नल का पानी भी पीने लायक | दुनिया | DW | 04.12.2013
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दुनिया

नल का पानी भी पीने लायक

नगर निगम का पानी सीधे नल से पीने पर बीमारियों का ख्याल भी आता है, लेकिन जर्मनी में एक नए कानून के बाद नल का पानी सेहत के लिए अच्छा माना जा रहा है. लोग चेक करा रहे हैं उनकी इमारत के पाइप इस पानी को खराब तो नहीं कर रहे.

पीने के पानी में सीसे की मात्रा पर नजर रखने के लिए जर्मनी ने नया कानून लागू किया है. इसके तहत एक लीटर पानी में सीसे की मात्रा 10 माइक्रोग्राम से ज्यादा नहीं हो सकती. हालांकि कई पुरानी इमारतों में पाइप पुराने हैं और पानी को दूषित कर रहे हैं.

बॉन यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फॉर हाइजीन एंड पब्लिक हेल्थ में पानी के नमूनों की जांच चल रही है. ये नमूने वहां अधिकारी, किराएदार और मकान मालिक लेकर आ रहे हैं. लोग जानना चाहते हैं कि जो पानी वे पी रहे हैं उसमें सीसे का क्या स्तर है, और इंस्टीट्यूट जांच कर उन्हें बता रहा है.

पानी के साथ हमारे शरीर में जा रहा सीसा निर्धारित सीमा से ज्यादा हो तो यह तंत्रिका तंत्र और रक्त संचार तंत्र को प्रभावित करता है. इंस्टीट्यूट में खाद्य विशेषज्ञ हेराल्ड फैर्बेर ने कहा, "भ्रूण, नवजात शिशुओं और छह साल से छोटे बच्चों को इससे ज्यादा खतरा है, क्योंकि उनका तंत्रिका तंत्र भारी धातुओं से ज्यादा प्रभावित होता है.

कई रिसर्चों में पाया गया है कि शिशुओं और छोटे बच्चों के ज्ञान का विकास भी पानी में मौजूद सीसे की मात्रा से जुड़ा है. इससे उनकी सुनने की शक्ति पर भी असर पड़ सकता है. उन्होंने बताया, "अजैविक सीसे के मिश्रणों से कैंसर भी हो सकता है."

महिलाओं को खतरा

खाद्य विशेषज्ञ यह सलाह भी देते हैं कि मां बनने की इच्छुक महिलाओं के पीने के पानी में सीसे का स्तर ज्यादा नहीं होना चाहिए. वयस्क शरीर में सीसा जमा होता जाता है. गर्भधारण के समय यह सीसा शरीर में फैल सकता है. इससे भ्रूण या नवजात शिशु को खतरा हो सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक खतरा मां को भी है.

सीसे के प्रभाव के बारे में जानकारी हमारे पास तभी से है जब से धातु के पाइपों का इस्तेमाल हो रहा है. हालांकि इन्हें बनाने के लिए सस्ती धातु का इस्तेमाल होता आ रहा है. किस घर में किस तरह के पाइप इस्तेमाल हो रहे हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि जर्मनी के किस इलाके की बात हो रही है.

देश के दक्षिणी इलाकों में पीने के पानी के लिए सीसे वाली पाइपों के इस्तेमाल पर 100 से ज्यादा सालों से पाबंदी है. लेकिन उत्तरी जर्मनी में 1970 तक उन्हें मकानों में लगाया जाता रहा. अधिकारियों ने इससे निपटने के लिए दूसरे तरीके निकाले, जैसे पाइप में चूने का इस्तेमाल. इससे पानी भारी धातुओं से दूषित होने से बचता है. लेकिन यह बहुत सुरक्षित उपाय नहीं था.

लापरवाही

फैर्बेर ने डॉयचे वेले से कहा, "आजकल, हम जानते हैं कि इस तरह के सुरक्षा कवच के बावजूद सीसे की जो मात्रा पानी में चली जाती है, वह निर्धारित सीमा से ज्यादा है."

कई लोगों को तो पानी में सीसे की इस समस्या के बारे में पता भी नहीं है. जर्मनी के टेक्निकल एंड साइंटिफिक एसोसिएशन फॉर गैस एंड वॉटर के कारिन गेरार्डी कहते हैं, "जर्मनी में पीने का पानी उच्च स्तर का है, और लोग यही मानते हैं." गेरार्डी की संस्था 1990 से कोशिश कर रही है कि पीने के पानी के बारे में यूरोपीय संघ के सख्त दिशा निर्देश लागू हों. इन दिशा निर्देशों में पीने के पानी से सीसे की मात्रा धीरे धीरे कम करके पूरी तरह खत्म करने की बात कही गई है.

गेरार्डी ने बताया कि पानी के कई सप्लायरों ने दसियों साल पहले ही अपने कनेक्शन के पाइप तभी बदल दिए जब इस बारे में पहली बार बात हुई थी, लेकिन कई मकान मालिकों और बिल्डरों ने इस पर अमल नहीं किया. ऐसा भी हो सकता है कि उन्हें मालूम ही ना हो कि उनके घरों के पाइप में निर्धारित सीमा से ज्यादा सीसा है. इस बारे में मीडिया में या राजनीतिक स्तर पर भी ज्यादा दबाव नहीं डाला गया.

सिर्फ जर्मनी नहीं

जर्मनी के दूसरे राज्य भी इस समस्या से जूझ रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और यूरोपीय संघ के दूसरे देशों के सामने भी यह बड़ी चुनौती है. लेकिन इन सभी देशों में पीने के पानी में सीसे की मात्रा कम करने की कोशिशें जारी हैं. जर्मनी के इन प्रयासों की तारीफ भी हो रही है.

अब जबकि पानी में सीसे की सीमा 25 माइक्रोग्राम से घटाकर 10 माइक्रोग्राम कर दी गई है, तो और देर करने का सवाल नहीं होता. यह कानून एक दिसंबर से लागू हो चुका है.

जर्मनी की संघीय पर्यावरण एजेंसी (यूबीए) के योखेन फ्लास्बार्थ ने कहा, "नई निर्धारित सीमा तय होने के बाद से सीसे के पाइप पीने के पानी के लिए बेकार हैं." जिन मकानों में अभी भी इस तरह के पुराने पाइप लगे हैं उनके मालिकों से कहा गया है कि वे मकान में रहने वालों को इस बारे में सूचित करें और उन्हें खतरे के बारे में बताएं.

महिलाओं को सलाह दी गई है कि जब तक सारे के सारे पाइप बदल नहीं जाते पुराने पाइपों के पानी का इस्तेमाल उन्हें या बच्चों को नहीं करना चाहिए. ना ही इसका इस्तेमाल खाना बनाने में होना चाहिए. फैर्बेर ने बताया बॉन के पुराने इलाकों से आ रहे पानी के नमूनों में सीसे की मात्रा 60 से 70 फीसदी नमूनों में है. नई इमारतें इससे कम प्रभावित हैं. जो इमारतें 1970 के बाद बनी हैं उनके साथ कोई समस्या नहीं है.

रिपोर्ट: आंद्रेआस नोल/ एसएफ

संपादन: एन रंजन

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