिकों को पैसे दे रहे हैं. कुछ राजनीतिक पार्टियों ने भी श्रमिकों की मदद करने का फैसला लिया है. कांग्रेस पार्टी ने अपनी सभी राज्य इकाइयों को निर्देश दिया है कि उनके राज्य में सभी श्रमिकों की रेल यात्रा का खर्च वो उठायें.

तालाबंदी 3.0

सोमवार चार मई से देश में तालाबंदी के तीसरे चरण की शुरुआत हो गई है. पूरे देश में जिलों को संक्रमण के मामलों की संख्या के हिसाब से लाल, नारंगी और हरे इलाकों में बांटा गया है. स्कूल, कॉलेज, शिक्षा संस्थान, धार्मिक स्थल, सिनेमा घर, बाल काटने की दुकानें, जिम, स्पा इत्यादि अभी भी इन सभी इलाकों में बंद रहेंगे. सरकारी और निजी दफ्तरों को खोलने की इजाजत दे दी गई है लेकिन सिर्फ 33 प्रतिशत स्टाफ के साथ. इसके अलावा सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजर और मास्क का उपयोग, आने जाने वालों की थर्मल स्कैनिंग आदि का इंतजाम भी करना होगा.

निजी वाहनों में आवाजाही की इजाजत दे दी गई है लेकिन सार्वजनिक यातायात अभी भी बंद है. बाजार और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स अभी भी बंद रहेंगे लेकिन गली-मोहल्लों में हर तरह की दुकानें खुल सकेंगी. पूरे देश से शराब की दुकानों पर सोमवार सुबह से भी सबसे ज्यादा लोगों की भीड़ उमड़ने की खबरें आई.

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